हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) शिमला के विद्यार्थियों को अब बेहतर बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित कैंपस उपलब्ध कराने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के मौजूदा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रावास, बिजली, पेयजल और सीवरेज जैसी लंबित समस्याओं के समाधान का फैसला लिया है।

 

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार देर शाम एनएलयू से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी है। सरकार विश्वविद्यालय के विस्तार और सुविधाओं को सुदृढ़ करने में हरसंभव सहयोग करेगी। साथ ही उन्होंने एनएलयू प्रबंधन को अपने स्तर पर भी संसाधन जुटाने पर जोर दिया।

छात्राओं के हॉस्टल की सुरक्षा होगी पुख्ता

मुख्यमंत्री ने छात्राओं और छात्रों के लिए नए छात्रावासों के निर्माण में सहयोग का आश्वासन दिया। छात्राओं के हॉस्टल की सीमा के साथ कंटीले तारों की सुरक्षा बाड़ लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य परिसर में छात्राओं की सुरक्षा को और मजबूत करना है।

 

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एनएलयू परिसर में बिजली व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर भी सरकार ने गंभीरता दिखाई। मुख्यमंत्री ने कम वोल्टेज की समस्या दूर करने के लिए नया ट्रांसफार्मर लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा हॉस्टल के ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन (HT) लाइन को स्थानांतरित किया जाएगा।

 

विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए परिसर के भीतर गुजर रही ओवरहेड बिजली तारों को भी भूमिगत करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया।

पेयजल संकट और सीवरेज का भी होगा समाधान

विश्वविद्यालय में पेयजल की कमी की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाएगी। वहीं, जल शक्ति विभाग को परिसर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए उपयुक्त स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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NLU शिमला की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए विशेष ध्यान देने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। बैठक में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव शिक्षा राकेश कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।