यमन के हूती विद्रोहियों ने अभी तक सऊदी अरब को अपने रडार पर ले रखा था। अब उनकी गाड़ी दक्षिण-पश्चिम यमन की तरफ घूम चुकी है। उनकी निगाह बंदरगाह शहर मोखा पर हैं। यहां अभी यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कब्जा है। यह इलाका बेहद रणनीतिक है। यमन की सरकार और सऊदी अरब नहीं चाहेंगे कि मोखा पर हूतियों का नियंत्रण हो। अगर हूती अपनी रणनीति में कामयाब होते हैं तो लाल सागर से होने वाले व्यापार पर बुरा असर पड़ना तय है।

 

हूती विद्रोहियों ने गुरुवार यानी 3 सितंबर से नई हमलों की लहर शुरू की। यमन सरकार और हूती विद्रोहियों की बीच जंग में अब तक 300 से अधिक लड़ाकों और नागरिकों की जान जा चुकी है। पूरा दक्षिण-पश्चिम यमन खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि संघर्ष में उनके 57 लड़ाकों की जान गई। वहीं सरकारी बलों ने 84 जवानों की मौत कबूल की है। इनमें से अधिकांश की जान मिसाइल अटैक में गई है।

 

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कहां से शुरू हुई नई जंग?

13 जुलाई को सऊदी अरब समर्थित यमन के सरकारी बलों ने राजधानी सना स्थित एयरपोर्ट पर बमबारी की थी। यह बमबारी तेहरान से आ रहे हूती प्रतिनिधियों के प्लेन की लैंडिंग से ठीक पहले की गई थी। नतीजा यह हुआ कि हूती विद्रोहियों को सना की जगह अपना प्लेन अल हुदैदाह एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। 7 दिन बाद 20 जुलाई को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ लाल सागर में सैन्य नाकेबंदी का ऐलान किया और 2022 का युद्धविराम तोड़ दिया।

बाब अल-मंडेब पर कब्जे का प्लान 

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किया तो सऊदी अरब अपने यानबू पोर्ट से तेल का निर्यात करने लगा। यह बंदरगाह लाल सागर तट पर स्थित है। बाब अल-मंडेब के रास्ते सऊदी तेल टैंकर दुनियाभर में जाने लगे। युद्धविराम और समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। मगर अभी तक बाब अल-मंडेब पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है।

 

यमन के सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच छिड़ी नई जंग की असल वजह ही बाब अल-मंडेब पर नियंत्रण हासिल करने की है। हूती विद्रोही बाब-अल-मंडेब की तरफ बढ़ रहे हैं। उन्होंने तैज शहर के पश्चिम और हेज दक्षिण में अपनी मजबूत उपस्थिति बना ली है। वहीं यमन की सरकारी सेनाएं हेज के उत्तर में डटी हैं। 

भीषण गोलीबारी की चपेट में मोखा

पिछले दो हफ्ते से मोखा बंदरगाह शहर भीषण गोलीबारी की चपेट में है। यह इलाका बाब अल-मंडेब के बेहद करीब है। हूती विद्रोही हर हाल में यहां अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। माना जाता है कि मोखा में जिसका नियंत्रण होगा, लाल सागर को वही काबू करेगा। अगर बाब अल-मंडेब पर हूती व्रिद्रोहियों का कब्जा होता है तो यह सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका होगा। लाल सागर के रास्ते उसका तेल व्यापार खतरे में पड़ सकता है। 

 

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इन इलाकों में भीषण तबाही मची 

हूती विद्रोहियों और यमन की सेना के बीच सबसे भीषण जंग तैज और होदेइदा प्रांतों में चल रही है। यमन की सरकार का दावा है कि उसने हूती कब्जे वाले होदेइइदा प्रांत के हैस जिले पर कब्जा कर लिया है। सेना पश्चिमी तैज की तरफ बढ़ रही है। हैस बेहद रणनीतिक जिला है। यहां तैज, इब्ब और होदेइदाह प्रांत आपस में मिलते हैं। तैज प्रांत पूरी तरह से बंट चुका है। आधे में हूती तो आधे में यमन की सरकार का कब्जा है। अल-बरह जंक्शन पर भी सरकारी सेना ने कब्जा कर लिया है।

क्या चाहती है यमनी सेना?

हूती विद्रोही लाल सागर तट पर यमनी सरकार के कब्जे वाले क्षेत्र में बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। गुरुवार को ड्रोन, बैलस्टिक मिसाइल और तोपखानों की जंग ने तैज और होदेइदाह को भीषण जंग में धकेल दिया है। यमन के सरकारी बलों का लक्ष्य हूती विद्रोहियों को खदेड़कर यमन को एकजुट करना है, जबकि हूती विद्रोही लाल सागर और बाब-अल-मंडेब पर कब्जा जमाने की फिराक में है। नई झड़प से यमन में व्यापक स्तर पर युद्ध के भड़कने की आशंका है, क्योंकि हूती विद्रोहियों ने अल-मखा के नजदीक सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।