कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा था कि इस बार वह राज्यसभा नहीं जाना चाहते। 79 साल के हो चुके दिग्विजय सिंह भले ही संसदीय राजनीति से बाहर हो गए हों लेकिन वह राजनीति से अलग नहीं हुए हैं। कभी मध्य प्रदेश में नर्मदा यात्रा करके कांग्रेस को मजबूत करने वाले दिग्विजय ने अब एक ऐसी यात्रा का एलान किया है जिसने हर किसी को चौंका दिया है। उनकी यह यात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन से उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी तक होने वाली है। इसका नाम सनातन स्वाभिमान यात्रा रखा गया है।
भले ही इस दिग्वजिय सिंह इसे गैर राजनीतिक यात्रा बता रहे हों लेकिन राम मंदिर के चंदा मामले पर कांग्रेस की सक्रियता से इसे जोड़कर ही देखा जा रहा है। संसद सत्र के दौरान कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली यूपी और केंद्र सरकार को जमकर घेरा था। रोचक बात है कि जब यह यात्रा शुरू हो रही होगी तब उत्तर प्रदेश के चुनाव भी शुरू होने वाले होंगे। दशहरा अक्तूबर के आखिर में है और अगर दिग्विजय सिंह पैदल ही चलते हैं तो यह यात्रा नवंबर के महीने में उत्तर प्रदेश पहुंच सकती है।
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बता दें कि इंदौर और उज्जैन के बीच की दूरी लगभग 833 किलोमीटर है। अगर पैदल ही उज्जैन से मध्य प्रदेश के शाजापुर, राजगढ़, बोपाल, विदिशा, गुना, अशोकनगर जैसे जिले आते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में चित्रकूट, बांदा, झांसी, महोबा, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या आते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के चुनाव के दौरान कई अहम जिले इस यात्रा के रास्ते में आ सकते हैं।
क्या है यात्रा का मकसद?
दिग्विजय सिंह का कहना है कि धर्म के नाम पर हो रही लूट, अयोध्या में चंदा/चढ़ावा चोरी और करोड़ों सनातनियों की आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ जनजागरण का संदेश लेकर वह 20 अक्तूबर यानी विजयादशमी के लिए उज्जैन से अयोध्या के लिए निकलेंगे। यह एक पदयात्रा होगी और इसके लिए एक गूगल फॉर्म भी जारी कर चुके हैं।
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इसमें लोगों से पूछा गया है कि क्या उन्होंने राम मंदिर के लिए चंदा दिया था? क्या लोगों को चंदा/चढ़ावा चोरी की जानकारी है और क्या वे जानते हैं कि इसमें कौन संलिप्त थे? इसी के साथ यह भी लिखा है कि यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को अपने रहने और खाने की व्यवस्था खुद ही करनी होगी।
दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
इसके बारे में दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो जारी करके कहा है, 'भगवान प्रभु राम हम लोगों की आस्था के केंद्र हैं। इसी प्रकार से उनके प्रति जो हमारी आस्था है, जो राम जन्मभूमि के मंदिर के निर्माण का आंदोलन शुरू हुआ, उसने एक आंदोलन का रूप लिया। मुझे याद है कि 1988-89 में राम शिला पूजन का अभियान विश्व हिंदू परिषद ने शुरू किया। वैचारिक रूप से मैं VHP और RSS का विरोधी हूं लेकिन जब भगवान श्रीराम का विचार सामने आ गया तो मैं भी उसका एक अंग बना और राम शिला पूजन में भी मैंने दान दिया था। जिस प्रकार से उसके बाद VHP, संघ और बीजेपी ने चंजे का दुरुपयोग किया और लूट मचाई, मैं उससे बहुत दुखी हूं। जिनसे भी मैं मिलता हूं, वे भी इससे सहमत होते हैं। आखिर ऐसा क्यों किया?'
उन्होंने आगे कहा, 'इन लोगों ने चढ़ोत्तरी में लूट की। गाड़ियां खरीद ली, मकान बना लिए। सैकड़ों-करोड़ों का आपने घपला किया। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। इन सब को लेकर ही हमने तय किया है कि 20 अक्तूबर को दशहरा के मौके पर हम पदयात्रा शुरू करेंगे। जिस तरह से हम अधर्म पर धर्म की विजय के मौके पर दशहरा मनाते हैं, उसी तर्ज पर मैंने सनातन स्वाभिमान यात्रा करने की तय किया है। यह यात्रा शिवधाम से रामधाम तक होगी। यह पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। यह किसी के विरोध में नहीं है लेकिन उन लोगों के सामने मैं एक आईना रखना चाहता हूं जो हमारे चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग करते हैं।'
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दिग्विजय सिंह ने चंपत राय का जिक्र करते हुए कहा, 'दुख होता है कि जो ट्रस्ट बनाया गया, उसमें वे लोग भी शामिल हो गए। चंपत राय को बचाने के लिए पूरी सरकार लगी हुई है। इसलिए आपसे मेरी प्रार्थना है कि अगर आप इस लूट के खिलाफ लड़ाई लड़ना चाहते हैं तो हमारी इस सनातन स्वाभिमान यात्रा में शामिल होइए। आप सादर आमंत्रित हैं।'
नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा
इससे पहले साल 2017 में दिग्वजिय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा शुरू की थी। नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से 30 सितंबर 2017 को शुरू हुई यह यात्रा अप्रैल 2018 में कुल 192 दिन बाद पूरी हुई थी। इसके तुरंत बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी और दिग्विजय सिंह के समर्थन से कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे। हालांकि, बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया कि बगावत के चलते यह सरकार सिर्फ 14 महीनों में ही गिर गई और बीजेपी की वापसी हो गई।
