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क्या MBS को परमाणु बम की जरूरत है?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए असैन्य परमाणु समझौते का मकसद स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देना और परमाणु प्रसार को रोकना है। हालांकि, कई विश्लेषकों को डर है कि इससे मध्य पूर्व का रणनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। इस फैसले के कारण क्षेत्र में परमाणु हथियारों की एक नई प्रतिस्पर्धा शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि यह समझौता पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक स्तर पर गंभीर बहस का विषय बना हुआ है।

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