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उत्तराखंड में कांग्रेस आलाकमान के 'आंख-कान' रहे हरीश रावत ने इस्तीफा क्यों दिया?

हरीश रावत के प्राइवेट असिस्टेंट चंदन सिंह जीना के घर ईडी की रेड पड़ी थी। वह कांग्रेस में ही अलग-थलग पड़ गए थे। अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

Harish Rawat

1 सितंबर को नई दिल्ली में हरीश रावत और प्रियंका गांधी ने मुलाकात की थी। Photo Credit: ANI

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उत्तरखंड कांग्रेस मतलब हरीश रावत। दशकों तक, पहाड़ी राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे, हरीश रावत ही रहे। उन पर किस्मत भी खूब मेहरबान रही। एक-दो नहीं 3 बार वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे। वह राज्य कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन अब उन्होंने अचानक कांग्रेस से विदाई ले ली। राज्यव्यापी यात्रा के निकालने की योजना थी लेकिन 78 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि अब रज्य कांग्रेस की राजनीति से विदा लेने का समय है।

हरीश रावत ने शुक्रवार को कांग्रेस के दो पदों से इस्तीफा देने का एलान किया। उनके निजी सहायक  चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की थी। साल 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर अब रेड डाली गई है। इस्तीफे की कहानी, इससे कहीं ज्यादा अलग है। 

हरीश सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस:-
सामने टीवी पर खबर आ रही है कि देहरादून में हरीश रावत के पीए के पास भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी आदि पकड़ी गई या पकड़ाई गई, इस तथ्य का खुलासा तो आने वाले समय में होगा और यह सत्य है कि जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैं जितने भी पदों पर रहा, चाहे पार्टी में रहा या सरकार में रहा, वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। जीना एक निहायती सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति हैं। यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की और यदि इस तरीके की कोई भी गलती उन्होंने की है, उसके प्रमाण हैं तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं लज्जित हूं। परंतु मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।

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हरीश रावत ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया?

हरीश सिंह रावत ने खुद कहा है कि उत्तराखंड में चुनावी माहौल शुरू हो चुका है और उनके खिलाफ एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब भी लोग उनसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे तो वे मजाक में कहते थे कि चुनाव तभी घोषित होंगे जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। इस बार उनके घर की बजाय उनके एक साथी के घर दस्तक देकर नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।

 

संगठन स्तर पर उपेक्षा के बाद भी वह कांग्रेस के खिलाफ नहीं जा रह हैं। उनका साफ कहना है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है। राहुल गांधी भी 'छात्रों की गूंज' अभियान के जरिए शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे समय में अगर उनसे जुड़ी कोई कार्रवाई पार्टी की इस लड़ाई को कमजोर करती है तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे।

 

 

हरीश रावत ने कहा है कि पास कोई सरकारी पद नहीं है जिससे वह इस्तीफा दे सकें, इसलिए उन्होंने कांग्रेस के भीतर अपनी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति में स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। वह विनम्रतापूर्वक दोनों पदों से हटना चाहते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी की लड़ाई कमजोर पड़े।

इस्तीफे की दूसरी कहानी क्या है?

साल 2022 का विधानसभा चुनाव हरीश संह रावत को चेहरा बनाकर लड़ा गया था। चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अलाकमान ने करण माहरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बनाकर नई पीढ़ी को कमान सौंपने की कोशिश की। हरीश सिंह रावत की दखल कमजोर पड़ने लगी। मौजूदा अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ भी उनके रिश्ते ठीक नहीं रहे। गुटबाजी होती रही। वह चाहते थे कि नई पीढ़ी के नाम पर अब पार्टी की कमान उनके बेटे वीरेंद्र रावत को सौंपी जाए। 

 

हरीश रावत की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह से भी नहीं बनती है। हरीश रावत, रह-रहकर अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे। अब नए विवाद के बाद उन्होंने खुद कांग्रेस की कार्यकारी समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य और प्रदेश कार्यकारिणी के पदों से इस्तीफा दे दिया है।  

ईडी वाला एंगल क्या है?

ED के मुताबिक जीना के घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना, 13 सिक्के और 7 चेन, रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसो और कैसियो एडिफिस जैसे 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं। एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज कर दिए हैं और जांच के लिए उनका मोबाइल फोन भी जब्त किया है।

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क्या है पूरा मामला?

10 सितंबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) 2002 के तहत देहरादून में कई ठिकानों ED ने छापेमारी की। इसमें UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, OMR शीट की प्रोसेसिंग करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित बिचौलियों के घर शामिल थे। इसी क्रम में जीना के घर भी तलाशी ली गई।

 

एजेंसी के मुताबिक यह मामला उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो की चार अलग-अलग एफआईआर से जुड़ा है, जो 2016 में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर दर्ज की गई थीं। ED का आरोप है कि सुरक्षित रखी गई OMR उत्तर पुस्तिकाओं को आयोग के तत्कालीन सचिव के घर ले जाया गया, जहां कम भरे गए उत्तर पत्रकों के रोल नंबर नोट कर एक निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए गए। इन कर्मचारियों ने पैसे लेकर उत्तर पत्रकों के गोले गलत तरीके से भरे और फिर उन्हें दोबारा सील कर दिया गया।

चंदन सिंह जीना कौन हैं?

चंदन सिंह जीना फिलहाल हरीश रावत के निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे हैं। इससे पहले जब रावत 2014 से 2017 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे, तब जीना उनके विशेष ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर काम कर चुके हैं।

हरीश रावत ने क्या कहा है?

X पर एक लंबी पोस्ट में हरीश रावत ने जीना के साथ अपने जुड़ाव को स्वीकार किया लेकिन कहा कि उन्हें उन पर लगे आरोपों पर यकीन करना मुश्किल लग रहा है। उन्होंने कहा कि टीवी पर खबरें दिखाई जा रही हैं कि उनके पीए के देहरादून स्थित घर से भारी मात्रा में नकदी और गहने मिले हैं, लेकिन इसकी सच्चाई आने वाले दिनों में सामने आएगी।

 

हरीश रावत ने चंदन सिंह जीना को एक बेहद शालीन, विनम्र और मेहनती इंसान बताया। उन्होंने कहा कि अगर ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में चंदन जीना ने OMR शीट में छेड़छाड़ की है और इसका सबूत है तो उन्हें इस पर शर्म आएगी। उन्होंने कहा कि वह इस आरोप पर बिल्कुल भी यकीन नहीं करते।

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भर्ती घोटाले में जांच की वजह से इस्तीफा दिया?

रावत ने UKSSSC को लेकर भी सफाई दी और कहा कि यह आयोग उत्तराखंड के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 42,000 से ज्यादा सरकारी पद भरे गए थे और परीक्षाएं समय पर कराने के लिए लोक सेवा आयोग पर दबाव डाला गया था।

 

उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में उनसे कोई गलती हुई हो तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं। उन्होंने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि यह नियुक्ति उनकी पिछली सेवा के रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने कार्रवाई भी की थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) बीसी खंडूरी का भी जिक्र किया, जिन्होंने इस नियुक्ति को लेकर उन्हें सलाह दी थी।

 

हरीश रावत ने कहा कि अगर भर्ती और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से जुड़ी उनकी कोई गलती जान-बूझकर या अनजाने में हुई हो, तो वे इसके लिए सजा के हकदार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर उनके पास भर्ती प्रक्रिया में हरीश रावत की संलिप्तता का कोई सबूत है तो वे इसे CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंप सकते हैं।


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