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तलवारें लहराईं, पुलिस से भिड़े, उत्तराखंड सीमा पर निहंगों ने बवाल क्यों मचाया?

300 से ज्यादा निहंग सिख हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर पहुंच गए थे। वह अंदर जाना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें वहीं रोक दिया। पढ़ें रिपोर्ट।

Nihang Protest PTI Uttarakhand

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश बॉर्डर पर एकजुट निहंग सिख। Photo Credit: PTI

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उत्तराखंड में कर्ण प्रयाग प्रशासन और निहंग सिखों का टकराव बढ़ता जा रहा है। निहंगों का एक बड़ा जत्था कर्ण प्रयाग घेरने की तैयारी कर रहा है। शुक्रवार देर रात तक निहंग सिख और उत्तराखंड पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला है। निहंग संगठनों और जत्थेबंदियों का एक जत्था मोहाली स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदान से उत्तराखंड के देहरादून की ओर जा रहा था। लंबी बातचीत और टकराव के बाद उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर रोक दिया।

निहंग पक्ष के जत्थेदारों ने आला अधिकारियों से मुलाकात के बाद संतोष जताया था। इसके बावजूद, निहंगों का एक गुट उत्तराखंड में मार्च करने पर अड़ा हुआ है। कुछ निहंगों ने जमकर तोड़फोड़ मचाई है। तलवार लेकर बैरिकेडिंग पर भिड़ते, बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई है। काफी देर तक, हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर तनाव की स्थिति रही। प्रशासन ने जैसे-तैसे उन्हें मनाकर लौटने के लिए तैयार किया। 

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क्या हैं निहंगों की मांगे?

निहंग जसदीप सिंह इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी 3 मुख्य मांगें हैं। पहली, जिस पुलिस अधिकारी ने 'सिंहों' के खिलाफ केस दर्ज किया, उसने गलत किया। यह मामला, निहंगों ने नहीं शुरू क्या था। पहली मांग है कि जांच अधिकारी को नौकरी से निकाला जाए। दूसरी मांग है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तीसरी मांग है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने हमारे लोगों को कोर्ट के सामने पेश किया और बिना किसी केस के ही उन्हें पुलिस स्टेशन में रखा, उन्हें नौकरी से निकाला जाना चाहिए।'

जसदीप सिंह, निहंग:-
हमारी मांग है कि निहंगो से बदसलूकी करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए। हम यहां से तभी जाएंगे जब हमारे 4 'सिंह' हमारे साथ वापस जाएंगे। हमें रोका नहीं जाना चाहिए, हमें रुद्रप्रयाग जाने की इजाजत मिलनी चाहिए।

Nihang Sikh Protest PTI
उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर पर सिखों का प्रदर्शन। Photo Credit: PTI

 

कैसे लौटने के लिए राजी हुए निहंग?

निहंग सिखों और प्रशासन के बीच लंबी बातचीत हुई। गुरुवार को कई घंटों की बातचीत के बाद ज्यादातर निहंग सिख वापस लौट गए और देहरादून समेत आसपास के इलाकों में सामान्य स्थिति वापस आ गई। सैकड़ों निहंग सिख हिमाचल के पांवटा साहिब गुरुद्वारे से निकलकर कुल्हाल चेक पोस्ट पर जमा हुए थे। वे कर्णप्रयाग और नागरासू गुरुद्वारे के मुद्दे पर उत्तराखंड में मार्च करने आ रहे थे।

पुलिस ने रोकने के क्या इंतजाम किए थे?

जब निहंगों से बातचीत नाकाम रही तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। बॉर्डर पर बैरिकेडिंग की गई और सड़कें सील कर दी गईं। बातचीत के बाद रास्ता निकला। किसी तरह निहंग, छोटे समूहों में वापस हिमाचल लौटने के लिए तैयार हुए। कुछ निहंगों को देहरादून के गुरुद्वारा गोबिंद नगर रेसकोर्स में ठहराया गया, जहां प्रशासन से और बातचीत चल रही है।

 

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क्यों ऐसा टकराव हुआ है?

16 जून को कर्णप्रयाग में पार्किंग विवाद पर झड़प और नागरासू गुरुद्वारे में खाने-पीने को लेकर प्रशासनिक विवाद हुआ। दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इन्हें जोड़कर अफवाहें फैलाई गईं। पुलिस ने इन अफवाहों को खारिज किया है। अभी चार धाम और हेमकुंड साहिब यात्रा चल रही है, इसलिए प्रशासन सिख नेताओं से लगातार संपर्क बनाए हुए है। दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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