तेलंगाना में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए एक व्यक्ति की कहानी हैरान करने वाली है। 30 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया सैंडेला वीरन्ना वापस जेल नहीं लौटा। इसके बाद करीब चार दशक तक वह सामान्य जिंदगी जीता रहा। इस दौरान उसने सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की और 2004 में उसे सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार भी मिला। अब तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया है।

 

वीरन्ना को 1970 के दशक के आखिर में हुई हत्या के मामले में 1983 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सजा के करीब छह महीने बाद उसे पैरोल मिली थी। इसके बाद उसने जेल में सरेंडर नहीं किया। मई 2024 में तेलंगाना जेल विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस की मदद से उसे खोज निकाला और चेरलापल्ली सेंट्रल जेल में दाखिल कराया।

 

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फरार रहते सरकारी नौकरी हासिल की

पैरोल से फरार होने के बाद वीरन्ना महबूबाबाद जिले के डंथालापल्ली में रहने लगा। उसने अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और सजा की जानकारी छिपाकर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। नौकरी के दौरान उसके काम की सराहना भी हुई और 2004 में उसे सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार मिला। वह 2013 में सरकारी सेवा से रिटायर हुआ।

 

हाई कोर्ट की जस्टिस टी माधवी देवी ने वीरन्ना के आचरण पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि और सजा छिपाकर सरकारी नौकरी हासिल करना गंभीर मामला है। अदालत के अनुसार, उसकी सरकारी सेवा से संकेत मिलता है कि उसने नौकरी धोखे से हासिल की थी।

 

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पत्नी ने मेडिकल आधार पर मांगी थी रिहाई

वीरन्ना की पत्नी सैंडेला चरम्मा ने उसकी रिहाई के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि वीरन्ना लंबे समय से जेल में है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है। उसे विशेषज्ञ इलाज की जरूरत है। पत्नी ने यह भी बताया कि उनका बेटा ब्रिटेन में रहता है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चेरलापल्ली जेल में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर कैदियों को विशेषज्ञ उपचार भी दिया जाता है।

कोर्ट ने जेल प्रशासन को भी फटकारा

हाई कोर्ट ने वीरन्ना की रिहाई की मांग खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उसने पैरोल खत्म होने के बाद जानबूझकर जेल में वापसी नहीं की थी। कोर्ट ने यह भी माना कि उसे पैरोल उल्लंघन पर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था।

 

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हालांकि, अदालत ने वीरन्ना को करीब 40 साल तक पकड़ नहीं पाने के लिए जेल प्रशासन को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने अधिकारियों को पैरोल पर छोड़े गए कैदियों की निगरानी के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने का आदेश दिया। साथ ही ऐसे कैदियों पर नजर रखने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने को कहा।