हिमाचल प्रदेश के धौलाधार रेंज में मैक्लॉडगंज के पास स्थित त्रिउंड ट्रेक को साफ-सुथरा रखने के लिए एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है। अब ट्रेकर्स और हाइकर्स को ट्रेक के दौरान अपना कचरा खुद इकट्ठा करके वापस लाना होगा। बता दें कि पिछले कई सालों से पहाड़ी इलाकों में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने के लिए सरकार और वन विभाग लगातार अलग-अलग कदम उठाते रहे हैं। इनमें रोजाना ट्रैकर्स की संख्या पर सीमा तय करना, एंट्री फीस लागू करना, कैंपिंग को लेकर नियम बनाना और इनोवेटिव डिपॉजिट-रिफंड मॉडल शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब त्रिउंड ट्रेक पर 11 अगस्त 2026 से एक और सख्त नियम लागू किया है, नाम है 'कैरी बैक वेस्ट'।

 

इसके तहत अब ट्रेकर को एंट्री पॉइंट पर 500 रुपये जमा करने होंगे। यह पैसा तभी वापस मिलेगा, जब आप अपना पूरा कचरा वापस लाएंगे। यानी प्लास्टिक की बोतलें, रैपर और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामान वापस करना ही होगा, इधर-उधर फेंकना भारी पड़ेगा। बता दें कि यह पहल फिलहाल त्रिउंड ट्रेक पर लागू की गई है और आने वाले समय में इसे धर्मशाला वन मंडल के अन्य ट्रेकिंग रूट्स तक भी बढ़ाया जाएगा। 

 

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आंकड़ों से समझे कितनी बड़ी है कचरे की समस्या 

अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्रिउंड ट्रेक पर 2025-26 में करीब 77,000 ट्रेकर्स पहुंचे, केवल अप्रैल-जुलाई 2026 के चार महीनों में ही करीब 33,000 घरेलू पर्यटक और 600 विदेशी नागरिक यहां ट्रेक करने पहुंचे। समस्या तब पैदा होती है, जब यही ट्रेकर्स अपना कचरा इधर-उधर फेंक देते हैं। एक क्लीनअप ड्राइव में सिर्फ एक ट्रिप में 30 से ज्यादा शराब की बोतलें, ढेरों PET बोतलें, टेट्रा पैक और जले हुए पिज्जा के डिब्बे तक मिले थे। 

 

Indiahikes जो कि एक ट्रेकिंग कंपनी है, मुख्य तौर पर भारतीय हिमालय में ट्रेक कराती है। इनमें हिमाचल प्रदेश (त्रिउंड, कुआरी पास, केदारकंठा), उत्तराखंड और सिक्किम जैसी जगह शामिल हैं। यह कंपनी अब तक हिमालय से 100 टन से ज्यादा कचरा हटा चुकी है। इनमें से ज्यादातर हिस्सा चिप्स-बिस्किट के हल्के प्लास्टिक रैपर्स का है।

 

यह समस्या केवल त्रिउंड की नहीं है, पूरे हिमाचल प्रदेश और अन्य दूसरे पहाड़ी जगहों का यही हाल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीक सीजन में अकेले शिमला रोज करीब 2,500-2,800 टन ठोस कचरा पैदा करता है। मनाली में रोज 1,100 टन से ज्यादा कचरा निकलता है, यह पीक सीजन में दोगुना हो जाता है।

डिपॉजिट रिफंड स्कीम (DRS) 2025 क्या है?

31 मई 2025 को CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में डिपॉजिट रिफंड स्कीम (DRS) 2025 स्कीम को मंजूरी मिली थी। 16 जून 2025 को पर्यावरण विभाग ने इसे औपचारिक रूप से नोटिफाई कर दिया था। यानी प्रस्ताव लागू हो चुका नियम बन गया। हालांकि यह पायलट बेसिस पर ही है और शुरुआत में इसे केवल ज्यादा फुटफॉल वाली टूरिस्ट जगहों पर लागू किया गया। 

 

इसका सबसे बड़ा उदाहरण चंबा जिले का मणिमहेश यात्रा रूट पर देखने को मिला, यहां DRS को अमल में लाया गया। तब हिमाचल प्रदेश नॉन-बायोडिग्रेडेबल गारबेज एक्ट, 1995 के तहत इस रूट पर मौजूद सभी दुकानदार-वेंडरों के लिए PET बोतल, मल्टी-लेयर प्लास्टिक और टेट्रा पैक सिर्फ QR-कोडेड डिपॉजिट वैल्यू के साथ ही बेचना अनिवार्य कर दिया था। ऐसा नहीं करने पर सख्त कार्रवाई का भी नियम था।

 

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त्रिउंड और हिमाचल में कचरा कम करने में कब क्या हुआ?

  • 1995: हिमाचल में नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे को कंट्रोल करने का कानून बना। यही बाकी सारी स्कीमों की बुनियाद है।
  • 2018: सरकार ने थर्मोकोल के कप, प्लेट और गिलास पर राज्य में बैन लगा दिया।
  • अक्टूबर 2019: सरकार ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक ₹75 प्रति किलो में वापस खरीदना शुरू किया।
  • 23 नवंबर 2023: रोज सिर्फ 400 ट्रेकर्स, समिट पर सिर्फ 20 टेंट, रात रुकने वाले सिर्फ 40 लोग, और ₹200 एंट्री फीस तय हुई।
  • 3 दिसंबर 2023: गैलू में चेकपोस्ट बनाकर फीस वसूली शुरू हुई।
  • 14 जनवरी 2024: विरोध के चलते CM सुक्खू के आदेश पर फीस आधी की गई।
  • 31 मई 2025: हिमाचल की कैबिनेट ने डिपॉजिट रिफंड स्कीम (DRS) 2025 को मंजूरी दी।
  • 16 जून 2025: DRS औपचारिक रूप से नोटिफाई हुई, यानी लागू कर दी गई।
  • 19 जुलाई 2025: चंबा प्रशासन समझौते के साथ DRS मणिमहेश यात्रा रूट पर लागू हुई।
  • 11 अगस्त 2026: धर्मशाला फॉरेस्ट सर्कल DFO अमित शर्मा ने त्रिउंड पर नया कैरी-बैक-वेस्ट नियम लागू किया। 

कचरा कम करना है असली मकसद

DRS और कैरी-बैक-वेस्ट नियम का मकसद है ऐसी जगहों से कचरा कम करना। DRS में खरीदी हुई चीजों (बोतल, कैन, टेट्रा पैक) पर लागू होती है। कैरी-बैक-वेस्ट नियम पूरे ट्रेक पर हर कचरे पर लागू होता है। DRS पर्यावरण विभाग चलाता है और यह QR कोड से जुड़ी है, जबकि कैरी-बैक-वेस्ट नियम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट सीधे एक फ्लैट ₹500 डिपॉजिट के जरिए लागू करता है। इनका मकसद यही है कि कचरा न फैले।

केवल सरकार की नहीं, हमारी भी जिम्मेदारी

आज के समय में पहाड़ी जगहों पर कचरा एक बड़ी समस्या बन चुका है। अब सरकार और अन्य दूसरे विभाग डिपॉजिट और रिफंड मॉडल पर काम कर रहे हैं।  क्योंकि अब केवल कचरा न फैलाएं, कूड़ा डस्टबिन में डालें जैसे बोर्ड लगाकर अपील करने से काम नहीं बन रहा है। हर जगह रास्ते में बोतलें-रैपर का कचरा फैला नजर आता है। अपने आसपास के इलाकों को साफ-सुथरा रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, हमारी भी है। आगे चलकर यह नियम धर्मशाला के बाकी ट्रेक्स पर भी लागू होगा।