उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के बाद पहाड़ के नीचे भूकंप बढ़ गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि 2017 में देश के छठे और सबसे बड़े परमाणु परीक्षण के बाद इलाके में भूकंप की गतिविधि साफ बढ़ गई है। माउंट मंताप्सन के आसपास पहले भूकंप बहुत कम होते थे। 2017 के परीक्षण से 6.3 तीव्रता का भूकंप आया। इससे सुरंग ढहने और पहाड़ की चोटी के आकार में करीब 3 मीटर का बदलाव भी हो सकता है। परीक्षण के बाद आए ज्यादातर झटके 2 से 3 तीव्रता के और उथले थे।
दक्षिण कोरिया के पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किम ने बताया कि चीन और कोरिया के 2 हजार साल से ज्यादा के इतिहास में इस इलाके में भूकंप बहुत कम दर्ज हुए हैं। एक घटना करीब 100 किलोमीटर दूर हुई थी। यहां प्राकृतिक भूकंप की संभावना कम मानी जाती रही है।
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2017 के बाद जमीन के अंदर बनीं दरारें
शोधकर्ताओं के अनुसार 2017 के विस्फोट के बाद जमीन अपनी पुरानी हालत में नहीं लौटी। पहाड़ के अंदर कम से कम दो पुराने फॉल्ट सक्रिय हो गए। विस्फोट से नई दरारें भी बनीं हैं, जिनमें पानी भर गया है। इस दबाव से चट्टानें सरक रही हैं और छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं।
2008 से 2025 तक, कितने भूकंप आए?
वैज्ञानिकों ने 2008 से 2025 के बीच के भूकंपीय आंकड़ों का अध्ययन किया और माउंट मंताप्सन के आसपास कुल 1399 भूकंप दर्ज किए। यह वही पहाड़ है, जहां उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 के बीच छह भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे। खास बात यह है कि इस पहाड़ और उसके आसपास के इलाके में पिछले 2000 सालों से कोई भूकंप दर्ज नहीं हुआ था।
क्यों हैरान करने वाले हैं ये नतीजे?
आमतौर पर परमाणु धमाकों से जुड़े भूकंप कुछ समय बाद कम होने लगते हैं, लेकिन यहां मामला उलटा देखा गया। इसलिए ही स्टडी के नतीजे असामान्य माने जा रहे हैं। इस इलाके में पहला भूकंप 2013 में दर्ज हुआ था। यह उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद आया था। इसके बाद अगले कुछ सालों तक भूकंप बहुत कम आए। साल 2017 में जब उत्तर कोरिया ने अपना छठा और अब तक का सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण किया तो हालात बदल गए।
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2017 में क्या नुकसान हुआ था?
स्टडी के लेखकों ने बताया कि छठे और सबसे बड़े धमाके के बाद भूकंपीय गतिविधि में साफ तौर पर तेजी देखी गई। उससे पहले यह गतिविधि बेहद कम थी। 2017 के इस परीक्षण से 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था। माना जाता है कि इससे एक सुरंग भी ढह गई थी। दावा किया गया कि पहाड़ की चोटी का आकार करीब 3 मीटर तक बदल गया था।
वैज्ञानिकों ने बताई भूकंप की क्या वजह बताई है?
पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर किम ने दावा किया कि परीक्षण के बाद दर्ज हुए ज्यादातर भूकंपों की तीव्रता 2 से 3 के बीच रही। ये भूकंप जमीन की सतह के करीब ही आए। उन्होंने यह भी बताया कि परमाणु परीक्षण शुरू होने से पहले इस इलाके में भूकंपीय गतिविधि बेहद कम थी।
प्रोफेसर किम ने कहा कि चीन और कोरिया में 2000 साल से ज्यादा पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद है। इसमें करीब 100 किलोमीटर दूर सिर्फ एक ही घटना दर्ज मिलती है। उन्होंने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि वहां भूकंप बिल्कुल नहीं आते, इस इलाके में भूकंपीय गतिविधि बहुत कम रही है।
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हिलती रहेगी कोरियाई धरती
शोधकर्ताओं का मानना है कि भूकंप बढ़ने का कारण यह हो सकता है कि 2017 के धमाके के बाद माउंट मंताप के नीचे की जमीन पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं लौटी। किम के मुताबिक इस धमाके से पहाड़ के अंदर मौजूद कम से कम दो पुरानी और निष्क्रिय दरारें फिर से सक्रिय हो गई होंगी। धमाके से बनी नई दरारों में पानी भर गया, जिससे दबाव बना और चट्टानें आपस में खिसकने लगीं, जिसके चलते लगातार छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं।
