वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को भारत के कम्युनिस्टों को 'कायर' करार दिया। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की उन्होंने आलोचना की और कहा कि UPI टैक्स ट्रांजेक्शन पर लगाए जा रहे कथित कर के खिलाफ उन्होंने देश में भ्रम फैलाया। राज्य सभा में 'द टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने यह बातें कहीं हैं।

उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि जॉन ब्रिटास आयकर (संशोधन) अध्यादेश को नामंजूर करने वाला प्रस्ताव पेश करने और अपने आरोप लगाने के बाद, जवाब सुने बिना सदन से बाहर चले गए। इस अध्यादेश को पांच जून, 2026 को जारी किया गया था।  

जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया था कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर UPI लेनदेन पर कर लगाने का फैसला किया है, ठीक वैसे ही जैसे ब्राजील पर दबाव डाला गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस दावे के खिलाफ है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत का डिजिटल भुगतान इको सिस्टम मुफ्त है। 

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सदन से बिना जवाब सुने गए थे बाहर 

उपसभापति हरिवंश ने हंगामे के बाद CPI(M) सदस्य को अपना प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दी थी और समय सीमा समाप्त होने के कारण जब पीठासीन अधिकारी की ओर से उनका भाषण बीच में रोक दिया गया तो वह सदन से बाहर चले गए थे। 

कम्युनिस्टों पर भड़कीं निर्मला सीतारमण 

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'जॉन ब्रिटास अगर एक लाइन सुनना चाहें तो यहां रह सकते हैं। ठेठ कम्युनिस्ट तरीका,'तथ्यों के बिना' हर किसी पर हमला करना, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और साथ ही अपने अधिकार की मांग करना कि 'मुझे बोलना ही है' और जब उन्हें एक-एक बिंदु पर जवाब दिए जाने हैं, तो उनमें साहस नहीं होता। कायर।' 

निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मत्री:-
इस देश में कम्युनिस्ट कायर हैं। सदस्य (जॉन ब्रिटास) ने यह साबित कर दिया है। वे तथ्यों का सामना नहीं कर सकते, बल्कि वे केवल बाधा डालते रहेंगे और शोर मचाते रहेंगे।

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'जवाब देना मेरा अधिकार, सुनना आपका'

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'क्या उनके पास सुनने का अधिकार नहीं है? जब जवाब दिया जाता है तो मेरा भी यह कहने का मन करता है कि जवाब देना मेरा अधिकार है।' वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह सभी सदस्यों की बात सुनती हैं और चर्चा में शामिल सभी सदस्यों को जवाब देने का प्रयास करती हैं। 

निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मत्री:-
माननीय जॉन ब्रिटास को जवाब सुनने के लिए यहां रुकना चाहिए था क्योंकि वह न केवल यहां बल्कि पूरे देश में भ्रम फैला रहे हैं, क्योंकि यही वह रणनीति है जिसे कम्युनिस्ट अपनाते हैं। पूरी तरह से असत्य।

जॉन ब्रिटॉस पर निर्मला सीतारमण भड़कीं क्यों?

जॉन ब्रिटास, सांसद, CPI (M):-
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया है कि आपको यूपीआई पर शुल्क वसूलने की जरूरत है। ब्राजील पर भी यही दबाव डाला गया था। अब सरकार की नीति को पूरी तरह से उलट दिया गया है और उन्होंने इस कानून में चतुराई से यूपीआई के घटक को शामिल कर लिया है।

 

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पहले अपना प्रस्ताव पेश करते हुए जॉन ब्रिटास ने कहा कि देश में विदेशी पूंजी आने की उम्मीद में अध्यादेश जारी किया गया और बाद में यह विधेयक लाया गया। इसी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐतराज जताया। (इनपुट: भाषा)