देश में कैंसर की बिमारी तेजी से फैल रही है, जो लोगों के साथ में सरकार और डॉक्टरों के लिए भी चिंता का विषय है। डॉक्टर नई-नई रिसर्च से लगातार कैंसर की बिमारी से लोगों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में कैंसर के जटिल ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान बचाने के साथ में महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखना भी डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती होती है।
इसी चुनौती को कम करने की दिशा में एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों ने एक रिसर्च में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है, जहां सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। शरीर के अंदर के क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान से ब्लिडिंग और महत्वपूर्ण अंगों को चोट लगने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
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रिसर्च में सामने आया रेड जोन क्षेत्र
एम्स के डॉ. बीआरए इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल (IRCH) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर एमडी रे और उनकी टीम ने इन क्षेत्रों के बारे में बताया है। पहले क्षेत्र को 'रेड अलर्ट जोन' या 'रे जोन' नाम दिया गया है। यह महिलाओं के गर्भाशय के आसपास में मौजूद अति संवेदनशील हिस्सा है, जहां महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं, मूत्रवाहिनी और अन्य संरचनाएं एक दूसरे के करीब होती हैं।
गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय के कैंसर की सर्जरी में यहां थोड़ी सी भी चूक मरीज में ब्लिडिंग या अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने 255 जटिल कैंसर सर्जरी के अध्ययन के आधार पर इस क्षेत्र की पहचान की है। इसके बाद 105 मरीजों के ऑपरेशन में सर्जरी की प्रक्रिया में बदलाव किया गया।
खतरा कम करने में मिलेगी मदद
इस अध्ययन के मुताबिक, सर्जनों को शरीर की अंदरूनी संरचनाओं को ध्यान से देखने, जरूरत के मुताबिक एडवांस उपकरणों का इस्तेमाल करने और रक्त वाहिकाओं को अलग-अलग बांधने पर जोर दिया गया है।
इस अध्ययन में एम्स ने मूत्रवाहिनी के पास उत्तकों को जलाने वाली तकनीक से बचने की भी सलाह दी है। इससे मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और नसों को नुकसान/चोट लगने का खतरा हम करने में मदद मिल सकती है।
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लिवर के पास भी अहम क्षेत्र की पहचान हुई
इन नए अध्ययन में जो दूसरे क्षेत्र की पहचान की गई है उसे- 'रे का हेपेटोकेवल त्रिकोण' नाम दिया गया है। यह लिवर के पास मौजूद होता है और लिवर को आसपास के उत्तकों से अलग करने और उसकी स्थिति बदलने के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके आसपास अवर वेना कावा जैसी बड़ी रक्त वाहिका और लिवर की प्रमुख नसें होती हैं।
