बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता नुरुल इस्लाम मोनी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ हुए सभी 101 समझौतों की समीक्षा कर रही है। उन्होंने यह बयान संसद के 13वें सत्र में कही है। बांग्लादेश सरकार के कुछ फैसले भारत को चौंका सकते हैं।
नुरुल इस्लाम मोनी से यह सवाल पूछा गया कि क्या मित्र देशों के साथ बंदरगाहों पर हुए समझौते रद्द किए जाएंगे तो उन्होंने कहा कि सभी 101 समझौतों की समीक्षा चल रही है और इसका नतीजा बहुत जल्द सामने आएगा। उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कौन से समझौते जारी रहेंगे और किन्हें रद्द या संशोधित किया जा सकता है।
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पुरानी सरकार के समझौतों पर उठे सवाल?
नुरुल इस्लाम मोनी ने कहा कि मौजूदा बांग्लादेश सरकार राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए कई गैर-न्यायसंगत समझौतों से पीछे हट रही है। उन्होंने पिछली सरकार के दौरान हुए ऐसे समझौतों का जिक्र किया जो उनके मुताबिक अनुचित थे।
उन्होंने चटगांव बंदरगाह पर विदेशी जहाजों को बांग्लादेशी जहाजों से ज्यादा तरजीह देने वाली नीतियां की तरफ भी इशारा किया है। BNP के मुख्य सचेतक ने कहा कि आगे की कूटनीतिक साझेदारी संप्रभुता और घरेलू हितों की सुरक्षा पर निर्भर करेगी।
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BRICS में न बुलाए जाने पर नाराज है बांग्लादेश?
द डेली ऑब्जर्वर ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि नुरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में चल रहे BRICS समिट में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की तरफ से आमंत्रित न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए निराशाजनक बताया।
भारत और बांग्लादेश के बीच कौन से समझौते दांव पर लगे?
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कई साल से रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष तकनीक, रेलवे, न्यायिक सहयोग, नदी जल बंटवारे और तटीय सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में समझौते होते रहे हैं। इनमें रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क, दोनों देशों के डिफेंस कॉलेजों के बीच सहयोग, अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर समझौता है।
रेलवे कर्मियों की ट्रेनिंग और IT सिस्टम में सहयोग, न्यायिक अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए समझौता रहा है। अब इनमें कई गतिरोध पैदा हो चुके हैं। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार की विदाई के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के संबंध सहज नहीं है। कुशियारा और फेनी जैसी सीमा पार नदियों के जल बंटवारे से जुड़े समझौते भी अब सवालों के घेरे में है।
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कौन से समझौतों पर मंडरा रहा खतरा?
भारत ने पहले बांग्लादेश के साथ कई क्षेत्रों में सहयोग की बात कही थी। इसके तहत चटगांव बंदरगाह के जरिए आपसी व्यापार को आसान बनाना शामिल था। भारत ने बांग्लादेश रेलवे के आधुनिकीकरण और व्यापार से जुड़ी तकनीकी अड़चनों को दूर करने में भी मदद का भरोसा दिया था। दोनों देशों के बीच आपदा प्रबंधन में तालमेल और 'मैत्री सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट' जैसी बड़ी बिजली परियोजनाओं में सहयोग का दावा भी किया गया था। अब इनके सामने नई सरकारों के बीच बातचीत को लेकर चुनौती बनी हुई है। बांग्लादेश की BNP सरकार अब इन सभी 101 समझौतों की समीक्षा कर रही है, जिन्हें शेख हसीना सरकार में किया गया था।
