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तो खत्म हो जाएंगे छोटे देश! वेनेजुएला पर हमले से दुनिया को खतरा क्या?

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद दुनियाभर में सेना की मदद से सत्ता पलटने, संसाधनों पर कब्जा करने और अपनी बात मनवाने का एक नया सिलसिला शुरू हो सकता है। सबसे अधिक खतरा उन छोटे देशों को होगा, जिनका पड़ोसी चीन जैसा आक्रामक स्वभाव वाला देश होगा।

Nicolas Maduro and Donald Trump

निकोलस मादुरो और डोनाल्ड ट्रंप। (Photo Credit: Social Media)

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वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद दुनिया दो धड़ों में बंट चुकी है। एक धड़ा अमेरिका के साथ खड़ा और दूसरा उसके कदमों की निंदा करने में जुटा है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले यूरोप के अधिकांश अमेरिका के हां में हां मिला रहे हैं। उत्तर कोरिया, चीन और क्यूबा जैसे देशों ने अमेरिकी कदम को वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला करार दिया। खुद ही अमेरिका के अंदर ही ट्रंप के खिलाफ आवाज उठ रही है।

 

अब सवाल यह उठ रहा है कि एक कथित तानाशाही को खत्म करने का सिर्फ तानाशाही ही एकमात्र विकल्प है। देशों की अखंडता और संप्रभुता कहां गई। कौन वैधानिक तरीके से चुनाव जीतकर आया है और कौन नहीं, क्या यह दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका ही तय करेगा? आइये समझते हैं कि ट्रंप के इस कदम से दुनिया को खतरा क्या है, छोटे देश क्यों चिंतित हैं और आने वाले समय में क्या कुछ हो सकता है?

 

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नई दादागीरी की शुरुआत: किसी देश में अपनी सेना भेजना, वहां बमबारी करना और राष्ट्रपति को पकड़ लाना, शायद उतनी बड़ी उपलब्धि नहीं है, जितनी बड़ी डोनाल्ड ट्रंप बता रहे हैं। मगर यह कदम बेहद चिंताजनक जरूर है। अब छोटे देशों को अपने आसपास के बड़े देशों से हमेशा खतरा महसूस होगा। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के बजट में मजबूरन कटौती करके रक्षा पर भारी निवेश करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अपनी सुरक्षा से समझौता करना पड़ सकता है।

 

मच सकती अपदस्थ करने की होड़: कोई भी मिलिट्री के तौर पर एडवांस्ड देश अपने से कमजोर पड़ोसी देश की कोई नीति पसंद नहीं आने पर उस पर हमला और कब्जा कर लेगा, क्योंकि ट्रंप के कदम से उसे नैतिक बल मिल गया है। वैश्विक स्तर पर इन हमलों को जस्टिफाई करना आसान होगा। अमेरिका भी उस देश के खिलाफ ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि उसकी नैतिकता खो चुकी है।

 

संसाधनों लूट की नई होड़ होगी शुरू: डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला के उर्जा क्षेत्र पर कब्जा करेगा। मतलब साफ है कि मादुरो पर तानाशाही, वोट चारी और ड्रग्स तस्करी के आरोप मनगढ़त थे। अमेरिका का असली मकसद उन्हें हटाकर वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करना था, क्योंकि मादुरो अमेरिका के खिलाफ थे। ट्रंप ने यूक्रेन से भी अमेरिकी मदद के बदले रेयर अर्थ मिनरल्स मांगे थे। कांगो और नाइजीरिया तक उनकी निगाह खनिज संसाधनों पर है। ऐसे में चीन और रूस भी अमेरिका के जवाब में इस जंग में कूद सकते हैं।

 

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बढ़ेंगे सैन्य हस्तक्षेप के मामले: अभी तक वैश्विक व्यवस्था में सैन्य हस्तक्षेप की तुलना में कूटनीति को अधिक महत्व दिया जाता है। मगर वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद दुनियाभर में सैन्य हस्तक्षेप बढ़ सकते हैं। ताकत के दम पर देशों को झुकाने का एक नया चलन शुरू होगा। कुछ देश पिछले कई दशकों में कई बार विभाजित हो चुके हैं। ऐसे में सैन्य ताकत से इन्हें दोबारा मिलाने का ट्रेंड भी शुरू हो सकता है।

 

अमेरिका से किन देशों को खतरा: आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका अब ईरान पर भी वेनेजुएला जैसा कदम उठा सकता है। पिछले कई दशकों से अमेरिका ईरान में सत्ता पलटने का पक्षधर रहा है। वहीं उसके निशाने पर क्यूबा और कोलंबिया भी हैं। कुछ समय पहले ही ट्रंप और कोलंबिया के राष्ट्रपति के बीच तीखी बहस हो चुकी है। मादुरो की तरह ही ट्रंप ने कोलंबिया सरकार पर भी ड्रग्स तस्करी का आरोप लगाया है।

 

इजरायल: मध्य पूर्व में इजरायल भले ही एक छोटा सा देश हो, मगर ताकत में उसके आगे कोई नहीं टिकता है। इजरायल के पास किसी देश के अंदर घुसकर ऑपरेशन करने की क्षमता है। वह ईरान समेत कई मुस्लिम देशों में सत्ता पलटने का पक्षधर है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इजरायल भी अपने दुश्मन देशों के खिलाफ वेनेजुएला जैसा कदम उठा सकता है। इन दिनों उसके रडार पर सबसे अधिक तुर्की है।

 

रूस और चीन: रूस खुलकर पूरे यूक्रेन पर कब्जा चाहता है। अभी तक जेलेंस्की को कोई चोट नहीं पहुंचाई गई। कुछ दिन पहले पुतिन के घर पर ड्रोन से हमले की खबर आई। अब वेनेजुएला में अमेरिकी तख्तापलट के बाद पुतिन को यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने का नैतिक बल मिल चुका है। यूक्रेन के अलावा रूस कई अन्य देशों को निशाना बना सकता है। वहीं दक्षिण चीन सागर में ताइवान की दादागिरी से परेशान देश सबसे अधिक खौफ में होंगे। अभी तक अमेरिका अंतराष्ट्रीय कानूनों के हवाले से चीन की आक्रामकता को गैर-कानूनी कहता था। मगर अब वह ऐसा किस मुंह से कहेगा। चीन की सैन्य ताकत बेहद विशाल है। कल को वह ताइवान, फिलिपींस और जापान तक को अपनी सैन्य कार्रवाई की जद में ले सकता है।

 


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