लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि जाति आधारित आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि कोई भी इसे खत्म नहीं कर सकता। उनका यह बयान उस समय आया है जब विपक्ष की ओर से आरोप लगया जा रहा है कि सत्ताधारी दल संविधान में बदलाव कर आरक्षण खत्म करना चाहता है।
एक राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर पत्रकारों से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे में राजनीति देखता है। उन्होंने कहा कि संघ, बीजेपी और उनकी पार्टी सभी एनडीए का हिस्सा हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी के कहने से आरक्षण खत्म किया जा सकता है? उन्होंने साफ कहा कि आरक्षण किसी को दी जाने वाली खैरात नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है।
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चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग आरक्षण की समीक्षा या सुधार के नाम पर इसे खत्म करने की बात करते हैं उन्हें शायद यह समझना चाहिए कि आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ होने वाले भेदभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में जाति के आधार पर भेदभाव की घटनाएं होती हैं। ऐसे में आरक्षण की जरूरत पर सवाल उठाना सही नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े हालिया विवाद का जिक्र करते हुए सवाल किया कि उनके मंच से जाने के बाद मंच को गंगाजल से साफ किया गया था। चिराग ने उन घटनाओं का भी जिक्र किया जहां दलित दूल्हों को बारात निकालने से रोका जाता है या बड़े नेताओं के दौरे के बाद मंदिर परिसर को गंगाजल से धोया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि छुआछूत आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
क्रीमी लेयर का भी किया विरोध
चिराग पासवान ने आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज अनुसूचित जाति के लोग एकजुट होकर अपनी बात रख पा रहे हैं लेकिन अगर उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर की चर्चा शुरू होती है तो उनकी एकजुटता कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि इससे आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने अनुसूचित जनजातियों के बारे में कहा कि इन समुदायों की अपनी अलग वेशभूषा, जीवनशैली और बोलियां हैं। वहीं पिछड़े वर्गों को अवसरों की कमी के कारण आरक्षण की व्यवस्था के जरिए मदद दी जाती है। चिराग पासवान ने मोदी सरकार की ओर से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच के आधार पर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जब तक वह रामविलास पासवान के बेटे के तौर पर सरकार का हिस्सा हैं तब तक इस व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं होने देंगे।
