पंजाब के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कंपनी कॉर्डलाइफ साइंसेज इंडिया को बड़ी राहत देने के बजाय कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को एक दंपती को 2.16 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला नवजात बच्चे के अम्बिलिकल कॉर्ड ब्लड के सैंपल (गर्भनाल वाले खून) को भुगतान में देरी का हवाला देकर नष्ट करने से जुड़ा है।

 

आयोग ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने दंपती को बकाया रकम चुकाने का सही मौका दिए बिना ही उनका सैंपल नष्ट कर दिया जबकि दंपती ने कभी भी पैसे देने से मना नहीं किया था। आयोग ने इसे कंपनी की लापरवाही और गलत कारोबारी तरीका माना। साथ ही, कहा कि कंपनी का यह रवैया उपभोक्ताओं के अधिकारों के खिलाफ है।

 

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कब हुआ था कॉर्ड ब्लड सुरक्षित रखने का समझौता?

आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, दंपती ने गर्भावस्था के दौरान अपने होने वाले बच्चे का कॉर्ड ब्लड और स्टेम सेल भविष्य में जरूरत पड़ने पर इलाज के काम आ सके इसलिए कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया था। इसके लिए उन्होंने 6,490 रुपये की शुरुआती फीस जमा की और सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी। 15 सितंबर 2023 को बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में कॉर्ड बल्ड का सैंपल लिया गया। इसके बाद कंपनी ने ईमेल भेजकर बताया कि सैंपल उन्हें सुरक्षित मिल गया है। इससे दंपती को पूरा भरोसा हो गया कि पूरी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो गई है। 

 

दंपती के कहना है कि 25 सितंबर को कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बाकी पैसे लेने के लिए उनसे संपर्क किया। उन्होंने तुरंत अपना पता भेज दिया और तय समय पर चेक लेने के लिए आने को कहा लेकिन प्रतिनिधि के पहुंचने से पहले ही उनके पास एक मैसेज आया, जिसमें बताया गया कि भुगतान में देरी होने की वजह से उनका सैंपल रिजेक्ट कर दिया गया है। दंपती का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें न तो पहले कोई लिखित नोटिस दिया और न ही यह बताया कि समय पर पैसे जमा नहीं करने पर उनका सैंपल नष्ट कर दिया जाएगा।

 

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ब्याज सहित लौटानी होगी राशि

सुनवाई के दौरान कंपनी ने कहा कि एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि अगर 72 घंटे के भीतर भुगतान और जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं किए गए तो सैंपल नष्ट कर दिया जाएगा। आयोग ने मानाा कि कंपनी ने पहले सैंपल लिया, उसे लैब तक पहुंचाया और इसकी पुष्टि भी की थी। ऐसे में बिना किसी नोटिस के सैंपल नष्ट करना बिल्कुल सही नहीं था।

 

आयोग ने कहा कि नवजात के कॉर्ड ब्लड को सुरक्षित रखना जीवन में केवल एक बार मिलने वाला अवसर होता है और इसे बाद में दोबारा एकत्र नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर आयोग ने कंपनी को 6,490 रुपये की जमा राशि ब्याज सहित लौटाने, 2 लाख रुपये मानसिक पीड़ा और नुकसान के मुआवजे और 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है।

 

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कॉर्ड ब्लड बैंकिंग क्या होती है?

जब बच्चे का जन्म होता है तो उसका नाल (अम्बिलिकल कॉर्ड) काटने के बाद उसमें थोड़ा-सा खून बच जाता है। इसी खून को कॉर्ड ब्लड कहा जाता है। इस खून को इकट्ठा करके लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को कॉर्ड ब्लड बैंकिंग कहते हैं। दरअसल, इस कॉर्ड ब्लड में स्टेम सेल्स बड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं। ये ऐसी खास कोशिकाएं होती हैं जो शरीर में नई कोशिकाएं बनाने और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद कर सकती हैं। कॉर्ड ब्लड बैंक इन स्टेम सेल्स को विशेष तरीके से सालों तक सुरक्षित रखते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इनका इस्तेमाल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट या मेडिकल रिसर्च के लिए करते हैं।