अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने शुक्रवार को वाशिंगटन से रूस के ऊर्जा खरीदारों के खिलाफ सख्त टैरिफ कानून लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी परमाणु ईंधन पर अमेरिका की निर्भरता जारी रखना पागलपन जैसा है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन में 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' के 262 के मुकाबले 159 वोटों से पारित हो गया है। ऐसे में मैकमास्टर का यह बयान अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर दबदबा बहाल करने के लिए सख्त आर्थिक कदम जरूरी हैं।
एचआर मैकमास्टर ने यह भी कहा कि अमेरिका को भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को समझते हुए नरमी बरतनी चाहिए, क्योंकि भारत की सीमाएं दुश्मन पड़ोसी देशों से घिरी हुई हैं।
यह भी पढ़ें: रूस-ईरान पर बैन के लिए क्या कानून बना बैठे डोनाल्ड ट्रंप, भारत पर असर क्या?
रूस पर टैरिफ को समर्थन क्यों?
एचआर मैकमास्टर ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की शक्ति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देता है। उन्होंने इसे रूस के यूरोप में जारी छद्म युद्ध को रोकने के लिए एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि व्लादिमीर पुतिन को यह समझाना जरूरी है कि वह इन युद्धों को अब बर्दाश्त करने लायक कीमत पर जारी नहीं रख सकते।
यूरेनियम डील पर अमेरिका की गलती क्या है?
अमेरिका, ररूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड का आयात करता है। भारत पर रूस से कारोबार के लिए प्रतिबंध लगाता है। जब यह सवाल एचआर मैकमास्टर से किया गया तो उन्होंने कहा, 'किसी शत्रुतापूर्ण और तानाशाही सरकार को अपनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की ताकत देना बेहद खराब सोच है। अमेरिका का रूस से यूरेनियम खरीदना पागलपन जैसा है।' उन्होंने यह भी कहा कि व्यावहारिक आपूर्ति सीमाओं के चलते कुछ अहम मामलों में छूट दी जा सकती है।
भारत पर क्या होना चाहिए अमेरिका का रुख?
एचआर मैकमास्टर एक तरफ रूस का समर्थन करने वाले देशों पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ भारत पर वह कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। उन्होंने अपील की है कि पाकिस्तान और चीन जैसे दो ताकतवर लेकिन विवादित परमाणु शक्तियों से घिरे भारत के भू-राजनीतिक माहौल को देखकर ही फैसला लेना चाहिए। अमेरिका सच में रूस को नाराज करना चाहेगा, ऐसा नहीं लगता है।
यह भी पढ़ें: अब भारत पर 100% टैरिफ क्यों लगा सकता है अमेरिका? समझिए पूरी बात
'रूस से दूर नहीं जा सकता है भारत'
भारत का रक्षा सौदा, रूस पर निर्भर है। रूसी रक्षा उपकरणों और ऊर्जा आयात पर भारत की ऐतिहासिक निर्भरता है। एचआर मैकमास्टर ने कहा, 'मुझे अपने भारतीय मित्रों के प्रति सहानुभूति है। इन जटिल चुनौतियों को भारत के नजरिए से भी देखना जरूरी है। सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान की दोहरी चाल को न पहचान पाना उनकी सबसे बड़ी निराशाओं में से एक रहा है। यही वजह भारत और अमेरिका को एक-दूसरे के करीब आना चाहिए।'
भारत और चीन के रिश्तों पर क्या कहा?
एचआर मैकमास्टर ने कहा है कि चीन, अपने पड़ोसी देशों को आधीनस्थ मानता है। वह हिंद-प्रशांत महासागर के सभी देशों के साथ यही रिश्ता चाहता है। भारत का रुख, संप्रभुता का है, इसलिए अमेरिका को भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। अमेरिका संप्रभुता के पक्ष में खड़ा है।
यह भी पढ़ें: पैनिक में सऊदी अरब, MBS ने ट्रंप को 2 बार मिलाया फोन; US का सैन्य दखल से इनकार
भारत को अमेरिका पर भरोसा करना चाहिए?
एचआर मैकमास्टर ने सलाह दी है कि भारत को अमेरिका पर भरोसा रखना चाहिए। अमेरिका भारत पर रूस के खिलाफ पक्ष लेने या ब्रिक्स से दूरी बनाने का दबाव नहीं डालेगा, बल्कि लंबे समय में भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य उज्जवल है, इस पर भरोसा रखना चाहिए। भारत और अमेरिका के बीच इस महीने के अंत में एक वार्ता प्रस्तावित है। विस्कॉन्सिन में होने वाली G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान चर्चा होगी। यह बैठक 30 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होगी।
