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AI समिट 2026: भारत ग्लोबल लीडर, AI की दुनिया में हाशिए पर क्यों है पाकिस्तान?

भारत दुनियाभर में AI सेक्टर के शीर्ष देशों में शुमार है। हेल्थ सेक्टर से लेकर फाइनेंस, कृषि और हॉस्पिटल सेक्टर तक, भारत हर क्षेत्र में AI का इस्तेमाल कर रहा है।

Ind vs Pak in AI Sector

AI इंडिया इम्पैक्ट समिट। AI इमेज। Photo Credit: Sora

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भारत अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के सबसे बड़े संगम 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026' की मेजबानी कर रहा है। दुनिया के 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, 100 से ज्यादा AI टेक दिग्गज इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विदेशी मेहमानों के आने का तांता लगा है। भारत के इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम से पाकिस्तान को बाहर रखा गया है। पाकिस्तान जहां AI सेक्टर में अभी हाशिए पर है, भारत दुनिया के शीर्ष देशों का नेतृत्व कर रहा है। 

दिल्ली के भारत मंडपम में 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो' का भव्य आयोजन हुआ है। 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में होने वाले'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। भारत AI सेक्टर में दुनिया को एक साथ लाना चाहता है, जिससे बेहतर जानकारियों की साझेदारी हो और दुनिया जिम्मेदारी के साथ इस सेक्टर में आगे बढ़े।

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नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
AI पर चर्चा करने के लिए दुनिया को एक साथ ला रहे हैं। आज से, भारत दिल्ली के भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी कर रहा है। मैं इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। हमारा मकसद 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए AI के इस्तेमाल की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पाकिस्तान AI की इस अहम समिट से बाहर क्यों है?

  • AI पर गैरजिम्मेदार रवैया: पाकिस्तान ग्लोबल साउथ का एक अहम देश है लेकिन भारत ने इस AI इम्पैक्ट समिट में नहीं बुलाया है। भारत ने इसका आधिकारिक कारण नहीं बताया है लेकिन दावा यह किया जा रहा है कि उन देशों को तरजीह दी गई है, जो जिम्मेदारी के साथ AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सम्मेलन में 100 से ज्यादा देश और 20 देशों के राष्ट्र प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं।
  • अपारदर्शनी नीतियां: जानकारों का कहना है कि AI पर होने वाली इस समिट में उन देशों पर जोर दिया गया है, जिनका AI को लेकर एक जैसा नजरिया है। पाकिस्तान की AI नीतियां जरा भी पारदर्शी नहीं हैं, सुरक्षा मानकों की कमी है। भारत ने उन देशों को भी प्राथमिकता दी है, जिनका ग्लोबल AI इकोसिस्टम में सक्रिय भूमिका है। पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट में बहुत पीछे है।
  • AI के सैन्य इस्तेमाल का डर: 'डिजिटल इंडिया फाउंडेशन' ने हाल ही में पाकिस्तान के AI टेक्नोलॉजी सेंटर (AITeC) की वैश्विक संगठनों में सदस्यता का विरोध किया था। चिंता यह है कि पाकिस्तान AI का हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। साइबर अटैक और सैन्य हमलों में पाकिस्तान अपनी इस क्षमता को झोंक सकता है। पाकिस्तान आतंकवाद में गहरे तक संलिप्त है। 

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भारत का AI बजट कितना है?

भारत दुनिया के लिए ग्लोबल क्लाउड और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनने की कोशिश कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिजिटल और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा हिस्सा प्रस्तावित किया है। AI के सरकार अगले 5 साल में 10,371.92 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है। भारत एप्लिकेशन, मॉडल, कंप्यूटिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर ध्यान दे रही है।

भारत की AI उपलब्धि क्या है?

भारत में AI के लिए अब तक 38,000 ग्राफिक प्रॉसेसिंग यूनिट लगाए जा चुके हैं।  भारत में टेक और AI सेक्टर में 60 लाख लोग नौकरी कर रहे हैं। यहां AI में अपार संभावनाएं हैं। टेक सेक्टर में करीब 23-24 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू आ सकता है। भारत ने 2035 तक 1.7 ट्रिलियन डॉलर AI से हासिल करने का लक्ष्य रखा है। 

भारत की तुलना में पाकिस्तान कहां है?

एक तरफ भारत की AI सेक्टर में ग्लोबल रैंकिंग टॉप 5 देशों में कई साल से टिकी है। स्टैनफोर्ड की 'ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल 2025' में भारत को दुनिया का तीसरा सबसे सक्रिय AI इकोसिस्टम बताया गया है। यह आंकड़े, साल 2024 के विश्लेषण पर तैयार किए गए थे। पहले स्थान पर अमेरिका और दूसरे स्थान पर चीन है। यह रैंकिंग रिसर्च, डेवलेपमेंट, टैलेंट, इकोनॉमी, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग फैक्टर्स पर निर्भर करती है। 

दूसरी तरफ पाकिस्तान AI सेक्टर में भी हाशिए पर है। 'गवर्नमेंट AI रेडिनेस इंडेक्स' में दक्षिण एशिया में पाकिस्तान 8वें स्थान है। भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। पाकिस्तान सरकार ने योजना बनाई है कि साल 2030 तक, AI में 1 अरब डॉलर का निवेश करेगा, भारत की तुलना में यह बजट बहुत कम है। ऑक्सफोर्ड इनसाइट्स और गवर्नमेंट AI रेडिनेस इंडेक्स में पाकिस्तान 17 देशों की लिस्ट में 8वें पायदान पर है। ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में 133 देशों की लिस्ट में 97वें स्थान पर पाकिस्तान है।  

हाशिए पर क्यों है पाकिस्तान?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है। पाकिस्तान का AI बजट, दुनिया की तुलना में बहुत कम है। भारत ने एक तरफ जहां साल 2035 तक 1.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था AI से हासिल करने का लक्ष्य रखा है, पाकिस्तान 2030 तक सिर्फ 1 अरब डॉलर इस सेक्टर में निवेश कर पाएगा। पाकिस्तान इस सेक्टर में अभी सिर्फ चरणबद्ध तरीके से निवेश की बात कर रहा है, अलग से  निवेश नहीं कर रहा है। 

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AI के लिए क्या करने वाला है पाकिस्तान?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फरवरी 2026 में एलान किया था कि साल 2030 तक AI में पाकिस्तान निवेश बढ़ाएगा। पाकिस्तान 1 अरब डॉलर AI सेक्टर में साल 2030 तक निवेश करेगा। बेहतर एजुकेशन के लिए अगले 4 साल में 1000 फुल फंडेंड PhD स्कॉलरशिप भी पाकिस्तान देना। पाकिस्तान रिसर्च सेंटर भी विकसित करने पर जोर देगा। ये कोशिशें भारत की तुलना में बेहद कमजोर हैं। 

 

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AI सेक्टर में पाकिस्तान के देसी टूल कौन से हैं?

  •  AIAV: पाकिस्तान के AI इंजीनियर हम्माद खान और साद मुगल ने साल 2023 में अपने स्तर पर एक कवायद की थी। दोनों ने मिलकर AIAV नाम से एक AI टूल लॉन्च किया था। यह टूल, यूजर के X हैंडल से उनके ट्वीट्स स्कैन कर पर्सनलाइज्ड बायोग्राफी, रैप और डेटिंग प्रोफाइल बनाने में सक्षम है। इसे ChatGPT, Elasticsearch और GoogleNLP की मदद से तैयार किया गया है। लीगल और फाइनेंशियल सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। 
  •  SOCByte: पाकिस्तानी AI प्लेटफॉर्म एसओसी बाइट (SOCByte) ने देश का पहला AI ऑपरेटेड साइबरसिक्योरिटी प्रोग्राम लॉन्च किया है, जिसका नाम 'Dexter' है। यह एक सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर एनालिस्ट है। यह साइबर सिक्टोरिटी एक्सपर्ट का काम आसान करता है।  
  • जहानत AI: पाकिस्तान ने जहानत AI बनाया है। पाकिस्तान का देसी GPT जैसी सर्विस है। इसे मेहविश सलमान अली की कंपनी डेल्टा वॉल्ट ने तैयार किया है। यह पाकिस्तान में ही बनी है। उर्दू और स्थानीय भाषाओं की बेहतर समझ इस जीपीटी में है। 
  • LLM: पाकिस्तान ने एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल तैयार किया है, जिसमें उर्दू और स्थानीय भाषाओं को समझाने की क्षमता है। इसे पाकिस्तान के कुछ सरकारी संस्थाओं ने जैज के साथ मिलकर तैयार किया है।
  • सिंधी TTS-STT मॉडल: यह भी चैट जीपीटी जैसा है। इसे पाकिस्तानी आईटी प्रोफेशनल फहद मकसूद काजी ने तैयार किया है। सिंधी भाषियों के लिए यह ऐप मददगार है। 
  • कलाब: यह भी उर्दू के चैटजीपीटी मॉडल जैसा है। इसे पाकिस्तान के कुछ छात्रों ने तैयार किया है। यह टूल, पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय है। 

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