डिमेंशिया एक दिमाग से संबंधित रोग है, जिसमें लोग चीजें भूलने लगते हैं और सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है। इसी बीमारी को लेकर एक स्टडी जारी हुई है। इस स्टडी का दावा है कि किन लोगों को भविष्य में डिमेंशिया हो सकता है, इसका पता अब 25 साल पहले ही पता लगाया जा सकता है। यह जानने के लिए किसी प्रकार के दिमागी स्कैन की जरूरत नहीं होगी, बल्कि केवल ब्लड टेस्ट के जरिए ही पता लगाया जा सकता है कि किसी को डिमेंशिया का खतरा है या नहीं है।
डिमेंशिया पर यह स्टडी मेडिकल जर्नल JAMA Network Open में प्रकाशित हुई है। इस विषय पर रिसर्च 1990 के दशक में की गई थी। इस रिसर्च में 2,766 महिलाओं ने हिस्सा लिया था, जो उस समय मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थीं। इस रिसर्च में इन महिलाओं के ब्लड टेस्ट से चौंकाने वाली बातें सामने आईं, जिससे पता चला कि किन महिलाओं को भविष्य में डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा है।
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स्टडी में मिला चौंकाने वाला दावा
इस रिसर्च में पहले महिलाओं का ब्लड टेस्ट किया गया। इसमें पाया गया कि जिन महिलाओं के खून में पी-टाऊ217 की मात्रा ज्यादा थी, उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा था। पी-टाऊ217 खून में पाया जाने वाला एक खास प्रकार का प्रोटीन है। इस प्रोटीन की शरीर में अधिक मात्रा होना एक तरह की चेतावनी हो सकती है कि भविष्य में डिमेंशिया हो सकता है।
हालांकि, ये महिलाएं रिसर्च के दौरान पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ थीं लेकिन आगे चलकर उनमें भूलने की बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। अब सवाल उठता है कि महिलाओं के खून में पी-टाऊ217 प्रोटीन की मात्रा ज्यादा क्यों होती है।
पी-टाऊ217 क्या है?
यह एक प्रोटीन है, जो अक्सर बढ़ती उम्र में शरीर में पाया जाता है। कई बार कम उम्र में भी खासकर दिमाग में पी-टाऊ217 प्रोटीन का जमाव होने लगता है। यही जमाव आगे चलकर डिमेंशिया का कारण बन सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि महिलाओं के शरीर में पी-टाऊ217 की मात्रा पुरुषों की तुलना में अधिक पाई जाती है।
महिलाओं के शरीर में इस प्रोटीन का जमाव हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण भी हो सकता है, खासकर उस समय जब मासिक धर्म बंद होता है (मेनोपॉज)। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विशेष जीन, जैसे APOE, भी इस प्रोटीन को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
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कुल मिलाकर, अगर खून में पी-टाऊ217 की मात्रा ज्यादा है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि भविष्य में व्यक्ति को याददाश्त से जुड़ी समस्याओं यानी डिमेंशिया का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराना फायदेमंद हो सकता है।
डिमेंशिया
डिमेंशिया में व्यक्ति की सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता कमजोर हो जाती है। यह आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ होता है लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। एक बार डिमेंशिया हो जाने पर इसे पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।
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डिमेंशिया होने के कारण
शराब का सेवन- रोजाना शराब पीने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
हार्मोनल इम्बैलेंस- शरीर में हार्मोनल असंतुलन दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है।
सिर में चोट- सिर पर गंभीर चोट लगने से भविष्य में डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
पारिवारिक इतिहास - अगर परिवार में किसी को डिमेंशिया रहा है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
डिमेंशिया से बचने के तरीके
जीवनशैली में सुधार करके डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है।
नींद - रोजाना पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। 5 घंटे से कम सोने पर दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।
शराब से दूरी -शराब का सेवन दिमाग के लिए हानिकारक है। ज्यादा मात्रा में शराब पीने से दिमाग का आकार कम हो सकता है और डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
नियमित एक्सरसाइज - रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए।
स्वस्थ भोजन -संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में हों।
