आज के दौर में हिन्दी सिनेमा में ज्यादा खून-खराबा, तोड़-फोड़ और परिवार के साथ न देखने वाली फिल्में बनती हैं। उसी बीच पिछले हफ्ते एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जिसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है। इस फिल्म का नाम ओह माय डॉग है, जिसमें इंसान और जानवरों के बीच गहरी दोस्ती को दिखाया गया है। इंसानों और जानवरों की मासूम कहानी वाली फिल्में आज के दौर में बेहद कम मात्रा में रिलीज होती हैं। जबकि आज कई दर्शक ऐसे हैं, जिन्हें बेजुबान जानवरों से जुड़ी फिल्म देखना पसंद है। इसी वजह से कई लोगों को ओह माय डॉग फिल्म पसंद आई थी। अगर आपको भी ओह माय डॉग फिल्म पसंद आई तो आपको 41 साल पुरानी तेरी मेहरबानियां फिल्म जरूर देखना चाहिए।

 

ओह माय डॉग फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के निर्देशक अमित राय हैं, जिन्होंने ओह माय डॉग फिल्म बनाई थी। वहीं बात करें इस फिल्म की कहानी की तो खून-खराबे वाली कहानियों से बेहद अलग और रोचक है। इस फिल्म में सामाजिक समस्या को दिखाया गया है। इसके बजाय तेरी मेहरबानियां फिल्म में डॉग को नायक की तरह दिखाया, जो हत्या के आरोपियों से बदला लेता है।

 

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क्यों देखें तेरी मेहरबानियां फिल्म?

तेरी मेहरबानियां फिल्म में इंसानों और कुत्ते की बेहद भावुक कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म में मोती नाम के डॉग को मुख्य किरदार के रूप में दिखाया गया। जो अपने मालिक के हत्यारों का बदला लेता है। अब एक डॉग हत्यारों को किस तरह मौत के घाट उतारता है, यह बात आपको फिल्म देखने के बाद समझ आएगी। इसके साथ ही जब मोती के मालिक की हत्या हो जाती है, तो उस सीन को देखने के बाद लाखों दर्शकों की आंखें नम हो गई थीं।

 

यह फिल्म आज से लगभग 41 साल पहले 18 अक्टूबर 1985 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म को उस दौर में भी बेहद पसंद किया गया था। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ और पूनम ढिल्लों ने अहम किरदार निभाया है। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद न सिर्फ जैकी श्रॉफ और पूनम ढिल्लों की लोकप्रियता बढ़ी थी, बल्कि डॉग को भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता मिली थी। जानकारी के लिए बता दें, मोती डॉग का असली नाम ब्राउनी था।

 

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ओह माय डॉग फिल्म क्यों है खास?

इस फिल्म में दो कहानियां दिखाई गई हैं, जिसे देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गई थीं। जहां एक तरफ असम के अप्पू और उनके प्यारे डॉग मोमो की कहानी को दिखाया गया है। एक दिन अप्पू अपने डॉग को खिलाता है। उसी दौरान मोमो लापता हो जाता है, तो अप्पू उसे खोजने में जुट जाता है। इसमें कुत्तों की ट्रैफिकिंग की समस्या उजागर की गई है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में एक मजदूर गायब हो जाता है। मजदूर को ऑस्कर नाम का डॉग ढूंढ लेता है। इस फिल्म में एक तरफ बच्चा कुत्ते को खोजता है, तो वहीं दूसरी तरफ डॉग अपने मालिक को ढूंढता है।

 

इस फिल्म की अनोखी कहानी न सिर्फ लोगों को पसंद आएगी, बल्कि इंसान और बेजुबान जानवर की दोस्ती ने लोगों की आंखें नम कर दीं। इस फिल्म को देखने के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पॉजिटिव कमेंट किया था।