भारत इस साल 18 वें BRICS (ब्रिक्स) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी दिल्ली में पहुंचे हैं। इस दौरान उनकी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज मुलाकात हुई और द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात में पीएम मोदी ने उन्हें प्राचीन तमिल साहित्य के महान ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' की एक कॉपी भेंट की जिसका रूसी भाषा में अनुवाद किया गया था। तमिल भाषा का यह ग्रंथ 2000 साल पुराना है। अब यह ग्रंथ फिर से चर्चा में आ गया है।
तिरुक्कुरल को तमिल भाषा के सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय ग्रंथों में गिना जाता है। इसे तमिल संस्कृति में 'जीवन की आचार संहिता' माना जाता है। इसके रचयिता संत-कवि तिरुवल्लुवर माने जाते हैं। उनके जीवनकाल को लेकर इतिहासकारों और विद्वानों में मतभेद हैं, लेकिन तिरुक्कुरल की रचना को प्राचीन तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
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क्या बोले पीएम मोदी?
इस ग्रंथ को पुतिन को भेंट करते हुए पीएम मोदी ने इसकी खासियत भी बताई। उन्होंने कहा कि तिरुवल्लुवर ने इस किताब में मानव जीव की अनेक विशेषताओं के बारे में बताया है। पीएम ने कहा, 'इसी किताब का रूपी भाषा में ट्रांसलेशन हुआ है। मुझे विश्वास है कि यह किताब जन संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।'
जीवन को दिशा देता है यह ग्रंथ
तिरुक्कुरल ग्रंथ की सबसे बड़ी खासियत तो यही है कि इसमें सिर्फ 133 अध्याय हैं और 1330 कुरलों यानी दोहों में यह बंटे हुए हैं। हर एक अध्याय में 10 दोहें हैं लेकिन इस ग्रंथ में पूरे जीवन के बारे में दिशा देने का काम किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले अध्याय में नैतिक और सदाचारी जीवन, दूसरे हिस्से में समाज, राजनीति, शासन और आर्थिक जीवन और तीसरे हिस्से में प्रेम और मानवीय संबंध के बारे में बताया गया है। कुस मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह ग्रंथ जीवन का सार समेटे हुए हैं।
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कौन हैं इसके लेखक?
तिरुक्कुरल के रचियता तिरुवल्लुवर थे जिन्होंने प्राचीन तमिल परंपरा के महान कवि, दार्शनिक और नैतिक चिंतक माने जाते हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल को ही माना जाता है। उनके जीवन की ऐतिहासिक जानकारी बहुत कम और विवादित है। तिरुवल्लुवर को तमिल समाज में इतना सम्मान प्राप्त है कि चेन्नई के वल्लुवर कोट्टम जैसे स्मारक उनके नाम पर हैं और उनकी प्रतिमाएं तमिलनाडु में कई जगहों पर स्थापित हैं। कन्याकुमारी में तिरुवल्लुर की एक विशाल मूर्ति स्थापित है।
