हरियाणा में नशे के खात्मे के लिए अब बड़े स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है। संकल्प एंटी-ड्रग सोसाइटी हरियाणा में नशे की सप्लाई रोकने, नशा तस्करों पर शिकंजा कसने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर रही हैं। इस बारे में सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पूर्व डीजीपी ओ.पी. सिंह ने जानकारी दी है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद इस सोसाइटी के प्रमुख हैं। नशे पर लगाम लगाने के लिए इस अभियान में जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर रहेगा।

 

CEO ओ.पी सिंह ने एक राज्य के नागरिकों के नाम एक संदेश जारी कर बताया कि सरकार ने उन्हें एंटी ड्रग्स सोसाइटी का कर्ता-धर्ता लगाया है और सीएम खुद इसके प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए केवल छापेमारी और गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय ड्रग सप्लाई चेन तोड़ने, बड़े तस्करों तक पहुंचने, नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के इलाज और पुनर्वास तथा समाज की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने की योजना है। ओ.पी. सिंह को सरकार ने अब अहम जिम्मेदारी दी है और वह अपनी सर्विस के दौरान भी ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। 

 

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काम की होगी समीक्षा

ओ.पी सिंह ने बताया कि प्रदेश में स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, हरियाणा एंटी-नारकोटिक्स ब्यूरो, ड्रग सेक्रेटेरिएट, नशा-मुक्त भारत अभियान, ड्रग-फ्री इंडिया मिशन, डी-एडिक्शन सेंटर और एंटी-नारकोटिक यूनिट जैसी व्यवस्थाएं पहले से काम कर रही हैं। इसके बावजूद नशे की उपलब्धता, युवाओं की मौत और तस्करी से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

 

उन्होंने कहा, 'पुलिस विभाग में काम करते हुए गांवों, चौपालों, अखबारों और अदालतों में उठने वाले मुद्दों को करीब से देखने के बाद नशे के खिलाफ मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से खुलेआम नशे की बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होना, नशा-मुक्त घोषित गांवों में भी युवाओं की मौतें होना और छोटे तस्करों के पकड़े जाने के बावजूद बड़े तस्करों का बच निकलना शामिल है।' उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा नशे की लत से जूझ रहे परिवारों को समय पर इलाज और सहायता नहीं मिलने तथा नशे से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

जिलों में तय होगी जिम्मेदारी

नशे के खिलाफ अभियान को परिणाम आधारित बनाने पर ओ.पी सिंह ने जोर दिया। इसके लिए जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया। ओ.पी सिंह ने संबंधित क्षेत्रों में नशे की सप्लाई, तस्करी के नेटवर्क, संवेदनशील गांवों और प्रभावित युवाओं की स्थिति पर नियमित निगरानी रखने को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई का आकलन केवल दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों के आधार पर नहीं, बल्कि नशे की उपलब्धता में कमी और तस्करी के नेटवर्क पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर भी किया जा सकता है।

प्लाई चेन तोड़ने पर ध्यान

ओ.पी सिंह ने ड्रग्स के खिलाफ अभियान के बारे में जानकारी देते हुए लिखा कि रणनीति के तहत ड्रग सप्लाई चेन तोड़ने, बड़े तस्करों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर रहेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से जूझ रहे युवाओं को इलाज और पुनर्वास की सुविधा भी मिले।

गांवों तक पहुंचेगा अभियान

 

इस अभियान के तहत शिक्षा संस्थानों और गांवों पर खास जोर रहेगा। नशे के खिलाफ लड़ाई में स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओ.पी सिंह ने कहा कि शिक्षकों, अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की मदद से युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा नशे की शुरुआती अवस्था में ही उनकी पहचान करने पर ध्यान दिया जाएगा।

 

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इलाज पर भी रहेगा फोकस

नशे के कारण प्रभावित युवाओं और उनके परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना भी प्रस्तावित रणनीति का अहम हिस्सा है। इसके तहत नशा मुक्ति केंद्रों की भूमिका, उपचार की उपलब्धता और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत होगी। उद्देश्य यह है कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को अपराधी मानकर छोड़ने के बजाय उन्हें इलाज, परामर्श और बेहतर जीवन की ओर लौटने का अवसर मिले। ओ.पी सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवारों के सहयोग को भी जोड़ा जाएगा।