भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार और सोशल मीडिया कंपनी Meta के बीच चल रही बातचीत में अब सहमति बन गई है। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, Meta कंपनी भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी सरकारी एजेंसियों को देने के लिए तैयार हो गई है। कंपनी अब ऐसे मामलों की रिपोर्ट सीधे इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के तहत आने वाले साइबरक्राइम पोर्टल तक पहुंचाएगी। अब सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेट सामने आने पर सिर्फ कंटेट हटाया नहीं जाएगा बल्कि उस पर कानून कार्रवाई के लिए संबंधित कानूनी एजेंसी को रिपोर्ट करेगी। 

 

बच्चों को यौन उत्पीड़न और शोषण से बचाने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है।  सरकार इसे बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने की दिशा में एक शुरुआती कदम मान रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि केवल इतना पर्याप्त नहीं है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अभी और प्रभावी कदम उठाने होंगे।

 

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला इस साल जुलाई महीने में शुरू हुआ था। एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में इंस्टाग्राम पर ऐसे एड चलाए जाने का खुलासा हुआ था जिसमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा दिया जा रहा था। रिपोर्ट में बताया गया था कि विज्ञापनों में बेहद विज्ञापनों में बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और इंस्टाग्राम पर एड देखने के बाद टेलीग्राम जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर जाने की सलाह देने के आरोप लगे थे। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। 

 

इस मामले में भारत में बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्था NCPCR ने मामले का खुद संज्ञान लिया। NCPCR ने 3 जुलाई को Meta से जवाब मांगा था और इसमें कंपनी की ओर से जवाब मांगा गया था। कंपनी से जवाब मिलने के बाद NCPCR ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी औपचारिक जांच शुरू कर दी। 

जांच में क्या हुआ?

जांच के तहत NCPCR ने Meta इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया हेड को 9 सितंबर को पेश होने के लिए बुलाया। इस मामले में जब Meta के अधिकारी सुनवाई के लिए पेश हुए तो उनसे यही सवाल किया गया कि इंस्टाग्राम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री या उसके प्रचार से जुड़े विज्ञापन कैसे दिखाई दिए और कंपनी के मौजूदा कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम इन्हें समय रहते रोक क्यों नहीं पाए। Meta के अधिकारियों के पास इसका संतोषजनक जवाब नहीं था और दुनिया के दूसरे देशों में भी Meta पर इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं। कई जांच रिपोर्ट्स में सामने आया है कि Meta के प्लेटफॉर्म्स पर कई बार बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एड (विज्ञापन) दिखाए गए थे। 

 

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Meta ने मानी सरकार की शर्त

भारत सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए Meta पर दबाव बढ़ाया। सरकार सिर्फ आपत्तिजनक कंटेट रोकने या हटाने तक ही सीमित नहीं रही बल्कि यह भी है कि जब किसी प्लेटफॉर्म को बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का पता चले तो उसकी जानकारी समय पर जांच एजेंसियों तक पहुंचे, ताकि अपराधियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके। 

 

अब Meta सरकार की इस मांग को मानने के लिए तैयार है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा कंपनी की प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि ऐसे क्राइम करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जा सके। Meta की ओर से अब I4C के साइबरक्राइम पोर्टल पर ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने की सहमति जताई गई है जिससे ऐसे मामलों में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी।