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'वेज बिरयानी नहीं, वेज पुलाव', उत्तराखंड में यह कैसा अभियान चला रहे संत?

हरिद्वार में वेज बिरयानी नाम को लेकर साधु-संतों ने बड़ा विरोध शुरू कर दिया है। संतों का कहना है कि दुकानों पर बिरयानी की जगह वेज पुलाव लिखा जाए, जिसके बाद पूरे शहर में बहस छिड़ गई है।

Haridwar saints

साधु संत विरोध प्रदर्शन, Photo Credit: Social Media

उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में खाने के एक नाम को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। शहर में 'वेज बिरयानी' नाम का इस्तेमाल करने पर साधु-संतों ने बहुत गुस्सा जताया है। इस पूरे मामले की मुख्य बात यह है कि अखंड परशुराम अखाड़े के साधु-संतों की टोली शहर की दुकानों और ठेलों पर जा रही है और वहां से 'वेज बिरयानी' के बोर्ड हटवा रही है। संतों का कहना है कि हरिद्वार एक पवित्र जगह है और यहां बिरयानी शब्द का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। इसलिए सभी दुकानदारों को 'वेज बिरयानी' की जगह 'वेज पुलाव' नाम लिखना होगा।

 

अखंड परशुराम अखाड़े के साधु-संतों ने हरिद्वार के अलग-अलग बाजारों में जाकर एक बड़ा अभियान चलाया। संतों की टोलियां उन सभी दुकानों, होटलों और रेहड़ी-ठेलों पर गईं जहां 'वेज बिरयानी' के बोर्ड या बैनर लगे थे। संतों ने इन बोर्डों को देखकर नाराजगी जताई और कई जगहों पर 'वेज बिरयानी' लिखे हुए बोर्ड पर 'वेज पुलाव' के स्टिकर चिपका दिए। इसके साथ ही उन्होंने दुकानदारों से हाथ जोड़कर कहा कि वे हरिद्वार की पवित्रता का सम्मान करें।

 

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संतों की एकजुटता

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई मुख्य रूप से अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक कर रहे थे। उनके साथ स्वामी कार्तिक गिरी महाराज और कथा वाचक पंडित पवन कृष्ण आचार्य जैसे संत भी इस काम में शामिल हुए। इन सभी संतों ने मिलकर बाजारों का दौरा किया और दुकानदारों से आमने-सामने बात की। अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने साफ किया कि वे किसी का धंधा या रोजगार बंद नहीं कराना चाहते। उन्होंने दुकानदारों को प्यार से समझाया कि यह कोशिश सिर्फ हरिद्वार की मर्यादा और नियमों को बनाए रखने के लिए है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार पूरी दुनिया में एक पवित्र शहर के रूप में जाना जाता है इसलिए यहां की परंपराओं को बचाना दुकानदारों की भी जिम्मेदारी है।

त्योहारों से पहले बड़ा कदम

पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि स्थानीय लोगों और यहां आने वाले यात्रियों से काफी समय से इस बारे में शिकायतें मिल रही थीं। आने वाले समय में हरिद्वार में सावन का महीना और कुंभ मेला जैसे बड़े आयोजन होने वाले हैं जहां करोड़ों लोग आते हैं। हरिद्वार गंगा जी का पवित्र किनारा है, इसलिए यहां 'वेज बिरयानी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बिल्कुल सही नहीं है।

 

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स्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने चेतावनी दी है कि शहर में जहां भी 'वेज बिरयानी' लिखा दिखेगा संतों का यह विरोध वहां जारी रहेगा। अच्छी बात यह रही कि कई दुकानदारों ने संतों की बात मान ली और तुरंत अपने बोर्ड बदलने के लिए तैयार हो गए। इसके साथ ही संतों ने पुलिस और नगर निगम से मांग की है कि वे 'वेज बिरयानी' का बोर्ड लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और पूरे हरिद्वार में सिर्फ 'वेज पुलाव' नाम का इस्तेमाल करवाएं।


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