एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के अगले पांच साल तक चेयरमैन रहेंगे। गुरुवार को मुंबई में आयोजित टाटा संस की बोर्ड मोटिंग में उनके तीसरे कार्यकाल को मंजूरी मिली। हालांकि कुछ दिन पहले चंद्रशेखरन ने कहा था कि वह अपने पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। 3 सितंबर को बोर्ड की नामांकन पारिश्रमिक समिति ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था। 17 सितंबर को बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।
उधर, टाटा संस में 66 फीसद हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने एक बयान में उनकी नियुक्ति को अवैध बताया। ट्रंस्ट के अध्यक्ष ने बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट किया था। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल अगले साल 20 फरवरी को समाप्त होगा। इसके बाद उनका तीसरा कार्यकाल आरंभ होगा। वे अगले पांच साल तक पद पर बने रहेंगे।
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बहुमत से फैसला लिया गया: टाटा संस
अपने बयान में टाटा संस ने कहा, 'निदेशक मंडल की 17 सितंबर 2026 को हुई बैठक में चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई। इसके बाद बोर्ड ने मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए उन्हें कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर पुनर्नियुक्त करने का बहुमत से निर्णय लिया।'
नोएल टाटा ने किया विरोध
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन की नियुक्ति का विरोध किया। उनके खिलाफ मतदान भी किया। मगर प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। एक बयान में टाटा ट्रस्ट ने एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में नियुक्त करने के फैसले को 'अवैध' बताया। कहा कि चयन समिति को कंपनी के अंतर्नियमों के तहत अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए। माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट बोर्ड के फैसले को आगे चुनौती दे सकता है
2017 से जिम्मेदारी संभाल रहे चंद्रशेखरन
एन चंद्रशेखरन को साल 2017 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। उन्होंने अंतरिम चेयरमैन रतन टाटा की जगह ली थी। पांच साल बाद 2022 में उन्हें पहला कार्यकाल विस्तार मिला। पिछले साल चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का प्रस्ताव आया। मगर फरवरी 2026 में टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा की आपत्ति से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
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शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया होगी शुरू
बोर्ड बैठक में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया गया। शेयर मार्केट में टाटा संस की लिस्टिंग देश के सबसे बड़े आईपीओ में एक बन सकती है, क्योंकि टाटा संस की इस्पात, वाहन, सॉफ्टवेयर सेवाओं, आतिथ्य और विमानन क्षेत्रों की एक दर्जन से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में नियंत्रक हिस्सेदारी है। आईपीओ में एक फीसद हिस्सेदारी की बिक्री पर अनुमानित 15,000-20,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इससे टाटा समूह का मूल्यांकन करीब 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उधर, चंद्रशेखरन की नियुक्ति के बाद टाटा समूह की कंपनियों के शेयर में गुरुवार को तेजी देखने को मिली।
