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भारत में आया Meta Muse तो क्या बदल जाएगा WhatsApp का इस्तेमाल? समझिए

Meta ने नया AI असिस्टेंट म्यूज लॉन्च किया है, जो अमेरिका में व्हाट्सऐप और म्यूज ऐप पर उपलब्ध है। भारत व्हाट्सऐप का बड़ा बाजार है, इसलिए यहां भी इसकी चर्चा काफी ज्यादा हो रही है।

representative image of gun Meta Muse and WhatsApp

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Chatgpt

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Meta ने अपना नया AI असिस्टेंट म्यूज (Muse) लॉन्च किया है। यह सामान्य चैटबॉट से थोड़ा आगे है। फिलहाल म्यूज को अमेरिका में लॉन्च किया गया है। इसे अलग म्यूज ऐप के साथ-साथ व्हाट्सप्प (WhatsApp) के जरिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर यह AI एजेंट भारत में आता है तो इससे भारतीय यूजर्स के व्हाट्सप्प इस्तेमाल करने के तरीके में क्या बदलाव आएगा और इसका उन पर क्या असर पड़ेगा।

 

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा व्हाट्सप्प यूज करने वाला देश है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में करीब 53 से 61 करोड़ लोग व्हाट्सप्प इस्तेमाल करते हैं। यह दुनिया के कुल व्हाट्सप्प यूजर्स का करीब 17% है। इसके बाद ब्राजील का नंबर आता है, जहां करीब 14 से 15 करोड़ लोग व्हाट्सप्प इस्तेमाल करते हैं। वहीं, करीब 9 से 12 करोड़ यूजर्स के साथ इंडोनेशिया तीसरे नंबर पर है।

 

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Meta म्यूज का क्या है काम?

Meta का म्यूज एक पर्सनल AI एजेंट है, जो आपकी जगह कई काम खुद कर सकता है। जैसे ईमेल भेजना, टिकट बुक करना, बिल भरना, अपॉइंटमेंट लेना और सामान खरीदना। खास बात यह है कि इन कामों के लिए आपका हर समय मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा। यह कैलेंडर, ईमेल, पेमेंट, हेल्थ, शॉपिंग और स्मार्ट होम जैसी सेवाओं से जुड़ सकता है। हालांकि, हर सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले यह यूजर से अलग-अलग मंजूरी लेता है। Meta का कहना है कि म्यूज एक अलग और सुरक्षित वर्चुअल मशीन में चलता है। यानी इसे आपके असली पासवर्ड या पेमेंट डिटेल्स की सीधे पहुंच नहीं होती।

म्यूज से कैसे बदलेगा व्हाट्सप्प का एक्सपीरियंस?

म्यूज को इस तरह तैयार किया गया है कि यह सिर्फ यूजर के सवालों का जवाब ही न दे बल्कि उसकी तरफ से जरूरी काम भी कर सके। इसके लिए यूजर व्हाट्सऐप के जरिए म्यूज को ईमेल, कैलेंडर, पेमेंट, शॉपिंग, हेल्थ और स्मार्ट होम जैसे ऐप्स का एक्सेस दे सकता है। इसके बाद AI यूजर की जरूरत के हिसाब से इन ऐप्स में कई काम खुद कर सकेगा।

 

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म्यूज एक अलग वर्चुअल मशीन पर चलता है। आसान भाषा में कहें तो यह क्लाउड पर मौजूद एक वर्चुअल कंप्यूटर की तरह काम करता है। इसका मतलब है कि यूजर के फोन या कंप्यूटर पर सक्रिय न रहने के दौरान भी AI कुछ काम बैकग्राउंड में जारी रख सकता है। हालांकि, यूजर किसी भी समय तय कर सकता है कि म्यूज को किन ऐप्स का एक्सेस देना है और उसे वापस भी ले सकता है।

निजी डेटा की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती

म्यूज को ईमेल, फोटो और पेमेंट जैसी निजी जानकारी का एक्सेस मिलने से यह ज्यादा काम का हो जाता है लेकिन इसके साथ सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है। Meta का कहना है कि म्यूज की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सिस्टम में एक अलग AI एजेंट लगाया गया है। कुछ काम करने से पहले म्यूज यूजर से अनुमति भी लेगा। कंपनी के मुताबिक, यूजर चाहें तो अपनी बातचीत को Meta के AI मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने से रोक सकते हैं। Meta इस साल म्यूज का एन्क्रिप्टेड वर्जन भी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

Related Topic:#Meta#Whatsapp#AI

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