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श्रीधर वेम्बू को देना होगा 15 हजार करोड़ का बॉन्ड, तलाक केस में कोर्ट का आदेश

जोहो के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू अपने तलाक केस के कारण चर्चा में है। कैलिफोर्निया की एक कोर्ट ने उन्हें तलाक के मामले में 1.7 अरब डॉलर यानी करीब 14 हजार करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है।

Sridhar Vembu

श्रीधर वेम्बू, Photo Credit: @svembu

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भारत की जानी-मानी सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के को-फाउंडर श्रीधर वेम्बू इन दिनों अपनी निजी जिंदगी के कारण चर्चा में हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया के एक कोर्ट ने उन्हें तलाक के मामले में 1.7 अरब डॉलर यानी करीब 14 हजार करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैलिफोर्निया की कोर्ट ने याचिका के बाद प्रॉपर्टी ट्रांसफर और वैवाहिक संपत्ति के बंटवारे पर पड़ने वाले संभावित असर के कारण यह कदम उठाया है। तलाक के लिए हजारों करोड़ का बॉन्ड जमा करवाने के कोर्ट के आदेश की चर्चा अब पूरी दुनिया में है। 

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीधर वेम्बू और प्रमिला श्रीनिवासन की शादी करीब तीन दशक पहले हुई थी। दोनों अमेरिकी के कैलिफोर्निया में रहते थे और उन दोनों का एक बेटा भी है। 2019 के अंत में श्रीधर भारत लौट आए और तमिलनाडु के एक गांव में बस गए। इसके बाद 2021 में उन्होंने कोर्ट में तलाक की अर्जी डाली। तलाक पर दोनों पक्षों की सहमति है लेकिन संपत्ति के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच विवाद है। इस केस की सबसे अहम चीज यह है कि तीन दशकों की शादी में दोनों ने जो कमाई की उसका बंटवारा कैसे होगा। 

 

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पत्नी ने लगाए आरोप

प्रमिला ने नवंबर 2024 में कोर्ट में शिकायत की कि श्रीधर उनकी जानकारी के बिना जोहो की अमेरिकी यूनिट की संपत्तियों को री-स्ट्रक्चर कर रहे हैं। इसमें जोहो यूएस का बिजनेस एक नई कंपनी में शिफ्ट करने का प्लान था, जो श्रीधर के एक पुराने साथी टोनी थॉमस के कंट्रोल में जाती। कोर्ट कोर्ट का मानना है कि तलाक का केस शुरू होने के बाद ऐसी संपत्ति का ट्रांसफर करना नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि अगर संपत्ति चली गई तो प्रमिला का हिस्सा उन्हें देना मुश्किल हो जाएगा। 

कोर्ट ने दिया आदेश

प्रमिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कैलिफोर्निया की हाई कोर्ट ने जोहो संस्थाओं की निगरानी के लिए एक रिसीवर नियुक्त किया और कॉर्पोरेट रिस्ट्रक्चर करने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता ने कॉमन संपत्तियों में अपनी पत्नी के हितों की अनदेखी की है और कानून का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि जोहो कोर्पोरेशन, टी एंड वी होल्डिंग्स, इंक, टोनी थॉमस, जेडसीपीएल और संबंधित संस्थाएं याचिकाकर्ता के निर्देशों पर काम कर रही हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह संस्थाएं श्रीधर के हितों को बढ़ाने के लिए प्रमिला के हितों को नुकसान पहुंचाने का काम करेंगी। 

'बिजनेस शुरू करने में की थी मदद'

प्रमिला और श्रीधर की शादी करीब तीन दशक पहले हुई थी। प्रमिला का आरोप है कि उन्होंने अपनी इनकम से श्रीधर का साथ दिया था ताकि वह अपनी नौकरी छोड़ सकें और बिजनेस पर फोकस कर सके। प्रमिला ने कहा कि मुझे यह जानकर गहरा सदमा लगा कि तलाक के लिए अर्जी देने के बाद ही मुझे पता चला कि उन्होंने दावा किया है कि जिस कंपनी को उन्होंने हमारी शादी के दौरान बनाया था, उसमें उनकी हिस्सेदारी केवल 5 फीसदी है। इस कंपनी में उनके भाई-बहनों के पास कंपनी ही बहुमत हिस्सेदारी है। 

 

हालांकि, श्रीधर वेम्बू ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि जोहो के को-फाउंडर और लंबे समय तक सीईओ रहने के बावजूद कंपनी में उनकी हिस्सेदारी हमेशा से केवल 5 प्रतिशत ही रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जोहो के अधिकांश शेयर उनके भाई-बहनों के पास हैं। 

 

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कितनी है श्रीधर की संपत्ति?

श्रीधर वेम्बू जोहो के को-फाउंडर और सीईओ रहे। लगभग तीन दशक तक वैवाहिक जीवन बिताने और अमेरिका में अपने बेटे की परवरिश करने के बाद वेम्बू 2019 के अंत में भारत लौट आए थे। फोर्ब्स की 2025 की सूची के अनुसार, श्रीधर वेम्बू और उनके भाई-बहनों की संयुक्त नेटवर्थ करीब 6 अरब डॉलर आंकी गई है। कंपनी में ज्यादातर शेयर उनके भाई-बहनों के पास हैं। उनके भाई-बहन कंपनी के 80 प्रतिशत से ज्यादा शेयर कंट्रोल करते हैं। तलाक पर अभी अंतिम फैसला नहीं आया है लेकिन  अगर यह तलाक होता है और कोर्ट ऑर्डर फॉलो होते हैं तो यह भारत के सबसे महंगे तलाकों में से एक हो सकता है।

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