उत्तराखंड में इन दिनों एक बार फिर से अंकिता भंडारी हत्याकांड पर शोर मचा है। केस में कोई फैसला नहीं आया है, न ही जांच का कोई निष्कर्ष निकला है। केस में गाहे-बगाहे सामने आने वाले एक 'VIP' का नाम है, जिसकी वजह से राज्य में कांग्रेस समेत विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं और सत्तारूढ़ सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। राष्ट्रपति ने जिन 'दुष्यंत गौतम' को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया है, उन्हें लेकर उत्तराखंड की राजनीति सुलग पड़ी है। अंकिता भंडारी का परिवार दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गया है।
पुलिस अंकिता भंडारी के परिवार को समझाने की कोशिश कर रही है लेकिन परिवार मानने के लिए तैयार नहीं है। परिवार का कहना है कि यह बीजेपी अन्याय कर रही है। कैसे नरेंद्र मोदी सरकार, एक ऐसे शख्स को संवैधानिक संरक्षण दे सकती है, जिसकी भूमिका अंकिता भंडारी हत्याकांड में संदिग्ध है, जांच के घेरे में है। राहुल गांधी इंडिया गेट पर बैठे अंकिता भंडारी के परिवार से मुलाकात करने जा रहे हैं।
एंटी रेप एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ मांगा है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति से विनम्र निवेदन है कि अंकिता भंडारी मामले में CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनकी नियुक्ति रद्द की जाए। परिवार और उत्तराखंड की जनता निष्पक्ष व पूर्ण न्याय की प्रतीक्षा में है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक किसी भी प्रकार की ऐसी नियुक्ति न की जाए जो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। हम अपील करते हैं कि इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई की जाए।'
इंडिया गेट पर बैठे अंकिता भंडारी परिवार ने क्या कहा?
वीरेंद्र सिंह भंडारी, अंकिता भंडारी के पिता:-
दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए। मैं माननीय राष्ट्रपति से गुजारिश करता हूं कि जब तक CBI की जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत कुमार को गवर्नर न बनाया जाए।
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने मामले की सीबीआई जांच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ANI से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी केवल उन गवाहों के बयान दोहरा रही है, जो पहले ही निचली अदालत में दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े अहम लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के 18 व 19 सितंबर 2022 के कॉल डिटेल्स की गहनता से पड़ताल की जाए, जिससे उस दौरान संपर्क में रहे तथाकथित 'वीआईपी' का चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो सके।
अंकिता भंडारी की मां सोनी देवी:-
12 तारीख को जब हमने यह खबर सुनी कि उन्हें अब राज्यपाल नामित किया गया है तो हमें बहुत गहरा दुख हुआ। मैं राष्ट्रपति अपील करती हूं जो स्वयं एक महिला हैं और मेरी भावनाओं को भली-भाँति समझेंगी। जब तक इस व्यक्ति के खिलाफ सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन्हें राज्यपाल नियुक्त करने के कदम पर रोक लगाई जाए।
वीरेंद्र भंडारी ने मामले में बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की कि जब तक इस हत्याकांड की निष्पक्ष और पूरी सीबीआई जांच मुकम्मल नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम को किसी भी संवैधानिक पद पर नियुक्त न किया जाए। पीड़िता के पिता ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मामले की सच्चाई सामने आने से पहले केंद्र सरकार द्वारा उन्हें उच्च पद पर नियुक्त किए जाने के प्रयास न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें: अंकिता भंडारी केस: क्या है ऑडियो विवाद जिसमें गिरफ्तार हुए सुरेश राठौर?
गणेश गोदियाल, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष:-
बीजेपी के पूर्व प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त करना उत्तराखंड के स्वाभिमान और जनभावनाओं पर चोट है।
गणेश गोदियाल हमलावर क्यों हैं?
उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा, 'अंकिता भंडारी प्रकरण में भाजपा नेताओं द्वारा सामने लाए गए कथित VIP के नाम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, लेकिन जाँच एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी और उन्हें राज्यपाल बना दिया गया। मेरा सवाल है कि जब मामले में निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है, तो जांच के बजाय उन्हें इतने अहम पद पर नियुक्त क्यों किया गया?'
गणेश गोदियाल, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष:-
जब तक अंकिता भंडारी प्रकरण में निष्पक्ष जांच नहीं होती और कानून के तहत सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
दुष्यंत गौतम कौन हैं?
दुष्यंत गौतम BJP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हैं। वह पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं। वह दिल्ली नगर निगम में पार्षद और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। गौतम दलित नेता हैं। उन्होंने BJP में कई संगठनात्मक पदों पर काम किया है और अनुसूचित जाति समुदायों से जुड़ी पहलों से जुड़े रहे हैं। अब बीजेपी ने उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बना दिया है।
यह भी पढ़ें: हत्या के 4 साल, अब क्यों हो रही अंकिता भंडारी केस की CBI जांच? वजह समझिए
अंकिता भंडारी केस क्या है?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड में एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। वह 19 साल की थीं। सितंबर 2022 में उनका शव एक नहर से मिला था। आरोप था कि उन पर होटल के मेहमानों को सेक्सुअल फेवर देने का दबाव डाला जा रहा था। होटल पुलकित आर्य का था। वह BJP के एक पूर्व नेता का बेटा है।
'VIP' वाला एंगल क्या है?
जनवरी 2026 में अनजान 'VIP' के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद मामला फिर चर्चा में आया। वीआईपी की भूमिका को लेकर आरोप लगे और ऑडियो और वीडियो क्लिप वायरल हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद सीबीआई ने अपनी स्पेशल क्राइम ब्रांच के जरिए केस दर्ज किया। पीड़िता का परिवार कहता है कि दुष्यंत कुमार गौतम ही वह VIP हैं।
केस की जांच कहां तक पहुंची?
CBI ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इनमें SIT की रिपोर्ट, पुलिस की एफआईआर और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। एजेंसी से एफआईआर दर्ज कराने वाले डॉ अनिल प्रकाश जोशी का बयान दर्ज करने की भी उम्मीद है। यह सब वीआईपी एंगल की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड भर में हुए प्रदर्शनों के बाद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकिता गुप्ता को पहले ही उम्रकैद की सजा हो चुकी है।
यह भी पढ़ें: अंकिता भंडारी के समर्थन में धरना, दरांती लहराई, जेल गईं, कौन हैं ज्योति अधिकारी?
AAP ने क्या कहा है?
उमा सिसोदिया, AAP नेता:-
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाकर उसे संजीवनी दे कर उत्तराखंड की जनता के मुंह पर करारा तमाचा दिया है, यही है बीजेपी का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तिकरण? उत्तराखंड की अस्मिता और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को बुलंद करना हम सबकी जिम्मेदारी है। क्या हम लोकतांत्रिक तरीके से अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल कर जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं? अंकिता को न्याय दो, उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दो।
आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उमा सिसोदिया ने कहा, 'अंकिता भंडारी को न्याय दो। प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर उत्तराखंड की जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा? अंकिता भंडारी को आज तक पूर्ण न्याय क्यों नहीं मिला? कथित VIP का नाम सार्वजनिक करने और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर सरकार की जवाबदेही कब तय होगी?
दुष्यंत गौतम पर कांग्रेस ऐतराज की वजह समझिए
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून में एक घंटे का मौन उपवास रखा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल नियुक्त करने से गौतम को बचाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि राज्यपाल पर कोई केस नहीं चल सकता। गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता के माता-पिता ने जिस वीआईपी का नाम लिया था, उसे राज्यपाल बनाना उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई जांच में कोई प्रगति नहीं हुई और नामजद आरोपी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
कांग्रेस की राज्य प्रभारी कुमारी शैलजा ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता जिस व्यक्ति का नाम लेकर इंसाफ मांग रहे हैं, उसी को राज्यपाल बना दिया गया। शैलजा ने कहा कि सीबीआई को जल्दी जांच करनी चाहिए थी और नामजद आरोपी पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी।
BJP कैसे बचाव कर रही है?
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उत्तराखंड बीजेपी के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस के सांसद ए बिमोल अकोइजम का मामला उठाया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में उनकी जांच कर उन्हें निकाल दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने ही सांसद पर यौन उत्पीड़न के आरोपों पर चुप क्यों है। उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भी सवाल उठाए, जो महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं या पार्टी में महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करते हैं।
