धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में सनातन हिंदू एकता यात्रा की थी। यात्रा खत्म होने पर धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ खास बातें बताईं। उन्होंने कहा कि हिंदू महिलाएं बुर्केधारी न बन जाएं, बल्कि दुर्गा और मां काली की तरह सशक्त बनें। इसीलिए यह यात्रा आयोजित की गई थी। इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह बुंदेलखंड को नशामुक्त बनाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने यह सनातन एकता यात्रा की थी। इन दिनों चल रहे गरबा पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि गरबा पंडाल में एंट्री से पहले गोमूत्र पिलाना चाहिए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बुंदेलखंड के पांच जिलों में रथ यात्रा की थी, जो लगभग 500 किलोमीटर लंबी थी। इस यात्रा के बाद धीरेंद्र छतरपुर के बागेश्वर धाम आए, जहां उन्होंने यात्रा का उद्देश्य बताया। धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बातों के जरिए संदेश दिया कि हिंदू महिलाओं को धर्म परिवर्तन से बचाना चाहिए। इसके बजाय महिलाओं को सशक्त बनना चाहिए।
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रथ यात्रा का उद्देश्य बताया
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, सनातन एकता यात्रा इसलिए की, ताकि हमारी बहन-बेटियां बुर्के वाली न बन जाएं। वे आईपीएस, आईएएस और दुर्गा या मां काली जैसी बन जाएं। इसलिए यात्रा की थी। हमारी यात्रा का यही कारण था कि हिंदू एक हो जाएं, ताकि नशामुक्त बुंदेलखंड बन जाए।
इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'हमने यात्रा करने से पहले सोचा कि देश को बाद में जगाएं, पहले घर तो जगाएं। हम साधु आदमी हैं, हम तो सीधी बात कहेंगे। अगर आप जाग जाओ तो आपके लिए अच्छा है।' इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने यात्रा में शामिल हुए लोगों का आभार जताया।
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पहले भी दी थी नसीहत
इससे पहले भी धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू महिलाओं को बुर्के वाली न बनने की नसीहत दी थी। धीरेंद्र ने कहा था कि दुर्गा बनना, काली बनना लेकिन कभी बुर्के वाली न बनना। साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि नवरात्र के दौरान गरबा पंडाल में गोमूत्र पिलाकर लोगों को एंट्री दी जाए, ताकि अराजक तत्व पंडाल में न आ पाएं।
वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'अभी नवरात्र चल रहे हैं, तो विरोधी पंडाल में नाम बदलकर आएंगे। तो हम कहेंगे कि गरबा पंडाल में एंट्री देने से पहले गोमूत्र पिलाएं। कम से कम उन लोगों की घर वापसी हो जाएगी।'
