नेपाल में बुधवार 26 अगस्त को आई अचानक भीषण बाढ़ में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 165 हो गई है। तिब्बत की ओर से आए तेज जलप्रवाह के बाद रसुवा जिले के भोटेकोशी नदी और त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और आसपास के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। यही नदी आगे चलकर गंडक-नारायणी नदी का हिस्सा बनती है। यही वजह है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में एहतियातन अलर्ट जारी किया गया है। 

 

बता दें कि गंडक-नारायणी एक बड़ी नदी है जो नेपाल और भारत के उत्तर प्रदेश-बिहार, दोनों जगह से होकर बहती है। इसी नदी को नेपाल में 'नारायणी' और भारत में आते ही 'गंडक' के नाम से जाना जाता है। 

 

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यूपी-बिहार में क्यों अलर्ट?

दरअसल, पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में भारत-नेपाल सीमा पर बना गंडक बैराज से नदी बिहार में प्रवेश करती है, इसलिए इसे सबसे संवेदनशील बिंदु माना गया जाता है। वहीं उत्तर प्रदेश में महराजगंज और कुशीनगर जिलों से होकर गंडक-नारायणी नदी गुजरती है। इसलिए यहां भी एहतियातन अलर्ट जारी हुआ है। इसके अलावा, गंडक नदी का घाघरा नदी से भी परोक्ष यानी इनडायरेक्ट कनेक्शन है, इसलिए एहतियातन गोरखपुर से बलिया तक भी अलर्ट जारी किया गया।  

NDRF ने क्या कहा? 

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से फिलहाल बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। दोनों राज्य साथ मिलकर स्थिति पर नजर बनाए रखे हुए हैं। NDRF के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने संवाददाताओं को बताया कि बिहार में 9 और उत्तर प्रदेश में 11 सहित कुल 20 दल तैनात हैं। इनका इस्तेमाल बाढ़ या जलभराव की स्थिति पैदा होने पर लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत व बचाव अभियान चलाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इनमें से एनडीआरएफ का एक दल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास कुशीनगर जिले में तैनात है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में अब तक बाढ़ से कोई प्रतिकूल असर नहीं है। हम दोनों राज्य सरकारों और अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल बैठा कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर जानकारी साझा कर रहा है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में भारत-नेपाल सीमा पर गंडक नदी पर स्थित पहला बैराज भी निगरानी में है, वहां नेपाल में आई बाढ़ का अब तक कोई असर नहीं पड़ा है। NDRF के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला 

कोसी नदी में भी है खतरा?

नेपाल में ‘भोटे कोशी’ में भोटे का इस्तेमाल आमतौर पर तिब्बत की ओर से आने वाली नदी से होता है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर यह नाम मिलता है। सिंधुपालचोक की प्रसिद्ध भोटेकोशी तिब्बत में Poiqu कहलाती है, नेपाल में भोटेकोशी बनती है, आगे सुनकोशी में मिलती है और आखिर में सप्तकोशी बनकर बिहार में कोसी के रूप में प्रवेश करती है। मौजूदा बड़ी आपदा रासुवा वाले भोटेकोशी, ल्हेन्दे त्रिशूली तंत्र में है और यह नदी कोसी में नहीं जाती।

 

यह आगे त्रिशूली, नारायणी और गंडक के बाद गंगा में मिल जाती है। इसलिए मौजूदा घटना का भारत पर पहला और सीधा नदी संबंध गंडक से है, कोसी से नहीं है। ‘भोटेकोशी’ का नाम पढ़कर यदि इसे कोसी की बाढ़ मान लिया जाए तो खतरे का पूरा भौगोलिक आकलन गलत हो सकता है। सिंधुपालचोक वाली भोटेकोशी वास्तव में सुनकोशी कोसी तंत्र की नदी है, जबकि रासुवा की वर्तमान भोटेकोशी त्रिशूली गंडक तंत्र का ऊपरी भाग है।

 

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गंडक नदी से सीधी जुड़ी है भोटेकोशी

रसुवा के उत्तर में तिब्बत के ग्यीरोंग इलाके से निकलने वाली धाराएं (खासतौर से क्यीरोंग त्सांगपो और ल्हेंदे खोला) नेपाल सीमा के पास आकर आपस में मिल जाती हैं। इन्हीं के मिलने से बनने वाली नदी को ऊपरी नेपाल में भोटेकोशी कहा जाता है। नीचे आते-आते यही नदी त्रिशूली कहलाने लगती है। त्रिशूली आगे कई और बड़ी नदियों से मिलते हुए देवघाट के पास पहुंचकर नारायणी नदी तंत्र का हिस्सा बन जाती है। नारायणी जैसे ही भारत में दाखिल होती है, इसे गंडक नदी कहा जाने लगता है। यह वाल्मीकिनगर के पास मैदानी इलाके में उतरती है। आखिर में यही नदी बिहार से होते हुए सोनपुर-हाजीपुर के पास गंगा नदी में जाकर मिल जाती है। 

क्या कोसी, बागमती, कमला और बूढ़ी गंडक को भी खतरा है?

रसुवा की भोटेकोशी का पानी सिर्फ गंडक नदी में जाता है, कोसी, बागमती, कमला और बूढ़ी गंडक इससे अलग नदी तंत्र हैं। अगर नेपाल में एक साथ भारी मानसूनी बारिश हो, तो ये सभी नदियां अपने-अपने कारण अलग से उफान पर आ सकती हैं और बिहार में बहु-नदी बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भोटेकोशी का पानी इन नदियों में पहुंच रहा है। केंद्रीय जल आयोग भी नारायणी-गंडक को कोसी, बागमती और कमला से हमेशा अलग जलतंत्र मानकर सलाह जारी करता है। इसके अलावा, दूसरी तरफ नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ के कारण टनकपुर में शारदा बैराज और आसपास के घाटों पर SDRF को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है।