उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति को लेकर सियासत तब गर्म हो गई, जब कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल ने आरोप लगाया है कि राज्य में छात्रों की स्कॉलरशिप में कटौती हुई है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कुछ आंकड़े भी शेयर किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित जाति (SC) की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए केंद्र से मिली रकम एक साल में करीब आधी रह गई।
यह आंकड़े 2023-24 और 2024-25 के हैं। कांग्रेस का कहना है कि CM योगी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि राज्य में 5 लाख के करीब बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित रह गए। आरोप है कि छात्रों के स्कॉलरशिप एप्लीकेशन को जानबूझकर रिजेक्ट किया जाता है या फिर लटका दिया जाता है।
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कांग्रेस के नेता राजेंद्र पाल ने क्या कहा?
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल के हवाले से कांग्रेस ने लिखा, 'यूपी में छात्रों की स्कॉलरशिप में कटौती की जा रही है। SC पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्र की तरफ से 2023-24 में 674 करोड़ 83 लाख रुपए मिले थे। 2024-25 में इसे आधा कर 366 करोड़ 2 लाख रुपए कर दिया गया।' हालांकि, इन आंकड़ों में साल 2026 का आंकड़ा नहीं है।
राजेंद्र पाल ने कहा कि CM योगी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि राज्य में 5 लाख के करीब बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित रह गए। यूपी के ज्यादातर कॉलेजों में यही हालात हैं। छात्रों के स्कॉलरशिप एप्लीकेशन को जानबूझकर रिजेक्ट किया जाता है या फिर लटका दिया जाता है। ऐसे में जब छात्रवृत्ति नहीं मिलती, तो मजबूरी में बच्चे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
2026 तक के आंकड़े क्या बताते हैं?
कांग्रेस की ओर से इस साल का आंकड़ा नहीं दिया गया है। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अलग-अलग राशि जारी की। साल 2023-24 में 674.83 करोड़ रुपये, साल 2024-25 में 366.02 करोड़ रुपये और 2025-26 में 617.64 करोड़ रुपये जारी किए गए। हाल ही में आए रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को ओर से चल रही अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत कुल ₹19,216.46 करोड़ की राशि जारी की है। इन छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत जारी की गई कुल राशि 2023-24 में ₹6,094.48 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹6,200.59 करोड़ और 2025-26 में ₹6,921.39 करोड़ हो गई है।
इन छात्रवृत्ति योजनाओं में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति', अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों के लिए 'प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना', 'टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम' (TCS) और अनुसूचित जाति और अन्य पात्र उम्मीदवारों के लिए 'नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप' (NOS) योजना शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति' के तहत, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में ₹17,224.63 करोड़ की राशि जारी की गई। जारी की गई यह राशि 2023-24 में ₹5,475.42 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹5,562.26 करोड़ और 2025-26 में ₹6,186.95 करोड़ हो गई।
अनुसूचित जाति (SC) और अन्य वर्गों के लिए 'प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना' के तहत तीन सालों में कुल ₹1,469.92 करोड़ की राशि जारी की गई; जिसमें 2023-24 में ₹446.66 करोड़, 2024-25 में ₹460.90 करोड़ और 2025-26 में ₹562.36 करोड़ की राशि शामिल है। 'टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम' के तहत 304.29 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि इसी अवधि के दौरान 'नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप स्कीम' के तहत 217.62 करोड़ रुपये जारी किए गए।
SC छात्रों के लिए 'पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम' के तहत, तमिलनाडु को केंद्रीय सहायता के रूप में 2023-24 में 713.70 करोड़ रुपये, 2024-25 में 1,032.09 करोड़ रुपये और 2025-26 में 1,034.94 करोड़ रुपये मिले। इसी अवधि के दौरान महाराष्ट्र को क्रमशः 1,652.98 करोड़ रुपये, 929.92 करोड़ रुपये और 1,095.80 करोड़ रुपये मिले, जबकि उत्तर प्रदेश को क्रमशः 674.83 करोड़ रुपये, 366.02 करोड़ रुपये और 617.64 करोड़ रुपये मिले।
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5 लाख से ज्यादा छात्रों को क्यों नहीं मिली थी छात्रवृत्ति?
सितंबर 2025 में लखनऊ में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंचित 5 लाख से ज्यादा छात्रों को दीपावली से पहले छात्रवृत्ति मिलेगी। उनका कहना था कि संस्थानों के डेटा अपलोड न करने और डेटा लॉक होने की वजह से करीब 5 लाख एससी-एसटी छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी। उन्होंने इसपर कहा था कि जिनकी गलती से छात्रवृत्ति रुकी, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017-18 से 2024-25 के बीच एससी-एसटी के 1.23 करोड़ छात्रों को ₹9,150 करोड़ सीधे बैंक खातों में भेजे गए। उन्होंने छात्रों के वंचित रहने की बात मानी थी, पर वजह फंड कटौती नहीं, संस्थानों की डेटा गलती बताई थी।
