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बस्ती में बनी पानी की टंकी भरते ही फटी गई, जल जीवन मिशन के निर्माण पर उठे सवाल

बस्ती में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी पहली बार भरते ही फट गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है।

Basti Water Tank Burst

बस्ती पानी टंकी, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कुदरहा ब्लॉक के राजपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की नई टंकी पहली बार पानी भरते ही बुरी तरह फट गई। लाखों रुपये की सरकारी लागत से बनी यह टंकी पानी का थोड़ा सा दबाव भी नहीं झेल सकी और अचानक बीच से फट गई। इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में सरकारी निर्माण कार्यों की क्वालिटी और उसमें हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पानी का तेज फव्वारा निकलते हुए इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं।

 

गांव वालों ने बताया कि जब यह टंकी बन रही थी, तभी उन्होंने इसकी शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि इसमें घटिया सामान लगाया जा रहा है और टंकी मजबूत नहीं बन रही है। गांव के लोगों ने अफसरों से काम को सही से करने के लिए कहा था लेकिन गांव के प्रधान और सरकारी अधिकारियों ने किसी की एक नहीं सुनी। उन्होंने इन शिकायतों को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया। किस्मत अच्छी थी कि जिस समय टंकी फटी, वहां कोई नहीं था। अगर उस वक्त वहां कोई बच्चा या गांव वाला होता, तो बहुत बुरा हादसा हो सकता था।

 

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अखिलेश यादव का तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इस घटना पर सरकार पर कड़ा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है और सरकार की बनाई टंकियां अब उसका बोझ नहीं झेल पा रही हैं, इसीलिए वे जगह-जगह गिर रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता पानी के लिए परेशान है और विकास के सारे दावे झूठे साबित हो रहे हैं। सपा नेता ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर सरकारी पैसों की लूट मची है और कमीशन के लालच में इतने कमजोर निर्माण किए जा रहे हैं जो लोगों के लिए जान का खतरा बन गए हैं।

ऑपरेटर पर गिरी गाज

घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने मामले को शांत करने के लिए ऑपरेटर प्रमोद शुक्ला को सस्पेंड कर दिया है। ऑपरेटर ने अपनी सफाई में बताया है कि वह पिछले काफी समय से विभाग को टंकी में आ रही दरारों और उसकी खराब स्थिति के बारे में लगातार जानकारी दे रहा था। ऑपरेटर का कहना है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उस पर ध्यान नहीं दिया और न ही टंकी को ठीक करने की कोशिश की। अब गांव वाले यह सवाल उठा रहे हैं कि ऑपरेटर को बलि का बकरा बनाकर असल ठेकेदारों और अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा है जबकि गलती तो उन लोगों की है जिन्होंने निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल की है।

 

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अधिकारियों की सफाई

इस मामले पर जल निगम के अधिशाषी अभियंता एस. रहमान का कहना है कि यह ऑपरेटर की लापरवाही का मामला है और इसीलिए उस पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि टंकी पूरी तरह से नहीं फटी है, बल्कि सिर्फ अंदर का लाइनर टूटा है जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। हालांकि प्रशासन ने इस मामले में जांच का आश्वासन तो दिया है लेकिन गांव के लोग इस सफाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों की साफ मांग है कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए जांच नहीं होनी चाहिए बल्कि इस पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच की जानी चाहिए ताकि निर्माण में हुए भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट का असली सच सबके सामने आ सके।

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