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पर्चा वापस न ले पाए BJP का उम्मीदवार, लोगों ने घर में ही कर दिया बंद

नागपुर में BJP ने एक उम्मीदवार को अपना नामांकन वापस लेने को कहा तो लोगों ने उस शख्स को घर में बंद कर दिया ताकि वह ऐसा न कर पाए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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महाराष्ट्र में निकाय चुनाव कई वजहों से चर्चा में आ रहे हैं। कहीं कोई टिकट न मिलने से निराश है तो कहीं जिसे मिला है, उससे वापस ले लिया गया। अब ऐसा ही एक रोचक मामला नागपुर से आया है। नागपुर महानगर पालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दो नेताओं को उम्मीदवार बनाया था और बाद में एक उम्मीदवार से कहा कि वह अपना टिकट वापस ले लें। उम्मीदवार तो इससे सहमत थे लेकिन उनके समर्थक नहीं माने। अब नेताजी को रोकने के लिए उनके समर्थकों ने उन्हें ही घर में बंद कर दिया ताकि वह अपना नामांकन वापस न ले पाएं।

 

नागपुर महानगर पालिका के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। महाराष्ट्र की कुल 29 नगर निगमों में भी चुनाव होने हैं। इनके लिए नामांकन वापसी की तारीफ 2 जनवरी यानी शुक्रवार तक है। इन चुनावों के नतीजे 16 जनवरी को आएंगे। इसी के साथ, मुंबई की महानगर पालिका यानी BMC के भी चुनाव हो रहे हैं।

 

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नागपुर में क्या हुआ?

 

बीजेपी ने नागपुर के वार्ड नंबर 13 (डी) से दो नेताओं विजय होले और किसान गावंड को उम्मीदवार बनाया था और अपने एबी फॉर्म में दोनों का जिक्र भी किया था। बाद में BJP ने किसान गावंडे से कहा कि वह अपना नाम वापस ले लें। इस फैसले से उनके समर्थक नाराज हो गए। कार्यकर्ता और उनके समर्थक चाहते थे कि वार्ड 13 (डी) के अंतर्गत आने वाले हजारीपहाड़ इलाके से किसान गावंडे ही चुनाव लड़ें। जब नामांकन वापस लेने की बारी आई तो उनके समर्थकों ने उनका घर घेर लिया और उन्हें घर में ही बंद कर दिया। उनके समर्थकों ने नारेबाजी की और उनसे अपील की वह अपना नामांकन वापस न लें। 

 

मामला बिगड़ा देख बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) परिणय फुके और स्थानीय नेता मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को समझाया। कार्यकर्ताओं को शांत कराने के बाद ही किसान गावंडे अपना नामांकन वापस ले पाए। किसान गावंडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से इस बारे में कहा, 'इलाके के बीजेपी कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूं, इसलिए वे नाराज हो गए। हम पार्टी नेतृत्व के फैसले को समझते हैं और इसी वजह से मैंने नामांकन वापस ले लिया।'

 

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पुराना वीडियो वायरल होने पर कटा टिकट

 

ऐसा ही एक और रोचक मामला पुणे से सामने आया। बीजेपी ने पूजा मोरे-जाधव को टिकट दिया था लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। बाद में उनका एक वीडियो सामने आया जिसमें वह रोती हुई दिखाई दीं। उनकी उम्मीदवारी तब विवादों में आ गई जब मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी पत्नी के खिलाफ की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों वाले उनके पुराने वीडियो सामने आए। केंद्रीय मंत्री और पुणे से बीजेपी सांसद मुरलीधर मोहोल ने पुष्टि की है कि उनका नामांकन वापस ले लिया गया है।

 

वहीं, पूजा मोरे-जाधव ने खुद को सोशल मीडिया ट्रोलिंग का शिकार बताया। उन्होंने कहा, ‘मेरे बारे में गलत जानकारी फैलाई गई और यह दिखाने की कोशिश की गई कि मैं बीजेपी की विचारधारा में विश्वास नहीं रखती। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग को देखते हुए मैंने अपना नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ये टिप्पणियां किसी और लड़की ने की थी लेकिन उनका नाम इससे जोड़ दिया गया।

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