उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज में आकाशीय बिजली ने एक ही परिवार की खुशियां छीन लीं। सहावर थाना क्षेत्र के नगला माधो गांव में बारिश से बचने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हुए तीन लोगों पर अचानक बिजली गिर गई। हादसे में देवर, भाभी और 11 साल की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। तीनों एक ही परिवार के सदस्य थे। घटना की खबर मिलते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

यह दर्दनाक हादसा गुरुवार दोपहर का है। नगला माधो गांव निवासी नीरज (35), रामवती (36) और रामवती की 11 वर्षीय बेटी कशिश गांव से करीब 100 मीटर दूर खेत में गए थे। खेत में मक्का की फसल सुखाने के लिए डाली गई थी। मौसम साफ रहने के बाद अचानक आसमान में बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई।बारिश से फसल को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए नीरज अपनी भाभी रामवती के साथ खेत में मक्का पर तिरपाल डालने पहुंचे थे। कशिश भी अपनी मां और चाचा के साथ चली गई थी। तीनों फसल को बारिश से बचाने में जुटे थे। इसी बीच मौसम ने अचानक करवट ली और तेज बारिश होने लगी।

पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हुए, तभी गिरी बिजली

बारिश से बचने के लिए तीनों पास में मौजूद पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और तीनों उसकी चपेट में आ गए। बिजली गिरने से नीरज, रामवती और कशिश गंभीर रूप से झुलस गए।अचानक हुए इस हादसे से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे। तीनों को बचाने की कोशिश की गई और घटना की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद परिजन और ग्रामीण उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

 

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देवर, भाभी और मासूम की मौत से गांव में मातम

मृतकों की पहचान नीरज, रामवती और उनकी बेटी कशिश के रूप में हुई है। नीरज रिश्ते में रामवती के देवर थे। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। जिस घर में कुछ समय पहले तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है।हादसे की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार जिला अस्पताल पहुंचे। मां-बेटी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं, परिवार के एक और सदस्य नीरज की मौत ने इस त्रासदी को और गहरा कर दिया। 11 साल की कशिश की जिंदगी इस हादसे में खत्म हो जाने से गांव के लोग भी गमगीन हैं।

 

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ित परिवार से जानकारी जुटाई। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को राहत देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। उपजिलाधिकारी सहावर हर्षिता देवड़ा के मुताबिक, दैवीय आपदा कोष से मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राजस्व टीम को घटना से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।इस तरह हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोगों के परिजनों को कुल 12 लाख रुपये की सहायता दिए जाने की घोषणा की गई है। यह राशि नियमानुसार मृतकों के आश्रितों को उपलब्ध कराई जाएगी।

 

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आकाशीय बिजली से बचाव के लिए बरतें सावधानी

कासगंज की यह घटना बताती है कि बारिश और गरज-चमक के दौरान खुले खेतों में काम करना कितना खतरनाक हो सकता है। मौसम अचानक बदलने पर खेतों में काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की जरूरत होती है।आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। खुले मैदान, खेत और पानी के आसपास रुकना भी जोखिम भरा हो सकता है। मौसम खराब होने पर सुरक्षित पक्के भवन में शरण लेना बेहतर है।