आज के डिजिटल युग में जहां हर चीज इंटरनेट पर मौजूद है, अध्यात्म को समझने का तरीका भी बदल गया है। इस समय रासेश्वरी देवी जी एक ऐसे ब्रिज का काम कर रही है जो पुरानी परंपराओं को मानने वाले बुजुर्गों और तर्क खोजने वाले युवाओं, दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं। वह लोगों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देती बल्कि यह भी समझाने का प्रयास करती है कि भक्ति योग के जरिए एक आम इंसान अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में संतुलन कैसे बना सकता है।
दरअसल रासेश्वरी देवी भक्ति योग की विरासत से ताल्लुक रकती है। उनका मानना है कि अध्यात्म कोई तुरंत मिलने वाली चीज नहीं है। इससे अलग यह खुद को बेहतर बनाने के लिए एक निरंतर प्रक्रिया है।
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कौन हैं रासेश्वरी देवी?
रासेश्वरी देवी जी की आध्यात्मिक यात्रा बहुत कम उम्र में शुरू हो गई थी। उन्हें अपने गुरु, स्वामी श्री कृपालु जी महाराज का मार्गदर्शन मिला, जिन्हें उनके अनुयायी इस युग के जगद्गुरु मानते हैं। इसके अलावा, उन्हें अपने पिता से भी गहरा संस्कार मिला, जो शास्त्रों के प्रकांड विद्वान थे।
इन्हीं की देखरेख में उन्होंने उपनिषदों और श्रीकृष्ण भक्ति की बारीकियों को समझा और आज वह उसी ज्ञान को बहुत सरल शब्दों में दुनिया के सामने रख रही हैं।
क्यों खास है उनका तरीका?
रासेश्वरी देवी जी की सबसे बड़ी खूबी उनका व्यवहारिक होना है। वे केवल कठिन मंत्रों की बात नहीं करतीं बल्कि युवाओं की सबसे बड़ी समस्या इमोशनल मैनेजमेंट पर खुल कर बात करती है। वह युवाओं को यह समझाने का प्रयास करती है कि भावनाओं को कैसे काबू में रखें और कठिन समय में सही फैसले कैसे लें।
वह चरित्र निर्माण के संबंध मे खासकर बच्चों के लिए 'बाल संस्कार शिविर' और युवाओं के लिए 'युवा उत्थान शिविर' जैसे प्रोग्राम चलाती हैं। उनकी इन्हीं कोशिशों के लिए उन्हें युवा मामले मंत्रालय और ग्लोबल पीस अवार्ड जैसे बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
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पुराना ज्ञान, नया अंदाज
अक्सर लोग उनकी तुलना श्री श्री रवि शंकर जैसे आधुनिक गुरुओं से करते हैं क्योंकि दोनों ही सेवा और ध्यान पर जोर देते हैं। हालांकि, रासेश्वरी देवी जी की जड़ें पूरी तरह से भक्ति योग और उपनिषदों में टिकी हैं। वे आज की समस्याओं को पुराने उदाहरणों से हल करना सिखाती हैं।
सोशल मीडिया और लाइव-स्ट्रीमिंग के जरिए उन्होंने अध्यात्म को घर-घर पहुंचा दिया है। युवाओं का मानना है कि दुनिया में जहां लोग दिखावे के पीछे भाग रहे हैं, राशेश्वरी देवी जी की सादगी और उनकी बातें उनके लिए प्रेरणा का काम करती है।