इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बलरामपुर के पूर्व सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ गैंगस्टर ऐक्ट के तहत दाखिल चार्जशीट और समन आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि पुलिस और प्रशासन ने गैंगस्टर ऐक्ट लगाने से पहले कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होना मात्र गैंगस्टर ऐक्ट लगाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित अन्य आवश्यक शर्तों का पालन किया जाना भी जरूरी है।
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पुलिस की कार्रवाई में मिला विरोधाभास
मामला बलरामपुर जिले के तुलसीपुर थाने में दर्ज गैंगस्टर ऐक्ट के मुकदमे से जुड़ा है। पुलिस ने रमीज नेमत को कथित गिरोह का सरगना और पूर्व सांसद रिजवान जहीर को गिरोह का सदस्य दर्शाया था। गैंग चार्ट में दो आपराधिक मुकदमों को आधार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई में गंभीर विरोधाभास पाया। न्यायालय के अनुसार, जिस थाना प्रभारी ने 7 जुलाई 2024 को गैंग चार्ट तैयार किया था, उसी अधिकारी ने बाद में दर्ज एफआईआर में उल्लेख किया कि उसे 20 जुलाई 2024 को गश्त के दौरान गिरोह की जानकारी मिली। अदालत ने इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटि माना।
तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं रिजवान
रिजवान जहीर बलरामपुर की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद 1993 में समाजवादी पार्टी और 1996 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए।
वर्ष 1998 और 1999 में वह लगातार दो बार लोकसभा सदस्य भी चुने गए। क्षेत्रीय राजनीति में उनका लंबे समय तक प्रभाव रहा है।
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हत्या की साजिश के मामले में भी रह चुके हैं आरोपी
पूर्व सांसद रिजवान जहीर पर स्थानीय नेता फिरोज अहमद की हत्या की साजिश रचने का आरोप भी लगा था। इस मामले में उनकी बेटी और दामाद को भी आरोपी बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रिजवान जहीर को करीब चार वर्ष जेल में रहना पड़ा था।
हालांकि, बाद में एमपी-एमएलए अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में रिजवान जहीर समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
2021 में सपा में हुई थी वापसी
लंबे राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद रिजवान जहीर ने वर्ष 2021 में समाजवादी पार्टी में वापसी की थी। इसके बाद से वह फिर सक्रिय राजनीति में भूमिका निभा रहे हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले को पूर्व सांसद और उनके समर्थकों के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। वहीं यह निर्णय गैंगस्टर ऐक्ट के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण
