वेनेजुएला में अमेरिका ने जो किया, वह हैरान करने वाला नहीं था। वह इसलिए क्योंकि अमेरिका की यह फितरत रही है। 3 जनवरी को अमेरिका ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट' चलाया और लगभग एक घंटे में ही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को पकड़कर अमेरिका लाया गया है। उन पर ड्रग्स तस्करी के इल्जाम लगाए गए हैं। दोनों पर मैनहट्टन की अदालत में मुकदमा चल रहा है।
निकोलस मादुरो को जिस तरह से पकड़ा गया, उसकी क्यूबा और कोलंबिया जैसे देशों ने निंदा भी की है। वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की नजर क्यूबा पर भी है। वह इसलिए क्योंकि क्यूबा और वेनेजुएला के रिश्ते 'करण-अर्जुन' की तरह थे। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते थे।
और तो और, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सुरक्षा में भी क्यूबा के सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते थे। लेकिन निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद अब क्यूबा की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। ट्रंप ने भी कहा था कि क्यूबा अब खत्म हो जाएगा।
यह भी पढ़ें-- 'मैं एक शरीफ आदमी हूं', कोर्ट में पेश हुए निकोलस मादुरो तो क्या-क्या हुआ?
ट्रंप ने क्यूबा पर क्या कहा था?
निकोलस मादुरो को पकड़कर लाए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अब कुछ समय तक वेनेजुएला को अमेरिका ही 'चलाएगा'।
वेनेजुएला के ऑपरेशन के बाद ट्रंप ने कहा था, 'क्यूबा अब गिरने को तैयार है। ऐसा लग रहा है कि क्यूबा का डाउनफॉल शुरू भी हो गया है।'
चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा था, 'क्यूबा के पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। उसकी सारी कमाई वेनेजुएला और वेनेजुएला के तेल से होती थी। अब उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। क्यूबा सच में गिरने के लिए तैयार है।'
यह भी पढ़ें-- 'धरती पर नरक...', जिस ब्रुकलिन जेल में बंद हैं निकोलस मादुरो, वह कैसी है?
क्यूबा में दिखने लगा असर!
ट्रंप ने कहा था कि मादुरो के हटने से क्यूबा की बीमार अर्थव्यवस्था और खराब हो जाएगी। जानकारों का भी मानना है कि क्यूबा बहुत हद तक वेनेजुएला पर निर्भर है।
मादुरो के हटने से पहले से ही क्यूबा की हालात लगातार बिगड़ती जा रही थी। अब तो हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि क्यूबा में लोग लंबे समय से बिजली कटौती और खाने-पीने की चीजों की कमी से जूझ रहे हैं।
अमेरिकी हमले के बाद क्यूबा के लोग डरे हुए हैं और उनका कहना है कि आने वाला समय ऐसा हो सकता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
75 साल की बर्टा लूज सिएरा मोलिना ने रोते हुए और अपने चेहरे पर हाथ रखते हुए कहा, 'मैं कुछ बता नहीं सकती। मेरे पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं हैं।'
यह भी पढ़ें-- 'हमारे हिसाब से नहीं चलीं तो...', ट्रंप ने अब डेल्सी रोड्रिग्ज को दी धमकी

सरप्राइज अटैक में 32 मौतें
अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला में जो हमला किया, उसका असर क्यूबा तक देखने को मिला। क्यूबा का दावा है कि अमेरिका के सरप्राइज अटैक में उसके 32 लोगों की मौत हो गई है।
क्यूबा के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी हमले में उसके 32 सिक्योरिटी गार्ड मारे गए हैं। ये सभी गार्ड्स वेनेजुएला में तैनात थे। हालांकि, उन्होंने इस बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं दी। 32 लोगों की मौत के बाद क्यूबा में 5 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।
यह भी पढ़ें-- कैसे सरकारें गिराता है अमेरिका, वेनेजुएला से क्या सीख सकती दुनिया?
क्या अमेरिका से मिलेगा तेल?
वेनेजुएला के पास तेल का भंडार है। अमेरिकी हमले की एक बड़ी वजह यही है। क्यूबा अपनी तेल जरूरतों के लिए वेनेजुएला पर काफी हद तक निर्भर है।
ऑस्टिन एनर्जी इंस्टीट्यूट में क्यूबा के एनर्जी एक्सपर्ट जॉर्ज पिनॉन ने कहा कि मादुरो की सरकार पिछले तीन महीनों में रोजाना औसतन 35,000 बैरल तेल भेज रही थी। यह क्यूबा की कुल जरूरत का लगभग 25% है।
उन्होंने कहा, 'एक सवाल जिसका जवाब हमारे पास नहीं है, जो बहुत जरूरी है कि क्या अमेरिका, वेनेज़ुएला को क्यूबा को तेल सप्लाई करते रहने देगा?'
पिनॉन ने बताया कि मेक्सिको कभी क्यूबा को रोजाना 22,000 बैरल तेल सप्लाई करता था, लेकिन सितंबर की शुरुआत में अमेरिका विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मेक्सिको का दौरा किया था, जिसके बाद यह सप्लाई घटकर 7,000 बैरल हो गई।
जॉर्ज पिनॉन का मानना है कि फिलहाल क्यूबा को मेक्सिको का साथ मिलने की उम्मीद भी नहीं है।
यह भी पढ़ें-- तो खत्म हो जाएंगे छोटे देश! वेनेजुएला पर हमले से दुनिया को खतरा क्या?

क्या बर्बाद हो जाएगा क्यूबा?
वॉशिंगटन स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी में क्यूबा के इकोनॉमिस्ट रिकार्डो टोरेस ने कहा कि 'ब्लैकआउट बहुत ज्यादा हो गए हैं और वह भी तब जब वेनेजुएला अभी भी तेल की सप्लाई कर रहा है।'
उन्होंने कहा कि 'जरा सोचिए कि भविष्य में ये सप्लाई भी खत्म हो जाए तो कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।' उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा के पास इंटरनेशनल मार्केट से तेल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि रूस हर साल क्यूबा को 20 लाख बैरल तेल की सप्लाई करता है। ऐसे समय में भी उसे रूस से मदद मिल सकती है लेकिन इसमें भी रिस्क है। उन्होंने कहा, 'क्यूबा को तेल की सप्लाई सिर्फ रूस कर सकता है। पर क्या रूस के पास ऐसा करने की राजनीतिक इच्छा है? मुझे नहीं पता।'
रिकार्डो टोरेस ने कहा कि 'क्यूबा में दखल देने से यूक्रेन को लेकर अमेरिका के साथ जो बातचीत चल रही है, वह खतरे में पड़ सकती है। आप ऐसा क्यों करेंगे? आपके लिए यूक्रेन कहीं ज्यादा जरूरी है।'
उन्होंने कहा कि क्यूबा को अब प्राइवेट सेक्टर के लिए अपने दरवाजे खोलने चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे चीन से उसे मदद मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा के पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
