प्लास्टिक सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है। हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। सुबह में डिस्पोजेबल कप, पैकेज्ड फूड, प्लास्टिक की बोतल समेत अन्य चीजों का रोजाना इस्तेमाल करते हैं। प्लास्टिक में कई प्रकार के हानिकारक केमिकल्स मौजूद होते हैं जो सेहत के लिए खतरनाक है। प्लास्टिक में मौजूद सूक्ष्म कणों को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है। ये माइक्रोप्लास्टिक हार्ट अटैक से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। इस बात की पुष्टि कई स्टडी में हुई है। 

 

स्टडी में दावा किया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के सूक्ष्म कण खाने-पीने की चीजों के साथ हमारे ब्ल्ड वेस्लस में घुल रहे हैं। इतना ही नहीं ये हमारे शरीर में अलग-अलग जगहों पर जमा भी हो रहे हैं जिसकी वजह अंदरुनी सूजन समेत अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। क्या आपने कभी सोचा हैं कि दिन भर में कितनी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर के अंदर जाता है?

 

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टूथब्रश

 

टूथब्रश प्लास्टिक से बनाया जाता है। हम रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं। एक बार ब्रश करने पर 30 से 100 सूक्ष्म कण शरीर के अंदर जाते हैं। ये माइक्रोप्लास्टिक शरीर की कोशिकाओं में एब्जॉर्ब होते हैं। लंबे समय में शरीर के अंदर सूजन का खतरा बढ़ जाता है। National Library Of Medicine की रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक ओरल हेल्थ के बेहद नुकसानदायक है।

 

 

च्युइंग गम

 

कई लोगों को च्युइंग गम खाने की आदत होती है। जब आप च्युइंग गम को चबाते हैं तो उसमें 100 से ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश कण, अक्सर पॉलीओलेफिन और पॉलीस्टाइरीन जैसे सिंथेटिक पॉलिमर से बने होते हैं जो चबाने के पहले दो मिनट के भीतर निकल जाते हैं।

 

लंच बॉक्स

 

प्लास्टिक के लंच बॉक्स में खाना नहीं खाना चाहिए। गर्म खाने को जब आप प्लास्टिक के लंच बॉक्स में डालते हैं तो उसमें मौजूद माइक्रोप्लास्टिक के कण कई गुना ज्यादा बढ़ जाते हैं। रिसर्च के मुताबिक गर्म खाने को लंच बॉक्स में डालते हैं तो 3 मिनट के अंदर 4. 22 मिलियन माइक्रोप्लास्टिक और 2.11 बिलियन नैनोप्लास्टिक कण घुल जाते हैं। आप प्लास्टिक की बजाय स्टील या फिर कांच के लंच बॉक्स का इस्तेमाल करें।

 

कॉफी

 

डिस्पोजेबल प्लास्टिक लाइन वाले कप में कॉफी पीना सेहत के लिए हानिकारक है। एक कप कॉफी में 1000 से ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए जाते हैं। गर्मी की वजह से कप लाइनिंग से प्लास्टिक कणों का रिसाव बढ़ जाता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि ये पेपर कप है लेकिन इनके अंदर पॉलिथिन की पतली से लेयर होती है ताकि कॉफी या चाय का रिसाव न हो। Science of the Total Environment में बताया गया है कि प्लास्टिक के कप वाली कॉफी कितना खतरनाक है?

 

टी बैग

 

McGill University की रिसर्च के मुताबिक एक सिंगल प्लास्टिक टी बैग में 11.6 बिलियन माइक्रोप्लास्टिक्स और 3.1 बिलियन नैनोप्लास्टिक्स के कण पाए जाते हैं। इन टी बैग को बड़े पैमाने पर नायलॉन या पीईटी (पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट) से बनाया जाता है। 

 

वॉटर बोतल

 

प्लास्टिक की प्रति लीटर की बोतल में 240,000 से ज्यादा प्लास्टिक के कण होते हैं। शोध में बताया गया कि 90% से ज्यादा पॉपुलर पानी की बोतल में माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए जाते हैं। National Institute Of Health की 90% पानी की बोतल में नेनोप्लास्टिक के कण पाए जाते हैं जो आसानी से हमारे खून और अंगों में घुस सकते हैं।

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चिप्स

 

चिप्स की पैकिंग हमेशा प्लास्टिक की पनी में होती है। एक चिप्स के पैकेट में 126 से 196 माइक्रोप्लास्टिक के गुण होते हैं। चिप्स तो वैसे भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसमें रिफाइंड ऑयल और फूड प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है ताकि खाने पीने का सामान खराब न हो।

 

 

दवाएं

 

दवा में माइक्रोप्लास्टिक के कण सीधे तौर से नहीं पाए जाते हैं। स्टडी के मुताबिक गोलियां के पैकेट को बिस्फेनॉल ए जैसे रसायनों से बनाया जाता है जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

 

2022 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि इंसानों के खून में माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए है। ये कण शरीर के अंगों में अलग-अलग जाकर जमा हो रहे हैं और सूजन पैदा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि एक इंसान हर हफ्ते 5 ग्राम से ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है।