नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। मंगलवार को ही एक दर्जन से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया था। उसी दिन शाम को कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। झारखंड के धनबाद जिले में गिरफ्तार हुए मिसिर बेसरा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था और वह कई दशकों से फरार चल रहा था। मिसिर बेसरा को ही भास्कर जी के नाम से भी जाना जाता है और कई नक्सली घटनाओं में वांटेड भी है। मिसिर बेसरा के साथ दो और नक्सलियों मोछू और सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास से कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं।

 

इसके बारे में धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया है, 'मिसिर बेसरा नाम के नक्सली पर 1 करोड़ का इनाम था। उसे धनबाद के बरवड्डा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी कल शाम को हुई।' रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ टेंपो से कहीं जा रहा है। झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और इंटेलिजेंस ब्यूरो की संयुक्त टीम ने मनियाडीह के पास मोर्चा लगाया और मिसिर बेसरा वहीं पकड़ा गया।   

 

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कौन है मिसिर बेसरा?

गिरीडीह के हरलाडीह का रहने वाला मिसिर बेसरा दशकों से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहा है। वह झारखंड के अलावा, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों में अहम भूमिका निभाता रहा है जिसके चलते वह मोस्ट वांडेट नक्सलियों की लिस्ट में शामिल है। उसके खिलाफ हत्या, सुरक्षाबलों पर हमला, जबरन वसूली और IED धमाकों के कई मामले अलग-अलग राज्यों में चल रहे हैं। कई सरकारों को मिलाकर उस पर 1 करोड़ का इनाम घोषित किया जा चुका है।

 

बताया जाता है कि पारसनाथ क्षेत्र के अलावा कोल्हान और सारंडा में भी उसका प्रभाव रहा है। इसके अलावा, कई राज्यों के बीच नक्सली नेटवर्क को बनाने और उसे संचालित करने में भी मिसिर बेसरी की अहम भूमिका रही है। अब सुरक्षाबलों का मानना है कि लगातार हो रहे सरेंडर से बीच मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से इस क्षेत्र को भी नक्सल मुक्त कराने में मदद मिलेगी।

 

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पुलिस की गिरफ्त से छुड़ा ले गए थे नक्सली      

साल 2007 में पहली बार गिरफ्तार किए गए मिसिर बेसरा को 2009 में नक्सलियों ने छुड़ा लिया था। खूंटी से गिरफ्तार हुए मिसिर बेसरा के लिए बिहार की लखीसराय कोर्ट पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था और उसे छुड़ा ले गए थे। इसके बाद वह कभी पुलिस या सुरक्षाबलों के हाथ नहीं आया और कई राज्यों में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा।