हिमाचल प्रदेश की राजनीति में करीब एक दशक पुरानी चार्जशीट एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस चार्जशीट में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और नेताओं पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। अब इनमें से कुछ नेता कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जा चुके हैं जिसके बाद इस पुराने मामले को लेकर सियासत फिर गरमा गई है।

 

मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। बीजेपी में शामिल हो चुके सुधीर शर्मा और दूसरे नेताओं ने पुराने आरोपों पर सवाल उठाए हैं, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि ये आरोप बीजेपी के शासनकाल से पहले लगाए गए थे।

 

चार्जशीट में जिन नेताओं के नाम या उनके कार्यकाल से जुड़े आरोप चर्चा में थे, उनमें से कुछ नेता अब कांग्रेस में नहीं हैं। सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, अनिल शर्मा और हर्ष महाजन जैसे नेता अलग-अलग समय पर कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इसी वजह से पुरानी चार्जशीट अब हिमाचल की मौजूदा राजनीति में नए संदर्भ के साथ चर्चा में है। हालांकि यह साफ करना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी को दोषी साबित नहीं करते। राजनीतिक आरोपों और जांच या अदालत में साबित हुए अपराध के बीच अंतर होता है।

 

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सुधीर शर्मा ने उठाया बड़ा सवाल

मौजूदा विवाद पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने पलटवार किया है। उनका कहना है कि यह मामला उस समय का है जब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और वह स्वयं सरकार में मंत्री थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन आरोपों के जरिए तत्कालीन पूरी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

 

सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मौजूदा मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए पुराने मामलों को राजनीतिक तरीके से उछाला जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा। उनका कहना है कि ये आरोप वर्ष 2017 में भाजपा के शासनकाल से पहले लगाए गए थे और इन्हें उन्होंने नहीं लगाया था। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र लाने की बात भी कही है।

 

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हिमाचल की राजनीति में अब आरोपों से ज्यादा उनके राजनीतिक इस्तेमाल की चर्चा हो रही है। एक तरफ कांग्रेस पुरानी बीजेपी की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को सामने रखकर बीजेपी में गए नेताओं को घेर रही है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ नई चार्जशीट तैयार करने की बात कह रही है। बीजेपी ने जुलाई 2026 में कांग्रेस सरकार के करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल को लेकर एक बड़ी चार्जशीट तैयार करने की घोषणा की थी।

 

यानी हिमाचल की राजनीति में चार्जशीट अब सिर्फ आरोपों का दस्तावेज नहीं रह गई है बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। पुरानी फाइलें फिर खोली जा रही हैं और दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हिमाचल की राजनीति में चार्जशीट बनाम चार्जशीट की लड़ाई और तेज हो सकती है।