देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बिल्डिंग धराशायी हो गई। इस हादसे में अब तक कुल 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। अनुमान है कि कम से कम 20-25 लोग और फंसे हो सकते हैं। इस हादसे के लगभग 17 घंटे बाद भी मलबा हटाने और लोगों को तलाशने की कोशिशें जारी हैं क्योंकि आशंका है कि और भी लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। इस बीच दिल्ली नगर निगम के मेयर प्रवेश वाही ने एलान किया है कि उन सभी बिल्डिंग के अवैध निर्माणों को सील किया जाएगा जिनमें 4 मंजिल से ऊपर निर्माण किया गया है। कहा जा रहा है कि जो बिल्डिंग गिरी है उसे पहले सील किया गया था लेकिन उसे अवैध तरीके से खोलकर ना सिर्फ उसमें पीजी चलाया जा रहा था बल्कि उसके बेसमेंट में काम भी चल रहा था।
इस हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के कई मंत्री और अन्य नेता भी घटनास्थल पर पहुंचे। घटनास्थल के दौरे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उन अस्पतालों में भी गईं जहां घायलों को भर्ती कराया गया है। उन्होंने इस मामले की मैजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए हैं। विपक्षी आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाए हैं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मिलीभगत के चलते ही इस तरह की अवैध इमारतें चल रही हैं। इस हादसे के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली नगर निगम के दफ्तर में प्रदर्शन के बाद तोड़फोड़ भी की।
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AIIMS के ट्रॉमा सेंटर की ओर से जारी बयान के मुताबिक, हादसे में घायल हुए 10 लोगों को यहां लाया गया था। इसमें से 5 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी और एक मरीज गंभीर रूप से घायल था। इस शख्स की बाद में मौत हो गई। तीन लोगों का इलाज चल रहा है। इसमें से एक की सर्जरी कराई गई है। एक को मामूली चोट आई थी और उसे बाद में डिस्चार्ज कर दिया।
अवैध निर्माण सील करने का आदेश
दिल्ली नगर निगम के मेयर प्रवेश वाही ने X पर पोस्ट करके कहा है, 'दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। चार मंजिल से ज्यादा वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाएगा। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएंगे।' मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया, वहीं उनके कार्यालय ने बताया कि सरकार घायल छात्रों के परिवारों के संपर्क में है और उन्हें जरूरी मदद दे रही है।
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पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में बिल्डिंग के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और अन्य लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया, ‘यह इमारत पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। आरोप है कि मरम्मत का काम हो रहा था जिसके कारण इमारत ढह गई। आरोपित लोगों की तलाश के लिए कई टीम गठित की गई हैं।’ बता दें कि जब बचाव दल मलबे को हटाकर राहत और बचाव कार्य में जुटे थे तो स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी इस मुश्किल प्रयास में उनके साथ शामिल हो गए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीम और एक डॉग स्क्वाड मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश में शामिल रहे। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए। घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), दिल्ली नगर निगम, ‘कैट’ और नागरिक सुरक्षा की टीम घटनास्थल पर बचाव अभियान में जुटे रहे। मलबे में दबे कुछ छात्रों की दिल को दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं जिनमें वे मदद के लिए अपने मोबाइल से लोगों को फोन करते नजर आए।
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हादसे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से हालात की जानकारी ली। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ मिलकर तेजी से बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को हर जरूरी चिकित्सीय मदद दी जा रही है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।’
MCD ने क्या बताया?
MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही यह पांच मंजिला इमारत करीब 30 साल पुरानी थी। यह पुनर्वास कॉलोनी में 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी भूतल और चार मंजिला (जी प्लस 4) इमारत थी जबकि इसके निर्माण के लिए पहले केवल भूतल और एक मंजिल (जी प्लस 1) की अनुमति दी गई थी। एमसीडी ने पास की एक अन्य इमारत जिसका इस्तेमाल महिला पीजी के तौर पर किया जा रहा था, उसके किरायेदारों को बाहर निकालकर उसे सील कर दिया है। संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों वाले इस इलाके में कई छात्रावास और भोजनालय हैं।
बेहद पास-पास बनी इमारतों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के कारण अक्सर आने-जाने के लिए बहुत कम जगह बचती है। स्थानीय लोगों ने कहा कि इलाके में रहने वाले अधिकतर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और पास में स्थित कॉलेजों में पढ़ते हैं। स्थानीय निवासियों ने घनी आबादी वाले इस इलाके में इमारतों की हालत और उनके रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई मकानों को पेइंग गेस्ट (पीजी) में बदल दिया गया है।<
