उत्तराखंड में निहंग सिख चर्चा के केंद्र बन गए हैं, जहां रुद्रप्रयाग जिले के नागरसू गुरुद्वारे में निहंग सिखों और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। इस विवाद के पीछे निहंग सिखों की मांग थी कि उनके चार साथियों को जेल से रिहा किया जाए। अपनी मांग को पूरा कराने के लिए 8 निहंग सिखों ने नागरसू गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया, जहां उन्हें हटाने के लिए पुलिस और सेना की एक टीम जुटी हुई है।
निहंग सिखों के 8 लोग शनिवार की शाम को नागरसू गुरुद्वारे पर कब्जा जमा लिए थे। पुलिस के मुताबिक, 8 निहंग सिखों के पास तलवार, भाला और कुल्हाड़ी भी है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ तौर पर नजर आया कि निहंग गुरुद्वारे की छत पर बैठे थे। इस घटना की वजह से पूरे निहंग सिख समुदाय पर सवाल उठ रहे हैं। कई लोग जानना चाह रहे हैं कि निहंग सिख कौन हैं, साथ ही कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि निहंग सिखों का इतिहास क्या है।
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पुलिस ने निहंग सिखों को क्यों किया गिरफ्तार?
16 जून को उत्तराखंड के कर्णप्रयाग बाजार में पार्किंग को लेकर निहंग सिखों का विवाद हुआ था। आरोप है कि कुछ निहंग सिखों ने स्थानीय लोगों पर तलवार से हमला कर दिया था। इसी आरोप में पुलिस ने 4 निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बाकी निहंग सिखों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया।
क्या है निहंग सिखों का इतिहास?
निहंग सिखों को अकाली निहंग के नाम से भी जाना जाता है। निहंग सिखों को एक योद्धा संप्रदाय माना जाता है। निहंग सिखों का इतिहास खालसा पंथ से जुड़ा हुआ है। जब 1699 में सिख धर्म के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, तब निहंग सिखों को गुरु की प्रिय फौज माना जाता था। यानी कुल मिलाकर निहंग सिख धर्म के योद्धा माने जाते हैं।
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सिख धर्म के मुताबिक, निहंग सिख व्यक्ति निडर, निर्भीक और योद्धा होता है, जो अपने धर्म की रक्षा के लिए हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहता है। निहंग सिखों की यह भी खासियत है कि वे अन्य सिखों के मुकाबले अलग प्रकार की पगड़ी पहनते हैं। निहंग सिख हमेशा गोल आकार की पगड़ी पहनते हैं और पगड़ी में स्टील का चक्र लगाते हैं। साथ ही ये लोग नीले रंग का चोला पहनते हैं। इसके अलावा वे हमेशा अपने साथ भाला, तलवार जैसे पारंपरिक हथियार रखते हैं।