उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर वॉर तेज हो गया है। पीडीए की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी पर पिछड़े और दलित नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज के लोगों ने राजधानी के प्रमुख चौराहों और वीवीआईपी इलाकों में ‘बॉयकॉट अखिलेश यादव’ और ‘बॉयकॉट समाजवादी पार्टी’ के पोस्टर लगाए हैं। इन होर्डिंग में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव से सवाल किया गया है कि पीडीए की बात करने वाली पार्टी को इन नेताओं से नफरत क्यों है?
पोस्टरों में स्वामी प्रसाद मौर्य के कथित अपमान और समाजवादी पार्टी समर्थकों की सोशल मीडिया टिप्पणियों को भी मुद्दा बनाया गया है। विरोध करने वालों ने 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को राजनीतिक जवाब देने की हुंकार भरी है।
लखनऊ के 1090 चौराहे और वीवीआईपी क्षेत्रों में लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर पर लाल रंग का क्रॉस लगाया गया है। एक प्रमुख होर्डिंग पर लिखा है, ‘PDA बात करने वाली पार्टी-PDA के नेता श्री स्वामी प्रसाद मौर्य व श्री चंद्रशेखर आजाद से नफरत क्यों? इतना घमंड, इतना गुरूर चूर-चूर हो जाएगा।’
पोस्टर में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के बहिष्कार का संदेश दिया गया है। इसके नीचे निवेदक के तौर पर एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज का उल्लेख किया गया है। पोस्टर लगाने वालों का आरोप है कि समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर पिछड़ों और दलितों का समर्थन जुटाती है, लेकिन गैर-यादव पिछड़े नेताओं और दलित समाज के उभरते चेहरों को सम्मान देने में पीछे रहती है।
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सोशल मीडिया टिप्पणियां भी बनीं विरोध का मुद्दा
अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए एक अन्य विस्तृत बैनर में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और समर्थकों की सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट चस्पा किए गए हैं। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ कथित विवादित और अमर्यादित टिप्पणियों को दिखाया गया है। बैनर में लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुड्डू यादव हिरन्हा की पोस्ट के साथ विकास यादव और अन्य समाजवादी पार्टी समर्थकों की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।
पोस्टर पर आरोप लगाया गया है कि अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को नीचा दिखाया, जबकि उनके समर्थक सोशल मीडिया पर मौर्य समाज को अपमानित कर रहे हैं। इस बैनर के नीचे मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज का नाम निवेदक के रूप में लिखा गया है।
‘स्वामी प्रसाद मौर्य का अपमान नहीं सहेगा समाज’
राजधानी के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए दूसरे पोस्टरों में स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ लिखा गया है कि मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज स्वामी प्रसाद मौर्य का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। पोस्टर के जरिए पिछड़े वर्ग के नेताओं के सम्मान और समाजवादी पार्टी नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए गए हैं।विरोध करने वालों का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज उठाई, लेकिन समाजवादी पार्टी नेतृत्व और समर्थकों की ओर से उनकी उपेक्षा की जा रही है। इसी नाराजगी को पोस्टरों के जरिए सार्वजनिक किया गया है।
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2027 में ‘असली PDA’ के जवाब की चेतावनी
पोस्टर अभियान के जरिए समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले पर सीधे सवाल उठाए गए हैं। विरोध करने वालों ने संदेश दिया है कि पिछड़े वर्ग के नेताओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ का जवाब आगामी विधानसभा चुनाव में दिया जाएगा।लखनऊ में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के खिलाफ लगे इन पोस्टरों ने यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
एक तरफ समाजवादी पार्टी पीडीए को अपने राजनीतिक समीकरण का अहम आधार मानती है, वहीं दूसरी तरफ मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज के नाम से लगाए गए पोस्टरों में इसी पीडीए की राजनीति पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। 2027 के चुनाव से पहले यह पोस्टर अभियान समाजवादी पार्टी के पिछड़ा-दलित वोटबैंक के समीकरण के लिहाज से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
