दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को बॉयज पीजी हॉस्टल की बहुमंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दो लोगों की मौत हुई और पांच की हालत गंभीर है। छात्रों का कहना है कि इमारत की हालत ठीक नहीं थी। बेसमेंट में पानी भर जाता था। एक साल पहले तक इस पीजी हॉस्टल में रहने वाले 19 वर्षीय नितिन जमवाल ने बताया कि दीवारों पर दरारें आ चुकी थीं। यहां सब कुछ खराब था। बेसमेंट में पानी भर जाता था। खाना खराब था। हर मंजिल पर दो कमरे थे।

 

हादसे वाली जगह दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास है। इस पूरे क्षेत्र में हॉस्टल, होटल और अन्य दुकानें हैं। यही पर एक पांच मंजिला इमारत पर 'हॉस्टल डेज' नाम से पीजी चल रहा था। रविवार को अचानक ढहने से आसपास के घरों में रहने वाले लोग बाहर निकल आए, उन्हें लगा जैसे भूकंप आ गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में एक शख्स ने बताया, 'हमें अपने घर में हल्का झटका महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे जमीन हिल गई हो। भूकंप आ गया हो। हम बाहर भागे।'

 

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एक अन्य शख्स ने बताया कि ऊपरी मंजिल पर लगभग 34 से 40 छात्र रह रहे थे। हादसे के वक्त उनमें से कुछ सो रहे थे। व्यक्ति का दावा है कि बेसमेंट में काम चल रहा था और जैसे ही मैं बाहर आया हूं, वैसे ही पूरी इमारत ढह गई। एक और व्यक्ति का कहना है कि रविवार का दिन होने के कारण कई छात्र कॉलेज नहीं गए थे। वे पीजी में ही मौजूद थे।

 

पिछले दो दशक से इलाके में रहने वाली प्रियंका का कहना है कि यह पीजी लगभग 20 साल पुराना है। इतने वर्षों में यहां कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा। पूरा सत्य निकेतन पीजी से भर चुका है। सिर्फ 30 फीसद मकान मालिक ही यहां रहते हैं। एक अन्य शख्स ने बताया कि इमारत के गिरने से कुछ समय पहले ही उनका भाई बाइक से वहां से निकला था। वह हादसे में बाल-बाल बच गया।

 

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स्थानीय निवासी और दिल्ली पुलिस के साथ काम करने वाले राजेन छेत्री ने बताया कि यहां रहने वाले अधिकांश छात्र केरलम, हरियाणा और यूपी के हैं। वे मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। वे प्रति बेड लगभग 12,000 रुपये किराया देते हैं। बेसमेंट पर मरम्मत का काम चल रहा था। इमारत की नींव काफी कमजोर हो चुकी थी। इसमें लगभग 15 कमरे थे। हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे।