बिहार के बेतिया में जमीन की जमाबंदी के फ्रॉड मामले में मंडल कमिश्नर गिरिवर दयाल सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है। कमिश्नर ने पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी (DM) को दोषी पर FIR कराने का आदेश दिया है। साथ ही उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। मंडल कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। इसके अलावा, डीएम, अपर समाहर्ता और अंचल अधिकारी को 21 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट के साथ कमिश्नर के कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। उन्हें यह बताना होगा कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव का आदेश किसने दिया और इसमें किन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका थी। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

 

मामला बेतिया अंचल के पूर्वी कर्गहिया मौजा का है। यहां जमाबंदी संख्या 105 के तहत दर्ज 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन का रकबा कथित तौर पर गलत तरीके से शून्य कर दिया गया। आरोप है कि करीब 50 साल से अधिक समय से परिवादी के पिता के नाम पर चल रही जमाबंदी को हटाकर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया। इस जमीन का लगान भी लगातार जमा किया जा रहा था।

बिना आदेश के बदल दी गई जमाबंदी

मामले में उच्च न्यायालय का आदेश था कि लंबी समय से चली आ रही जमाबंदी को सक्षम न्यायालय के आदेश के ना तो निरस्त किया जाना है ना ही छेड़छाड़ करना है। लेकिन बेतिया अंचल में इस आदेश की खुलेआम अवहेलना की गई। बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के 50 साल पुरानी जमाबंदी को शून्य कर दिया गया। प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि, 'बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के जमाबंदी को शून्य कर दूसरे असंबद्ध व्यक्ति के नाम दर्ज करना प्रथम दृष्टया लाभ से प्रेरित होकर किया गया कृत्य प्रतीत होता है, जो क्रिमिनल एक्ट के तहत आता है। इसमें शीघ्र संशोधन किया जाए। यह सामान्य गलती नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत किया गया फ्रॉड है।'

 

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21 अक्टूबर को रिपोर्ट के साथ बुलाए गए अधिकारी

कमिश्नर ने जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और बेतिया के अंचल अधिकारी को 21 अक्टूबर को सभी तथ्यों के साथ आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारियों को 21 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराना होगा। वहीं, दोपहर 3 बजे जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और अंचल अधिकारी को आयुक्त कार्यालय में रिपोर्ट के साथ उपस्थित होना है। अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि जमाबंदी में बदलाव का आदेश किसने दिया, इसके पीछे क्या आधार था और ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में छेड़छाड़ कैसे हुई। यदि किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

 

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राजस्व अधिकारियों को सख्त चेतावनी

इस मामले के बाद राजस्व विभाग में हलचल मच गई है। आयुक्त ने मंडल के सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा नियमों के अनुसार करें। उन्होंने साफ कहा कि, 'राजस्व मामलों में लापरवाही, अनियमितता या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी मामले में गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।'