झारखंड के पलामू जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां छुट्टी न मिलने की वजह से एक सरकारी टीचर के गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। छुट्टी न मिलने की वजह से प्रसव के अंतिम महीने तक महिला को रोजाना करीब 35 किलोमीटर का सफर तय करके स्कूल जाना पड़ा। बीते शनिवार को स्कूल में ही लेबर पेन शुरू हो गया है, जिसके बाद आनन-फानन में महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई।  

 

शिक्षिका भारती पांडेय लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के राजेगाड़ी जगतपुरवा की रहने वाली हैं। वह तरहसी के सिलदीलिया प्लस टू विद्यालय की शिक्षिका हैं। टीचर के पति मुकेश कुमार तिवारी ने इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने DEO पर छुट्टी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। 

 

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DEO पर 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप 

मुकेश कुमार तिवारी का आरोप है कि उनकी पत्नी की डिलीवरी का अंतिम महीना चल रहा था। उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन भी किया था लेकिन छुट्टी नहीं मिली। छुट्टी देने के बदले डीईओ ने 50 हजार रुपए रिश्वत की मांग की, उन्होंने इसके लिए 25 हजार रुपये देने की बात भी कही। इसके बावजूद छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 5 दिन पहले डीसी ने शिक्षा विभाग को छुट्टी देने का निर्देश भी दिया। इस आदेश का भी पालन नहीं किया गया। 

 

मुकेश कुमार ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हो गई है, पत्नी अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रही है। इसके अलावा उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक और दो क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मेदिनीनगर टाउन थाना में आवेदन दिया है। 

DEO ने क्या कहा?

DEO ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, 'शिक्षिका ने जो आवेदन दिया था, उसमें मातृत्व अवकाश का जिक्र नहीं है। आवेदन में चाइल्ड केयर की छुट्टी की मांगी गई थी। आमतौर पर यह छुट्टी बच्चों के किसी परीक्षा या मेडिकल जरूरत पर मिलती है।' DEO ने बताया कि इस आवेदन में गर्भवती होने का जिक्र नहीं है।   

 

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बाबूलाल मरांडी ने की है निष्पक्ष जांच की मांग

इस मामले में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर घटना को बेहद गंभीर और अमानवीय बताया। उन्होंने लिखा कि अगर मातृत्व अवकाश के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सही हैं तो यह सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।  

इस मामले को लेकर उन्होंने पलामू के उपायुक्त और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।