हिमाचल प्रदेश की राजनिति में स्थानीय निकाय चुनावों के बाद से एक राजपरिवार का नाम सुर्खियों में है। सुर्खियों में रहने की वजह राजपरिवार के वारिस की सियासी एंट्री है। जिला परिषद के चुनाव में चमियाना वार्ड से क्योंथल रियासत के राजा खुश विक्रम सेन ने शानदार जीत दर्ज कर सियासत में एंट्री मारी है। उन्होंने कांग्रेस नेता और कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के करीबी को चुनाव हराया है। उन्होंने भूपेंद्र कंवर को 1981 वोटों के भारी अंतर से हराया है।
कांग्रेस पार्टी के लिए इस जीत को एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि यह वार्ड कांग्रेस पार्टी का मजबूत किला रहा है। सुक्खू सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह इसी वार्ड से संबंध रखते हैं। उन्होंने अपना पहला जिला परिषद चुनाव जीतकर इसी वार्ड से सियासी सफर शुरू किया था।
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शिमला ग्रामीण में कांग्रेस को झटका
भारतीय जनता पार्टी ने क्योंथल रियासत से जुड़े युवा चेहरे कुशल सेन का जिला परिषद उम्मीदवार बनाकर अब साफ कर दिया है कि पार्टी शिमला ग्रामीण और कुसुम्पटी क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण तैयार करेगी। पार्टी युवावों को लुभाने के लिए इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव रखने वाले क्योंथल रियासत के उत्तराधिकारि पर दांव लगा रही है। इसका असर आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है।
क्योंथल रियासत का इतिहास
क्योंथल रियासत की स्थापना 13वीं शताब्दी में कोट कहलूर यानी आज का बिलासपुर के गिर सेन ने की थी। वह चंद्रवंशी राजपूत वंश से संबंध रखते थे। शुरुआत में क्योंथल की राजधानी जुन्गा थी और 18वीं शताब्दी की शुरुआत में आधुनिक शिमला शहर का अधिकांश हिस्सा क्योंथल रियासत के तहत ही था। 1803-1815 तक नेपाल के गोरखाओं ने क्योंथल पर कब्जा कर लिया। 1815 में गोरखा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने क्योंथल को गोरखाओं से मुक्त कराया और उनके राज्य को उन्हें वापस कर दिया।
अंग्रेजों ने शिमला में अपना ठिकाना बनाने के लिए क्योंथल के राजा राणा संसार सेन से 12 गांव लिए। इन्हीं 12 गांव में आज का मुख्य शिमला शहर बसाया गया है। 15 अप्रैल, 1948 को क्योंथल रियासत का भारत के हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया। इस रियासत का इतिहास काफी पुराना है और कहा जा सकता है कि यह रियासत एक समय पर शिमला पर राज करती थी।
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मां भी लड़ चुकी हैं चुनाव
खुश विक्रम सेन क्योंथल रियासत के उत्तराधिकारी हैं। उनकी उम्र अभी सिर्फ 29 साल है और वह दिवंगत वीर विक्रम सेन के बेटे हैं। कुछ साल पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी मां विजय ज्योति लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रही हैं और उन्होंने कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था। अब इस परिवार से एक युवा चेहरे की सियासी एंट्री ने शिमला के राजनीतिक हल्कों में चर्चा शुरू कर दी है।
विक्रमादित्य सिंह से कैसे जुड़ा नाम?
क्योंथल रियासत के उत्तराधिकारी खुश विक्रम सेन कांग्रेस के दिग्गज नेता और रामपुर रियासत के राजा विक्रमादित्य सिंह के ममेरे भाई है। विक्रमादित्य सिंह मौजूदा समय में लोक निर्माण मंत्रीहैं और अब खुश विक्रम सेन की सियासी एंट्री उनके भाई विक्रमादित्य सिंह को भी परेशान कर सकती है।
