अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो निवेश से पहले अलग-अलग पेंशन फंड मैनेजरों के प्रदर्शन को देखना आपके लिए जरूरी हो सकता है। हाल ही में जारी आंकड़ों में एक साल और पांच साल के रिटर्न की तुलना की गई है, जिससे यह पता चलता है कि अलग-अलग फंड मैनेजरों का प्रदर्शन अलग रहा है।
नेशनल पेंशन सिस्टम भारत सरकार की एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है। इसमें निवेशक अपने रिटायरमेंट के लिए नियमित निवेश कर सकते हैं। इस योजना में जमा राशि को अलग-अलग पेंशन फंड मैनेजर अल-अलग एसेट क्लास में निवेश करते हैं। निवेश पर मिलने वाला रिटर्न मार्केट ट्रेंड और फंड मैनेजर के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसका मतलब है कि अगर आपने सोच समझकर सही जगह निवेश किया है तो आपको अच्छा रिटर्न भी मिल सकता है।
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लंबे समय का रिटर्न देखें
एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई पेंशन फंड मैनेजरों ने डबल डिजिट का रिटर्न दिया है। इक्विटी आधारित निवेश विकल्पों में कई फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा। हालांकि, अलग-अलग एसेट क्लास में रिटर्न अलग-अलग रिकॉर्ड किया गया है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल एक साल का प्रदर्शन नहीं बल्कि लंबी अवधि के रिटर्न को भी देखना जरूरी माना जाता है।
लंबे समय के लिए निवेश का विकल्प
पांच साल के आंकड़ों में भी कई पेंशन फंड मैनेजरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लंबी अवधि के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कई फंड लगातार बेहतर रिटर्न देने में सफल रहे हैं। इसी वजह से एनपीएस को लंबी अवधि के निवेश के विकल्प के रूप में देखा जाता है। एनपीएस में निवेश के दौरान निवेशकों को अपनी जरूरत के अनुसार, फंड मैनेजर चुनने की सुविधा मिलती है। अगर किसी निवेशक को लगता है कि किसी दूसरे फंड मैनेजर का प्रदर्शन बेहतर है, तो वह निर्धारित नियमों के तहत अपना फंड मैनेजर भी बदल सकता है।
कहां लगाया जाता है पैसा?
एनपीएस में निवेश की राशि को अलग-अलग एसेट क्लास में लगाया जाता है। इनमें इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियां और वैकल्पिक निवेश शामिल हैं। निवेशक एक्टिव चॉइस और ऑटो चॉइस के माध्यम से अपने निवेश का तरीका चुन सकते हैं। एक्टिव चॉइस में निवेशक स्वयं तय करते हैं कि किस एसेट क्लास में कितना निवेश करना है, जबकि ऑटो चॉइस में निवेशक की उम्र के अनुसार निवेश का अनुपात तय होता है।
टैक्स में मिलता है फायदा
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए एनपीएस को टैक्स में मिलने वाले फायदे के कारण भी पसंद किया जाता है। आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इसके अलावा रिटायरमेंट के समय एन्युटी खरीदने और आंशिक निकासी से जुड़े अलग-अलग नियम भी लागू होते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल हाल का रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। किसी भी पेंशन फंड को सिलेक्ट करते समय उसके लंबे समय के प्रदर्शन, जोखिम, निवेश रणनीति और अपने वित्तीय लक्ष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। एनपीएस एक लंबी अवधि का निवेश विकल्प है, इसलिए समय-समय पर फंड के प्रदर्शन की समीक्षा करना भी जरूरी होता है।
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फंड मैनेजर चुनने का विकल्प
एनपीएस में वर्तमान समय में कई पेंशन फंड मैनेजर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें एसबीआई पेंशन फंड, यूटीआई रिटायरमेंट सॉल्यूशंस, एलआईसी पेंशन फंड, एचडीएफसी पेंशन मैनेजमेंट, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पेंशन फंड, कोटक महिंद्रा पेंशन फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ पेंशन मैनेजमेंट, मैक्स लाइफ पेंशन फंड और टाटा पेंशन मैनेजमेंट जैसी कंपनियां शामिल हैं। निवेशक अपने खाते में उपलब्ध विकल्पों के अनुसार इनमें से किसी फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी समय-समय पर विभिन्न पेंशन फंड मैनेजरों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े जारी करती है। निवेशक एनपीएस में निवेश करने या फंड मैनेजर बदलने से पहले इन आंकड़ों की भी जानकारी ले सकते हैं और इसके बाद अपना फंड मैनेजर तय कर सकते हैं।