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रुचि तिवारी vs लेफ्ट: सोशल मीडिया पर क्यों मचा है इतना हल्ला?

रुचि तिवारी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, यूट्यूब पर लाखों में दर्शक हैं। वह खुद को पत्रकार मानती हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एक गाइडलाइन पर प्रदर्शन के दौरान वह अचानक से चर्चा में आ गईं।

Ruchi Tiwari

रुचि तिवारी। यूट्यूबर। Photo Credit: Social Media

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के समर्थन में 13 फरवरी को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) का एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था। रुचि तिवारी इस प्रदर्शन की कवरेज के लिए डीयू कैंपस में पहुंची थीं। रुचि खुद को फ्रीलांस जर्नलिस्ट और यूट्यूबर बताती हैं। कवरेज के दौरान ही, प्रदर्शनकारियों में कुछ छात्रों ने कथित तौर पर रुचि तिवारी के साथ मारपीट की। इस झड़प के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। 14 फरवरी को रुचि तिवारी की तहरीर पर पुलिस ने एक शिकायत दर्ज की। कुछ दिनों की शांति के बाद अब एक बार फिर से रुचि तिवारी चर्चा में आ गईं हैं। वजह उनका एक इंटरव्यू है।

13 फरवरी को हुई इस घटना के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। एक तबके ने रुचि तिवारी का साथ दिया, दूसरे तबके ने उनकी डिग्रियों को लेकर सवाल उठाए। बात पत्रकारों तक पहुंची तो एक पत्रकार ने रुचि तिवारी से बात की। उसने बताया कि आपकी पत्रकारिता पर सवाल उठ रहे हैं। जवाब में रुचि तिवारी ने कहा कि उन्होंने डिग्री ली है, कोर्स किया है, इंटर्नशिप की है। पत्रकार पूछता है कि यह कोर्स कितने दिनों का है, रुचि जवाब में कहती हैं इतना याद नहीं रहता है।

 

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क्या लिख रहे हैं लोग?

रुचि तिवारी, अपने इस इस इंटरव्यू के लिए ट्रोल हो रही हैं। लोग उनकी पत्रकारिता की डिग्री पर सवाल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन्हें अपनी डिग्री या पत्रकारिता के कोर्स के बारे में पता नहीं है, यह आरक्षण पर कैसे ज्ञान देती हैं, लोगों से भिड़ती हैं। लोगों का कहना है कि इन्हें अपनी पढ़ाई याद नहीं है, यह समाज के बारे में क्या बताएंगी। कुछ लोग उन्हें अनपढ़ और जाहिल तक बता दे रहे हैं। 

रुचि तिवारी का जवाब क्या है?

आपको डिग्री चाहिए, मैं डिग्री भी दिखा दू्ंगी, लेकिन आप मुझ पर सवाल उठा रहे हो, क्या आप अपनी डिग्री दिखाना चाहोगे।

रुचि तिवारी vs लेफ्ट कैसे हुआ?

रुचि तिवारी, यूजीसी प्रोटेस्ट की कवरेज के लिए नॉर्थ कैंपस के आर्ट्स फैकल्टी के पास हो रहे प्रदर्शन में पहुंची थीं। उनका आरोप है कि लेफ्ट के छात्रों ने पहले उनकी जाति पूछी फिर उनसे मारपीट की। 13 फरवरी को दिल्ली के मौरिस नगर थाने में रुचि तिवारी ने तहरीर दी थी। रुचि तिवारी की शिकायत पर FIR दर्ज हो चुकी है। पुलिस CCTV और वीडियो के आधार पर केस की पड़ताल कर रही है। रुचि तिवारी का कहना है कि लेफ्ट विंग के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। अंजली शर्मा ने उनके साथ मारपीट की, गला दबाया। उनका कहना है कि भीड़ ने पहले उनका नाम और जाति पूछी और ब्राह्मण पहचान होने की वजह से उनके साथ हाथापाई की, उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश की और उन्हें बलात्कार की धमकियां भी दीं। रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें बैड टच किया गया है, उन्हें न्यूड करके परेड कराने की धमकी दी गई है। 

रुचि तिवारी, यूट्यूबर:-
वीडियो हर जगह है, लोग खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि किसने किसे उकसाया। मैं एक जर्नलिस्ट हूं जो प्रोटेस्ट कवर करने वहां गई थी। मीडिया वालों में से एक ने मेरा ध्यान खींचने के लिए मेरा नाम लिया। मैं उनके पास गई, फिर उन्होंने मेरा पूरा नाम और जाति पूछी। पूरी भीड़ मेरी तरफ आई और मुझ पर हमला कर दिया। यह वीडियो में साफ दिख रहा है। करीब 500 लोगों ने मुझ पर हमला किया। उनके पास बस झूठी बातें और झूठे आरोप हैं। मेरे आस-पास की लड़कियों ने मेरे कान में रेप की धमकी दी क्योंकि मैं ब्राह्मण हूँ। आज तू चल, तेरा नंगा परेड निकलेगा। मेरे आस-पास के आदमी कह रहे थे कि वे मुझे सबक सिखाएंगे। लड़कियों ने मेरे हाथ और गर्दन पकड़ रखे थे। यह हत्या की कोशिश है। मैं बेहोश हो गई थी, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया।

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रुचि तिवारी का पक्ष क्या है?

रुचि तिवारी के मुताबिक मामूली झड़प नहीं, 'जाति आधारित हिंसा' थी। रुचि तिवारी और उनके समर्थक कह रहे हैं कि उन्हें सवर्ण पहचान की वजह से वाम दलों के छात्र संगठनों ने मारा। वाम दलों का कहना है कि यह झूठी साजिश है, बदनाम किया जा रहा है। रुचि तिवारी ने लोगों ने आपत्तिजनक सवाल किए,जिसके बाद विवाद बढ़ा। उन्होंने और उनके समर्थकों ने पहले मारपीट शुरू की, अंजलि को उठाकर पटक दिया, उनके कपड़े तितर-बितर कर दिए गए, अब उन्हें लोग रेप की धमकियां दे रहे हैं। रुचि तिवारी ने जाति सूचक सवाल पूछकर मामले को और भड़का दिया। 

रुचि तिवारी:-
एक लड़का दूसरों को मुझे ले जाने का इशारा कर रहा था। क्या वे मुझे किडनैप करना चाहते थे? मेरे कपड़े फाड़े जा रहे थे। मुझे गलत तरीके से छुआ जा रहा था। वे गुंडे थे, वे स्टूडेंट नहीं हो सकते। मेरी जाति की वजह से मुझ पर हमला हुआ। किसी ने मेरा साथ नहीं दिया, सिर्फ कुछ लॉ फैकल्टी ने इंसानियत दिखाई। मैं उनकी मदद से और कुछ महिला पुलिसवालों की मदद से बाहर आई। FIR दर्ज हो गई है, मुझे कानून पर भरोसा है। मॉब लिंचिंग हो रही थी, मैं किसी तरह बच निकली, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।


वायरल वीडियो मामले में क्या हुआ है?

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं। वीडियो में रुचि तिवारी भीड़ में घिरी हैं, उनके साथ धक्का-मुक्की हो रही है। वह लोगों से उलझ रही हैं। एक वीडियो में वह हाथापाई करते दिखी हैं, एक जगह वह भी जमीन पर नजर आईं हैं। इन अलग-अलग वायरल वीडियो को पुलिस वेरिफाई कर रही है। दिल्ली पुलिस ने इस केस में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस-FIR दर्ज की है। केस की पड़ताल जारी है।  रुचि तिवारी की शिकायत पर भी मारपीट, छेड़छाड़ जैसे मामलों में जांच चल रही है, AISA और लेफ्ट मोर्चे से भी ऐसे ही आरोप लगाए गए हैं। रुचि पर जातिवादी गाली देने के आरोप लगे हैं। 

प्रसेनजीत कुमार, नेशनल जनरल सेक्रेटरी, AISA:-
स्टूडेंट्स UGC के सपोर्ट में इकट्ठा हुए थे। यह एक शांतिपूर्ण कार्यक्रम था। एक यूट्यूबर ने एक दूसरे यूट्यूबर को धक्का दिया जो बहुजन कम्युनिटी से है। हमारे प्रोग्राम में खलल डालने की कोशिश की। उन्होंने हमारे लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। हमने उन्हें सिर्फ किनारे करने की कोशिश की। कोई लड़ाई या मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई है। जानबूझकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। 

एक नजर, UGC प्रोटेस्ट पर

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर अभी रोक लगी है। ये नियम जैसे ही सामने आए, सवर्ण संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इन नियमों को UGC (प्रमोशन  ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट) रेग्युलेशन 2026 के नाम से जारी किया गया था। 13 जनवरी को यह जानकारी सार्वजनिक हुई, 15 जनवरी से इसे लागू कर दिया गया। जाति आधारित भेदभाव को रोकने के मकसद से इसे लाया गया था। पहले SC/ST उत्पीड़न के मामले में इस तरह की कवायद होती थी, इसके तहत शिकायतों के निवारण के लिए एक कंप्लायंस कमेटी और कड़े प्रावधान लाए गए थे। सामान्य वर्ग के छात्रों ने इसे अपने खिलाफ विश्वासघात बताया। हंगामा बढ़ने पर 29 जनवरी 2026 को इन नियमों रोक लगा दी। 

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इतना हो हल्ला कैसे मच गया?

अंजलि शर्मा, सदस्य, AISA:-
मैंने उनके साथ बदसलूकी की है, यह बात सरासर झूठ है। वीडियो साक्ष्य है कि वह मेरा मुंह पकड़कर मुझे धक्का देती हैं, मुझे जमीन पर पटक देती हैं, यह जरूर पता है कि इस महिला का इतिहास बहुजन विरोधी रहा है। वह भीम आर्मी के प्रदर्शन में भी गईं थीं, उन्होंने पूछा था कि अगर 5 हजार साल से आपको पानी नहीं मिला तो आप जिंदा कैसे हो। अब मिल गया। वंचितों और दलितों के साथ जातिवादी बात करती हैं।

 

 


रुचि तिवारी, दक्षिणपंथी  और उनके समर्थकों का कहना है कि उनके साथ बदसलूकी हुई है। यह जातिवादी हमला है। लोग ब्राह्मणों के खिलाफ हिंसा को उकसा रहे हैं। सोशल मीडिया पर 'जस्टिस फॉर रुचि तिवारी' ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर रुचि तिवारी के खिलाफ लोग लिख रहे हैं। हिंसा के आरोप उन पर ही लगे हैं। आरोप है कि रुचि ने पहले दलित, आंबेडकरवादी और लेफ्ट के छात्रों को जाति सूचक शब्द कहे, उन्होंने पूछा 'कितने साल से पानी नहीं मिला', मजाक उड़ाया, महिला स्टूडेंट को खींचकर थप्पड़ मारा, बाल नोचे। 

सार्थक शर्मा, दिल्ली स्टेट सेक्रेटरी, ABVP:-
मीडिया पर हमला, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेफ्ट-विंग पॉलिटिक्स का इतिहास हिंसा को बढ़ावा देने से जुड़ा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने ऐसी सोच को पूरी तरह से नकार दिया है। अपनी घटती अहमियत से निराश होकर, ये ग्रुप मीडिया की नजर में बने रहने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी करने की कायरतापूर्ण हरकत उनके असली चरित्र को दिखाती है। 

विवादित रहीं हैं रुचि तिवारी 

रुचि तिवारी पर पहले ही एंटी बहुजन राजनीति के आरोप लगते हैं। 11 जनवरी को दिल्ली के जंतरमंतर पर चंद्रशेखर आजाद की रैली में भी ऐसे ही उन्होंने लोगों से सवाल किया था कि '5000 साल से पानी नहीं मिला तो जिंदा कैसे हो।' एक पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने उसे धमकी दी, मारपीट की। लेफ्ट के लोग उन्हें 'प्रोपेगेंडा यूट्यूबर' बुला रहे हैं। रुचि तिवारी अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही हैं, खुद के उत्पीड़न की बात कर रहीं हैं। लोग उन पर विक्टिम कार्ड खेलने के आरोप भी लगा रहे हैं। 


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