तुर्की की सुरक्षा हाटे से नहीं, बल्कि अलेप्पो, दमिश्क और बेरूत से शुरू होती है। 10 जून को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अपने इस बयान में स्पष्ट किया था कि लेबनान और सीरिया में इजरायल के हमले तुर्की की सुरक्षा के लिए खतरा है। हाटे तुर्की का दक्षिणी प्रांत है। इसकी सीमा सीरिया से लगती है। अलेप्पो इसके करीब बसा सीरिया का सबसे बड़ा शहर है। पास में ही सीरिया का इदबिल प्रांत है।
18 अगस्त को इजरायल ने इदबिल के ही अबू अल-दुहूर एयरबेस पर अटैक किया था। एर्दोगन के मुताबिक अगर तुर्की की सुरक्षा अलेप्पो से शुरू होती है तो इजरायल ने सीरियाई एयरबेस पर अटैक करके अंकारा को खुली चुनौती दे दी है। इजरायल का आरोप है कि तुर्की अबू अल-दुहूर बेस पर अपनी सेना तैनात करने की तैयारी में था। बेंजामिन नेतन्याहू ने धमकी भरे लहजे में कहा कि सीरिया में तुर्की का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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सीरिया में तुर्की की मौजूदगी को इजरायल खतरे के रूप में देखता है। इसके विपरीत तुर्की भी इजरायल के प्रति ऐसा ही सोचता है। दोनों को सीरिया में एक-दूसरे की दखल पसंद नहीं आ रहा है। इजरायल की रणनीति सीरिया को बफर जोन की तरह इस्तेमाल करने की है। तुर्की सीरिया में प्रभाव स्थापित करके भविष्य में होने वाले संघर्ष को अपनी सीमा से दूर खींचने की रणनीति में है। यही वजह है कि दुनियाभर के विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की और इजरायल के बीच जंग तय है। जंग का मैदान सीरिया होगा। बस यह तय होना बाकी है कि युद्ध कब और कैसे शुरू होगा?
सीरियाई बेस पर इजरायली हमले के बाद तुर्की की सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो चुकी है। विदेश मंत्री हाकान फिदान अपने सहयोगियों से बात करने में जुटे हैं। इसमें पाकिस्तान भी बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आइये समझते हैं कि एयरबेस पर हमले के बाद तुर्की और इजरायल में क्या चल रहा है।
क्या हमले की तैयारी में तुर्की?
इजरायली हमले के बाद तुर्की ने सधी प्रतिक्रिया दी, लेकिन अंदरखाने कुछ बड़ा गेम चल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में दावा किया गया कि सीरिया बॉर्डर की तरफ तुर्की ने भारी मात्रा में सैन्य गतिविधि बढ़ा दी है। इजरायल के चैनल 14 न्यूज ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद तुर्की ने सीरिया में 20 टैंकरों समेत 200 और गाड़ियों को तैनात किया है।
उधर, ट्रंप की करीबी लॉरा लूमर ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'तुर्की जुलानी की आईएसआईएस फोर्स के साथ मिलकर इजरायल पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। सबको जल्द ही पता चल जाएगा कि 'सुधरे हुए जिहादी' जैसी कोई चीज नहीं होती। जुलानी और एर्दोगन मिलकर इजरायल पर हमले की योजना बना रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक यहूदियों को मारा जा सके। तुर्की को NATO से बाहर निकाल देना चाहिए।' सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा का पुराना नाम अबू मोहम्मद अल-जुलानी है। पूर्व में वे आतंकी रह चुके हैं।
जुबानी जंग से आगे बढ़ी बात
एक बात तो साफ है कि इजरायल और तुर्की बीच मामला जुबानी जंग से आगे बढ़ चुका है। शायद यह पहली बार है कि इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक वीडियो जारी करके सीरिया में तुर्की के दखल को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। ठीक वैसे ही जैसे गाजा में हमास और लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ पहले किया था।
इजरायली प्रधानमंत्री के आधिकारिक एक अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में मैप के आधार पर समझाने का प्रयास किया गया। इसमें इजरायल ने आरोप लगाया कि तुर्की सीरिया में अपनी मौजूदगी उत्तर पश्चिम से दक्षिण यानी इजरायल की तरफ बढ़ा रहा है। यह भी कहा गया कि सीरिया के लगभग 5 फीसद क्षेत्र पर तुर्की की सैन्य उपस्थिति है। जबकि इजरायल की सीरियाई जमीन पर लगभग 0.1% की मौजूदगी है।
आरोप लगाया गया कि सीरिया और इजरायल के बीच सीमा को शांत और सुरक्षित बनाने की समझ बनी थी। लेकिन सीरिया ने इसका उल्लंघन किया। इजरायली खुफिया एजेंसी को अबु-अल-दुहूर एयरबेस पर तुर्की की तैनाती का पता चला। यह एयरबेस इजरायली कस्बों और इजरायली समुदाय से 200 मील से भी कम दूरी पर स्थित है। इजरायल ने इसी को हमले का आधार बताया।
'इजरायल ने करीब करीब युद्ध ही छेड़ दिया था'
मारियो नॉफाल के साथ विशेष बातचीत में तुर्की में ट्रंप के विशेष दूत टॉम बैरक ने कहा कि इजरायल ने तुर्की के साथ लगभग युद्ध छेड़ दिया था। किसी को भी... यहां तक कि ट्रंप को भी इसका अंदाजा नहीं था। बैरक का कहना है कि मोसाद प्रमुख और सीरिया के विदेश मंत्री के बीच दो घंटे तक गुप्त बातचीत चली। इसके बावजूद इजरायल ने एयरबेस पर हमला कर दिया। तुर्की और वाशिंगटन को बताया तक नहीं। बैरक का मानना है कि इजरायल तुर्की को उकसा रहा था।
तुर्की ने इजरायल के खिलाफ छेड़ा कूटनीतिक अभियान
तुर्की ने दुनियाभर में इजरायल के खिलाफ राजनयिक अभियान छेड़ दिया है। शुक्रवार को सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री के बीच फोन पर बातचीत हुई। उधर, सीरिया के विदेश मंत्री ने इस्लामाबाद की अपनी पहली यात्रा की। बाद में तुर्की के इशारे पर ही पाकिस्तान ने मलेशिया के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की। इन तमाम घटनाक्रम के कुछ देर बाद ही जॉर्डन, अल्जीरिया, इंडोनेशिया, लेबनान, मलेशिया, मॉरिटानिया, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने एक साथ सीरिया के अबू अल-दुहूर मिलिट्री एयरबेस पर इजरायली हमले की निंदा की।
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सीरिया में आगे बढ़ रही इजरायल की सेना
उधर, सीरिया की सरकारी टीवी चैनल अलीखबारिया के हवाले से तुर्किये टुडे ने बताया कि इजरायली सेना सीरिया के दक्षिण-पश्चिमी कुनेत्रा प्रांत में अल-रफीद शहर की तरफ बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में घुस चुकी है। यह घुसपैठ गोलान हाइट्स की तरफ से की जा रही है।
अलर्ट पर इजरायल, पलटवार की आशंका
इजरायल में तुर्की के पलटवार की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि उत्तरी इजरायल में सुरक्षा व्यवस्था अलर्ट पर है। वहीं तुर्की का मानना है कि उसके पास पलटवार करने का अधिकार सुरक्षित है। अगर हमले के जवाब में इजरायल ने उस पर सीधा हमला किया तो नाटो के आर्टिकल-5 के तहत बाकी सदस्य देश दखल देंगे। मगर इजरायल के खुफिया और सैन्य रणनीतिक गलियारों में इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि तुर्की की संप्रभु सीमा से बाहर अगर उसके सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया तो क्या आर्टिकल 5 लागू होगा या नहीं। अगर इस पर एक बार स्थिति साफ हो गई तो इजरायल सोमालिया और सीरिया में स्थित तुर्की के सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बना सकता है।
क्या ईरान है तनाव की वजह?
टॉम बैरक सीरिया में इजरायली हमले की एक अलग कहानी बताते हैं। उनका कहना है कि इजरायल चाहता है कि तुर्की सीरिया में अपनी सैन्य प्रणाली और एयर डिफेंस सिस्टम न स्थापित करे। अगर अंकारा ने ऐसा किया तो भविष्य में इजरायल को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इजरायल चाहता है कि सीरिया का एयर स्पेस उसके लिए खुले आसमान के तौर पर हो। ईरान पर हमला करते वक्त कोई और बाधा न बने।
