सरकार से नरमी, विपक्ष पर वार, उमेश कुमार के इस्तीफे की असली 'पटकथा' क्या है?
उमेश कुमार का रुख पुष्कर सिंह धामी के प्रति नरम रहा है। उन्होंने विपक्ष की वजह से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है।

उमेश कुमार अपनी पत्नी सोनिया शर्मा के साथ। Photo Credit: nni.sonia/FB
उत्तराखंड में अपने शाही अंदाज के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधायक पद से इस्तीफा देने का एलान किया है। वह दो दिवसीय सत्र के आखिरी दिन अपना इस्तीफा सौंप रहे हैं। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और किसानों के मुद्दों वह अकेले पड़ गए हैं और विपक्ष उनका साथ नहीं दे रहा है। यह राज्य की राजनीति में पहला मौका है, जब किसी विपक्षी विधायक ने सत्ता पक्ष से नहीं, विपक्ष की राजनीति की वजह से इस्तीफा दिया है।
उमेश कुमार हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने अचानक गुरुवार को एलान किया कि वह अपने पद से इस्तीफा देंगे। एलान से पहले उन्होंने भराड़ीसैंण में सत्र के पहले दिन मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि वह पिछले साढ़े चार साल से विपक्ष की ओर उम्मीद से देख रहे थे।
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विपक्ष नहीं, पार्टी बनाने के लिए दिया इस्तीफा?
उमेश कुमार का कहना है कि सदन के अंदर और बाहर विपक्ष के साथ खड़े रहने के बावजूद हरिद्वार जिले के मुद्दों पर उन्हें समर्थन नहीं मिला। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे नई राजनीतिक पार्टी बनाने की कोशिश करेंगे और अगले विधानसभा चुनाव में 8 से 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर लड़ेंगे।
उमेश कुमार इशारा कर रहे हैं कि वह अपना राजनीतिक दल बनाएंगे। वह उत्तराखंड की चर्चित हस्ती हैं। राज्य की राजनीति में गहरी पकड़ रही रही है। वह समाचार प्लस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी हैं। राजनीति में उतरने से पहले वह पत्रकार भी रहे हैं। अब उनका अगला कदम राजनीतिक पार्टी बनाने की ओर है।
उमेश कुमार के इस्तीफे की वजह पत्नी की पार्टी है?
उमेश कुमार अपनी पत्नी सोनिया शर्मा की अध्यक्षता वाले दल 'जन निर्माण पार्टी' में शामिल होंगे। इस दल की अध्यक्षता सोनिया शर्मा कर रही हैं। वह हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं और चुनाव में उतरने की इच्छा रखती हैं। उमेश कुमार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अब विधायक से आगे बढ़कर मंत्री बनने की है।
उमेश कुमार निर्दलीय विधायक हैं। वह इस कार्यकाल में किसी भी राजनीतिक दल में विधायक के तौर पर शामिल नहीं हो सकते हैं। दल बदल कानून की वजह से उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है। संविधान की 10वीं सूची के पैराग्राफ 2 में यह प्रावधान है। अब अगर उमेश कुमार अपनी पत्नी की पार्टी का जनाधार बढ़वाना चाहते हैं और 8 से 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें जमकर प्रचार भी करना होगा।
उमेश कुमार को इस्तीफे की वजह मिल गई। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से महज कुछ महीने पहले इस्तीफा देकर उन्होंने अपनी सियासी जमीन तैयार कर ली है। उमेश कुमार की पत्नी सोनिया शर्मा भी क्षेत्र में सक्रिय रहती हैं। उनकी नजर सिर्फ खानपुर में ही नहीं बल्कि हरिद्वार की 11 विधानसभा सीटों पर है।
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किन सीटों पर उम्मीदर उतार सकते हैं उमेश कुमार?
- भेल रानीपुर
- ज्वालापुर
- भगवानपुर
- झबरेड़ा
- पिरान कलियर
- रुड़की
- खानपुर
- मंगलौर
- लक्सर
- हरिद्वार ग्रामीण
इन सीटों पर किसका कब्जा है?
इन 10 विधानसभा सीटों में से सर्वाधिक 5 सीटों पर कांग्रेस के विधायकों ने साल 2022 में जीत हासिल की थी। सिर्फ 2 सीटों पर बीजेपी है। खानपुर से खुद उमेश कुमार विधायक हैं, उन्होंने प्रणव सिंह चैंपियन को करीब 4 हजार वोटों से हराया था। एक सीट पर बहुजन समाज पार्टी का कब्जा है।
इस्तीफे की क्या वजह बता रहे उमेश कुमार?
उमेश कुमार का कहना है कि वह बेहद निराश और दुखी हैं। उनका कहना है कि खानपुर की जनता ने उन्हें निर्दलीय विधायक चुनकर इसलिए भेजा था कि वे विधानसभा में उनकी बात उठाएं। जब भी उन्होंने भ्रष्टाचार या किसानों के सवाल उठाए, विपक्ष से साथ की उम्मीद रही, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि उन्हें साढ़े चार साल में एक भी दिन याद नहीं, जब विपक्ष इन मुद्दों पर उनके साथ खड़ा रहा हो।
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अगले चुनाव में उनकी सोच वाले और प्रतिनिधि विधानसभा पहुंचें, जिससे हरिद्वार जिले की समस्याएं ठीक से उठ सकें। किसानों के बकाये का जिक्र करते हुए उन्होंने इकबालपुर चीनी मिल से जुड़े किसानों के 118 करोड़ रुपये दो साल से रुके होने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान न होने से इलाज का खर्च न उठा पाने के कारण कई किसानों की मौत हो गई।
उमेश कुमार ने 2023 की बाढ़ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूरा हरिद्वार जिला प्रभावित हुआ और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन बाद में किसानों के नाम बकाये की वसूली के प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज माफ नहीं हुआ, बिजली के बकाया बिल माफ नहीं किए गए और किसानों के बिजली कनेक्शन काट दिए गए।
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अब कैसी राजनीति करेंगे उमेश कुमार?
उमेश कुमार ने साफ किया कि वह न कांग्रेस में जाएंगे और न BJP में। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं का वे राजनीतिक रूप से विरोध करते रहे हैं, उनकी तारीफ में नारे नहीं लगा सकते। दोनों दलों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उनसे BJP में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत या कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के जयकारे लगवाए जाएंगे।
उमेश कुमार का कहना है कि उत्तराखंड में सभी दलों को मौका मिल चुका है, लेकिन हालात में खास बदलाव नहीं आया। वह ऐसा वैकल्पिक मंच बनाना चाहते हैं, जो महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मौजूदा विपक्ष पर निर्भर हुए बिना उठा सके।
उन्होंने कहा कि वह 8 से 10 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रहे हैं और जहां भी लोग बुलाएंगे, वहां पहुंचेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली विधानसभा में उनकी सोच के 2 से 4 लोग पहुंचेंगे। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता बेहतर सड़कें, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन चाहती है।
क्यों मशहूर हैं उमेश कुमार, करते क्या हैं?
उमेश कुमार उत्तराखंड के बड़े पत्रकारों में शामिल रहे हैं। साल 2016 के चर्चित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर सुर्खियों में आए थे। इस स्टिंग से उस समय की हरीश रावत सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं थीं। हरीश रावत इस स्टिंग में विधायकों की सौदेबाजी में शामिल दिखाए गए थे। इस स्टिंग के बाद उमेश कुमार सरकार के निशाने पर आए थे।
वह 'समाचार प्लस' चैनल के प्रमुख रह चुके हैं। इस दौरान उन पर सरकारों को अस्थिर करने की साजिश और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे। इन आरोपों के चलते उन्हें पहले पुलिस हिरासत और कानूनी जांच का सामना करना पड़ा। चुनावी राजनीति में आने के बाद उन्होंने खानपुर के पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन से पंगा लिया।
दोनों के बीच सोशल मीडिया पर खूब लड़ाइयां होती हैं, गाली-गलौज की नौबत आती है। दोनों एक-दूसरे को मेंढक तक बुलाते हैं। प्रणव सिंह के साथ उनकी दुश्मनी की वजह से आए दिन खबरें बनती हैं।
हाई प्रोफाइल जिंदगी वाले नेता हैं उमेश कुमार
उमेश कुमार की पहचान एक हाई-प्रोफाइल नेता की रही है। वह महंगे कपड़े पहनते हैं, उनके साथ गाड़ियों का काफिला चलता है और निजी सुरक्षा गार्ड रहते हैं। उनका अंदाज पारंपरिक नेताओं से अलग माना जाता है। वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। बॉलीवुड पार्टियों में पहुंचते हैं, क्रिकेटरों से दोस्ती है, चीन तक का दौरा करते हैं। मीडिया और कंसल्टेंसी से जुड़े कारोबार की वजह से राजनीति के साथ कारोबारी और मीडिया जगत में भी उनका असर माना जाता है।
उमेश कुमार जनता के लिए हमेशा तैयार रहने का दावा करते हैं। उनकी पत्नी सोनिया शर्मा भी खूब राजनीतिक रैलियां करती हैं। आर्थिक मदद करने, गरीब बेटियों की शादी का खर्च उठाने और हेल्थ कैंप लगवाने का दावा भी करते हैं। अब वह नए सियासी पारी की तैयारी में हैं। ऐसी चर्चा है कि हरिद्वार ग्रामीण से वह अपनी पत्नी को उतारेंगे, खुद खानपुर से ही ताल ठोकेंगे।
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BJP नहीं, कांग्रेस को टेंशन देंगे उमेश कुमार?
उमेश कुमार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रिश्ते व्यावहारिक और संतुलित रहे हैं। उमेश कुमार खुद सार्वजनिक मंचों पर सीएम धामी से अपनी लगभग एक दशक से ज्यादा पुरानी पुरानी मित्रता का जिक्र करते रहे हैं और खानपुर में सिडकुल, उप-जिला अस्पताल जैसे विकास कार्यों का श्रेय भी उन्हें देते रहे हैं। साल 2022 में जीत के बाद उन्होंने सीएम धामी से मुलाकात भी की थी।
विधायकी से इस्तीफा देते हुए उन्होंने मुख्य रूप से कांग्रेस समेत विपक्ष पर जनहित और हरिद्वार के मुद्दों पर साथ न देने का आरोप लगाया, जबकि सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख कम दिखाया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उमेश कुमार सरकार से बनाए रखना चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में विकास कार्य न रुकने पाएं लेकिन गठबंधन का हिस्सा भी नहीं रहते हैं।
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